ये उन्मुक्त विचार -पुष्पा शर्मा”कुसुम”
हिंदी कविताये उन्मुक्त विचार -पुष्पा शर्मा”कुसुम” नील गगन के विस्तार सेपंछी के फड़फड़ाते पंख से,उड़ रहे, पवन के संग ये उन्मुक्त विचार । पूर्ण चन्द्र के आकर्षण सेबढते उदधि में ज्वार से,उछलते, तरंगों के संगये उन्मुक्त विचार। बढती , सरिता के वेग सेकगारों के ढहते पेड़ से,रुकते नहीं, भँवर मेंये उन्मुक्त विचार। निर्झर के कल-कल नाद […]
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