कविता बहार

संविधान शुभचिंतक सबका

हिंदी कविता

संविधान शुभचिंतक सबका (आल्हा छंद) विश्लेषकजन का विश्लेषण, सुधीजनों का है उपहार।संविधान शुभचिंतक सबका, बांटे जो जग में अधिकार।। जन मानस सब विधि के सम्मुख, कहते होते एक समान।अपने मत का पथ चुन लें हम, शिक्षा का भी मुक्त विधान।।समता से अवसर हो हासिल, सबके सपने हों साकार।संविधान शुभचिंतक सबका, बांटे जो जग में अधिकार।।

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मैं हूँ मोहब्बत – विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

मोहब्बत मुझेखूब दबाया गयासूलियों परलटकाया गयामेरा कत्ल भीकराया गयामुझे खूब रौंदा गयाखूब कुचला गयामैं बाजारों में निलाम हुईगली-गली बदनाम हुईतख्तो-ताज भीखतरा मानते रहेरस्मो-रिवाज मुझसेठानते रहेजबकि में एकपावन अहसास हूँहर दिल केआस-पास हूँबंदगी काहसीं प्रयास हूँमैं हूँ मोहब्बतजीवन का पहलूखास हूँ। –विनोद सिल्ला©

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संविधान दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

संविधान दिवस पर कविता हांमैं सेकुलर हूँसमता का समर्थक हूँमैं संविधान प्रस्त हूँसेकुलर होना गुनाह नहीं गुनाह हैसांप्रदायिक होनागुनाह हैजातिवादी होनागुनाह हैपितृसत्ता कासमर्थक होनागुनाह हैभाषावादी होनागुनाह हैक्षेत्रवादी होनागुनाह हैभेदभाव कापोषक होना। -विनोद सिल्ला©

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मैं सो जाऊं – बाल कविता

हिंदी कविता

बाल गीत प्यारे प्यारे सपनों की दुनिया में, मैं खो जाऊं।चंदन के पलने में मुझे झुलाओ, मैं सो जाऊं। ममता का आंचल ओढ़ कर, तेरा राजा बेटा,सुकून भरी नींद में मुझे सुलाओ, मैं सो जाऊं। परियों की दुनिया की सैर, करनी है सपने में,चंदा तारे सब मुझे खिलाएं, मैं सो जाऊं। मम्मी मेरी सबसे प्यारी,

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विश्व मानवाधिकार दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

विश्व मानवाधिकार दिवस पर कविता मिले कई अधिकार, जीवधारी को जग में|कुछ हैं ईश प्रदत्त, बने उपयोगी पग में |जीने का अधिकार, जगत में सबने पाया |भोजन पानी संग, भ्रमण का हक दिलवाया |अपने मन का नृप बने, जीव सभी इनसंसार में |अधिकारों का कर हनन, मस्त रहे व्यवहार में || अधिकारों कीइन 5 बात,

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तितली पर बाल कविता

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तितली पर बाल कविता नीली पीली काली तितली।सुंदर पंखों वाली तितली।। आए-जाए फूलों पर ये,घूमे डाली-डाली तितली।। कुदरत ने कितने रंग भरे,लाड-चाव से पाली तितली।। फूल-फूल पर आती जाती,रहती है कब खाली तितली।। सब को खुशियां देने वाली,ऐसी है मतवाली तितली।। छूने से ये डर जाती है,नाजो-नखरे वाली तितली। -विनोद सिल्ला

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पशु पक्षियों की पाठशाला ( कविता )

हिंदी कविता

पशु पक्षियों की पाठशाला ( कविता ) सुबह हुई है देखो भाई,पशु पक्षियों ने कक्षा लगाई,कौवा बोला ‘क’ से मैं,कोयल बोली ‘क’ से मैं,कबूतर बोला ‘क’ से मैं,ख से मैं हूँ खरगोश,बोला सब हो जाओ खामोश,न करो तुम आपस में लड़ाई,हमने अपनी अपनी पहचान बनाई,‘ग’ से बोले गधे भाई,एकता में है शक्ति समाईइतने में आये

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गाय पालन पर छत्तीसगढ़ी कविता

हिंदी कविता

गाय पालन पर छत्तीसगढ़ी कविता पैरा भूँसा ,कांदी-कचरा,कोठा कोंन सँवारे,हड़ही होगे ,बछिया कहिके रोजेच के धुत्कारे।। बगियाके बुधारू ,छोड़िस,गउधन आन खार।बांधे-छोरे जतने के,झंझट हे बेकार।। बछिया आगे शहर डहर अउपारा-पारा घुमय।कोनो देदे रोटी-भातलइका मन ह झुमय।। देखते-देखत बछिया संगीघोसघोस ले मोटागे।चिक्कन-देहें ,दिखन लागयमन सबके हरसागे।। आना होगे एक दिन संगीबुधारू के हाट।देख परिस ,बछिया ललालच

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हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर कविता सच कहो,चाहे तख्त पलट दो, चाहे ताज बदल दोभले “साहब” गुस्सा हो, चाहे दुनिया इधर से उधर होतुम रहो या ना रहोपर, जब कुछ कहो तो, सच कहो। सच पर ही तो, न्याय टिका हैशासन खड़ा है, धर्म बना हैहे लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ!सच से ही तुम होतो, अगर कुछ

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करवा चौथ पर कविता

करवाचौथ पर हिंदी कविता

समय और जीवन दर्शन

करवाचौथ पर हिंदी कविता- करवा चौथ हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भारत के जम्मू, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान में मनाया जाने वाला पर्व है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। यह पर्व सौभाग्यवती (सुहागिन) स्त्रियाँ मनाती हैं। यह व्रत सवेरे सूर्योदय से पहले लगभग 4 बजे से आरंभ होकर रात में चंद्रमा दर्शन के उपरांत संपूर्ण होता है।

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हिन्दी की महत्ता पर कविता

मन और भावनाएँ

हिन्दी की महत्ता पर कविता – मानव जाति अपने सृजन से ही स्वयं को अभिव्यक्त करने के तरह-तरह के माध्यम खोजती रही है। आपसी संकेतों के सहारे एक-दूसरे को समझने की ये कोशिशें अभिव्यक्ति के सर्वोच्च शिखर पर तब पहुँच गई जब भाषा का विकास हुआ। भाषा लोगों को आपस मे जोड़ने का सबसे सरल

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टेचराही….(व्यंग) दिन आगे कइसा

हिंदी कविता

टेचराही….(व्यंग) दिन आगे कइसा गोरर-गोरर केजिनगी सहीचलत हे नेट,महिना पुटभरे परथेभरे झन पेट। दु दिन आघुमटकत रहिथेआरो मोबाइल मफोन आथे छोकरी केकहिथे ,स्टाइल म। जल्दी भरवा लोआपके सेवाहो जाही बंद,कसके लेववफेसबुक, वाट्सअपके आनंद। मरताका न करतालगा थे जुगाड़,लइका केफीस पटे झन पटेहो भले आड़। मुड़ खुसारेनटेरे आँखीअंगरी चलत हे,निसा धरेलत परगेरात-दिन कलत हे। चुहक डरिसनेट

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