कविता बहार

छत्तीसगढ़ी गीत – तेरस कैवर्त्य

हिंदी कविता

छत्तीसगढ़ी गीत – झिन रोबे दाई मोर झिन रोबे दाई मोर झिन रोबे बाई मोर।रात दिन गुनत तंय ह झिन रोबे न ss अकेला ही जाहूँ , कोनो नइ जावय संग म। झुलत रही मुहरन , तोर नजरे नजर म।भुइंया म आके , झिन जीयव घमंड म।काँटा खूँटी झिन गड़व , जिन्गी डहर म।राख हो

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प्यार तुम ही से करता हूँ – कृष्ण सैनी

हिंदी कविता

प्यार तुम ही से करता हूँ – कृष्ण सैनी विरह को पीकर में,आज इक इंसाफ करता हु।प्यार तुम ही से करता था,प्यार तुम ही से करता हु। सोचा इत्तला कर दूं,अब भी तुझपे  ही मरता हु।प्यार तुम ही से करता था,प्यार तुम ही से करता हूँ। मेरी कोशिश थी बस इतनी,कभी बदनाम ना हो तु।की

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धूप पर कविता – पुष्पा शर्मा

नारी जीवन और संवेदना

धूप पर कविता – पुष्पा शर्मा कोहरे की गाढी ओढनीहिमांकित रजत किनारी लगी।ठिठुरन का संग साथ लिया सोई  रजनी अंधकार पगी। ऊषा के अनुपम रंगों नेसजाई अनुपम रंगोली,अवगुण्ठन हटा होले सेधूप आई ,ले किरण टोली। इठलाती बलखाती सी वोसब ओर छा रही है, धूप।नर्म सी सबको सहलातीभाया इसका रूप अनूप । नव जीवन  संचार करतीसृष्टि

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पुष्पा शर्मा की गीतिका – पुष्पा शर्मा

हिंदी कविता

पुष्पा शर्मा की गीतिका – पुष्पा शर्मा नज़र अंदाज़ करते हैं गरीबी को सभी अब तो।भुलाकर के दया ममता सधा स्वारथ रहे अब तो। अहं में फूल कर चलता कभी नीचे नहीं देखा,मिले जब सीख दुनियाँ में लगे ठोकर कभी अब तो। बदल देता नज़ारा है सुई जब वक्त की घूमे,भले कितना करें अफ़सोस समय

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छत्तीसगढ़ पर कविता – पंकज

नारी जीवन और संवेदना

छत्तीसगढ़ महिमा – पंकज छत्तीसगढ़  महतारी मोर छत्तीसगढ़  महतारी।तोर  कोरा म  रहिथे दाई  दाता अउ भिखारी।उत्तर म  सरगुजा  हावे स्वर्ग  समान  कहाथे।दक्षिण म केशकाल के घाटी सबके मन ल मोहाथे।पश्चिम  म  मैकल  पर्वत  हे बैगा  मन के डेरा।अउ पूरब  म अब्बड़ ऊँचा  जशपुर क्षेत्र पठारी।छत्तीसगढ़  महतारी महानदी ल गंगा कहिथे सबके प्यास बुझाथे।डोंगरगढ़ बमलाई म

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प्रेमिका के लिए कविता – नेहा चाचरा बहल

हिंदी कविता

प्रेमिका के लिए कविता – न जाने क्यों आज तुम्हे देखने का बड़ा मन हैलिख कर जज़्बात खत में तुम्हे भेजने का बड़ा मन है हाथों में हाथ डाले हम तुम भी घूमते थे फ़ुरसत के उन पलों को ढूंढने का बड़ा मन है कागज़ में नाम लिख कर कभी उसको फाड़ते थेतेरे नाम के

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परिवर्तन पर कविता – पुष्पा शर्मा

समाज और यथार्थ

परिवर्तन पर कविता – पुष्पा शर्मा परिवर्तन अवश्यंभावी है,  क्योंकि यह सृष्टि  का नियम है।नित नये अनुसंधान का क्रम है।सतत श्रम शील मानव का श्रम है। परिवर्तन   ज्ञान, विज्ञान मेंपरिवर्तन मौसम के बदलाव मेंसंसाधनों  की उपलब्धियों की होड़ में।परिवर्तन परिवार मेंसमाज राज्य देश में। हर रीति और रिवाज   में खान पान पहनावे मेंनित नया उत्साह  देता,जीवन 

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मानव जीवन पर कविता – सुधा शर्मा

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मानव जीवन मिल पाता है कभी कभी – सुधा शर्मा जीवन में ऐसा भी वक्त आता है कभी कभीकोई भीड़ में तन्हा हो जाता है कभी कभी सपनों के घरौंदे सारे बिखर जाते हैं स्मृतियों का इक महल बन जाता है कभी कभी कौन कहता है पीड़ाएं तोड़ती  हैं सदा तन्हाई में दर्द दवा बन

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मुफ्त की चीज पर कविता

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मुफ्त की चीज पर कविता मुफ्त की चीजों से..19.03.22———————————————हमारी आदत सी हो गई हैकि हमें सब कुछ मुफ्त में चाहिएभिखारियों की तरह हम मांगते ही रहते हैंराशन पानी बिजली कपड़ा मकान रोजगार मोबाइल और मुफ्त का वाईफाई कनेक्शन मुफ्त की चीजों सेबदलने लगे हैं हमारे खून की तासीरहम कमाना नहीं चाहते अमरबेल की तरह फैलना

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मेला पर बाल कविता

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मेला पर बाल कविता कविता 1 काले बादल, काले बादल। मत पानी बरसाओ बादल ॥ मुझे देखने मेला जाना । यहाँ नहीं पानी बरसाना। मेले से जब घर आ जाऊँ। तुमको सारा हाल सुनाऊँ। तब चुपके से गाँव में आता। छम-छम कर पानी बरसाना ।। कविता 2 जब जब भी है आता मेलाहमको खूब लुभाता

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हाथी पर बाल कविता

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हाथी पर बाल कविता हाथी पर कविता 1 हाथी आया झूम के,धरती माँ को चूम के। टाँगे इसकी मोटी हैं,आँखें इसकी छोटी हैं। गन्ने पत्ती खाता है,लंबी सूँड़ हिलाता है। सूपा जैसे इसके कान,देखो-देखो इसकी शान ॥ हाथी पर कविता 2 हाथी राजा कहाँ चले?सूँड हिलाकर कहाँ चले?हाथी राजा कहाँ चले?सूँड हिलाकर कहाँ चले? मेरे

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नन्हे मुन्ने सैनिक हम

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नन्हे मुन्ने सैनिक हम पी-पी पी-पी डर-डर-डम,नन्हे मुन्ने सैनिक हम।छोटी-सी है फौज हमारी,पर उसमें है ताकत भारी।बड़ी-बड़ी फौजें झुक जाती,जब ये अपना जोर दिखाती।पी-पी पी-पी डर-डर-डम,नन्हे-मुन्ने सैनिक हम।

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