कविता बहार

शानदार बाल कवितायेँ

हिंदी कविता

शानदार बाल कवितायेँ ताता थैयामोड़ा नाचे, हाथी नाचे, नाचे सोन चिरैया।किलक-किलक कर बंदर नाचे, ताता-ताता देया॥ठुमक ठुमक कर खरहा नाचे, ऊँट, मेमना गया।आ पहुँचा जब शेर नाचने, मची हाय रे दैया

शानदार बाल कवितायेँ Read More »

jivan doha

जब भी कभी हम खुले आसमाँ बैठते है/दीपक राज़

हिंदी कविता

जब भी कभी हम खुले आसमाँ बैठते है /दीपक राज़ जब भी कभी हम खुले आसमाँ बैठते हैज़मीं से भी होती है ताल्लुक़ात जहाँ बैठते है ये जो फूल खिल रहे है ये जो भौंरे उड़ते हैंअच्छा लगता है जब अपनो से अपने जुड़ते हैं पत्ते झर झर करते हैं हवाए सायं सायं चलती हैमदहोस

जब भी कभी हम खुले आसमाँ बैठते है/दीपक राज़ Read More »

सागर- मनहरण घनाक्षरी

प्रकृति और पर्यावरण

सागर- मनहरण घनाक्षरी पोखर व झील देखो , जिसमें न गहराई ,थोड़ा सा ही जल पाय, मारते उफान हैं I सागर को देखो वहाँ , नदियाँ हैं कई जहाँ ,सबको  समेट   हिय , करे  न  गुमान  है I जिसका न ओर छोर , दिल में अथाँह ठोर ,सबको  ही  एक  रस , देता  सम्मान  है 

सागर- मनहरण घनाक्षरी Read More »

वन दुर्दशा पर हिंदी कविता

हिंदी कविता

वन दुर्दशा पर हिंदी कविता अब ना वो वन हैना वन की स्निग्ध छायाजहाँ बैठकर विक्रांत मनशांत हो जाता थाजहाँ वन्य जीव करती थी अटखेलियाँजहाँ हिरनों का झुण्ड भरती थी चौकड़ियाँवन के नाम पर बचा हैमिलों दूर खड़ा अकेला पेड़कुछ पेड़ों के कटे अवशेषया झाड़ियों का झुरमुटजो अपनी दशा पर है उदासबड़ी चिंतनीय बात हैवनों

वन दुर्दशा पर हिंदी कविता Read More »

सुरों की मल्लिका लता जी – जगदीश कौर

हिंदी कविता

सुरों की मल्लिका लता जी- जगदीश कौर कहाँ गई वो सुरों की मल्लिकाकहाँ गई वो मधुर सी कोकिलाजिसके सुरों के जादू से सारा हिंदूस्तां था फूलों सा खिला। छेड़ती थी जब सुरों की तान मंद -मुग्ध हो जाता हिन्दूस्तानतेरे गुनगुनाएं गीतों सेऊर्जा से भरता नौजवान।। बस गई थी सभी के दिलों मेंभारत की यह लाडली

सुरों की मल्लिका लता जी – जगदीश कौर Read More »

सुविचारित पग आगे बढ़ें

समाज और यथार्थ

सुविचारित पग आगे बढ़ें मातृभूमि की सेवा करें,दलित शोषित समाज की पीड़ा हरें,निजी स्वार्थों से, ऊपर उठकर,पर हित में भी, ध्यान धरें,नव भारत के लिए, पथ गढ़ें,सुविचारित पग आगे बढ़ें! निर्धनता अभाव से जूझ रहे हैं लोग,अज्ञानता का व्याप्त है, महा रोग!अंध विश्वास, अंध श्रद्धा, सर्वत्र व्याप्त है,आगे बढ़ने के लिए, सब कुछ पर्याप्त है,फ़िर

सुविचारित पग आगे बढ़ें Read More »

भारत रत्न लताजी – ज्ञान भण्डारी

नारी जीवन और संवेदना

भारत रत्न लताजी – ज्ञान भण्डारी दूर झितिज,एक तारा टूटा ,रूठा धरा से, वो यों रूठा ,स्वर लहरी का , हर सुर डोला,शोकाकुल है बसंती चोला। कर्तव्य बोथ का भान तुम्हे था ,वेदना का अहसास तुम्हे था ,तुमने किए लाखो समर्पण ,उत्तम मिसाल दी नारी जीवन । साधिका थी तुम कंठ कोकिला ,रूप हंस वाहिनी

भारत रत्न लताजी – ज्ञान भण्डारी Read More »

बसन्त की सौगात – रमेश कुमार सोनी

प्रकृति और पर्यावरण

बसन्त की सौगात – रमेश कुमार सोनी शरमाते खड़े आम्र कुँज में कोयली की मधुर तान सुन बाग-बगीचों की रौनकें जवां हुईंपलाश दहकने को तैयार होने लगे पुरवाई ने संदेश दिया कि-महुए भी गदराने को मचलने लगे हैं। आज बागों की कलियाँ उसके आने से सुर्ख हो गयी हैं ज़माने ने देखा आज ही सौंदर्य

बसन्त की सौगात – रमेश कुमार सोनी Read More »

mahatma gandhi

बापू जी को नमन -अकिल खान

हिंदी कविता

बापू जी को नमन -अकिल खान जन्म लिए एक महान संत स्थान था पोरबंदर,नाम था महात्मा गांधी अहिंसा के थे समंदर।दुःखी अश्वेतों को अफ्रीका में दिलाई आजादी,महात्मा गांधीजी थे कर्तव्यपरायण-सत्यवादी,अहिंसा से करते थे अन्यायीयों का दमन,सत्य-अहिंसा के पुजारी,बापू जी को नमन। जर्रा-जर्रा कह उठा,देश से गोरों को है भगाना,गोरों को भगाकर,देश भक्ति का गीत है

बापू जी को नमन -अकिल खान Read More »

तटरक्षक दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

 हर साल 1 फरवरी को मनाया जाता है। 1 फरवरी 1977 को भारत में एक अंतरिम तटरक्षक संगठन के गठन का निर्णय लिया गया। तटरक्षक या तटरक्षक बल एक नौसेना के समान सैन्य या अर्द्ध-सैन्य संगठन होता है, परन्तु इसका मुख्य कर्तव्य आतंकवाद और अपराध से एक देश के समुद्री क्षेत्रों की रक्षा करना है, इसके अतिरिक्त यह खतरे में पड़े

तटरक्षक दिवस पर कविता Read More »

Scroll to Top