गणेश विदाई गीत – डी कुमार-अजस्र
हिंदी कविताअनन्त चतुर्दशी की बधाई एवं अनन्त शुभकामनाओं सहित यह गणेश विदाई गीत लिखी गई है
गणेश विदाई गीत – डी कुमार-अजस्र Read More »
अनन्त चतुर्दशी की बधाई एवं अनन्त शुभकामनाओं सहित यह गणेश विदाई गीत लिखी गई है
गणेश विदाई गीत – डी कुमार-अजस्र Read More »
आ बैठे उस पगडण्डी पर – बाबू लाल शर्मा आ बैठे उस पगडण्डी पर,जिनसे जीवन शुरू हुआ था। बचपन गुरबत खेलकूद में,उसके बाद पढ़े जमकर थे।रोजगार पाकर हम मन में,तब फूले ,यौवन मधुकर थे।भार गृहस्थी ढोने लगते,जब से संगिनी साथ हुआ था।आ बैठे उस पगडण्डी परजिनसे जीवन शुरू हुआ था। रिश्तों की तरुणाई हारी,वेतन से
आ बैठे उस पगडण्डी पर – बाबू लाल शर्मा Read More »
सृजन-गीत कब गायेगा – हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश कोई बता दे मानवता का ,परचम कब लहरायेगा,तहस-नहस को आतुर मानव,सृजन-गीत कब गायेगा। टेक। क्षिति-जल-अम्बर नित विकास के,बन कर साक्ष्य महान हुए,धरा बधूटी बन मुसकाई,स्वप्निल सुखद बिहान हुए।द्वन्द्व-द्वेष ने कब आ घेरा,मुझको कौन बतायेगा।कोई बता दे मानवता का ,परचम कब लहरायेगा।1। श्मशान पटे हैं लाशों से,असहाय तड़पती सॉसों
सृजन-गीत – हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश Read More »
जीवन मूल्य चुकाती कुल्हाड़ी – आशीष कुमार कुल्हाड़ी तीखे नैन नक्श उसकेजैसे तीखी कटारीरुक रुक कर वार करतीतीव्र प्रचंड भारीअसह्य वेदना सह रहा विशाल वृक्षकाट रही है नन्हीं सी कुल्हाड़ी शक्ति मिलती उसको जिससेकर रही उसी से गद्दारीखट खटाक खट खटाकचीर रही नि:शब्द वृक्ष कोकाट रही अंग-अंग उसकाजिसके अंग से है उसकी यारी परंतु दोषी
कुल्हाड़ी पर कविता – आशीष कुमार Read More »
स्कूल चलें हम – अकिल खान है नन्हें पैर मेरे,हौसला अफजाई बढ़ाने को,जाता हूँ स्कूल पढ़ने,इस मन को पढ़ाने को।हूं अडिग,एक नया अध्याय लिखने को,जाता हूं स्कूल शिक्षा-ज्ञान सीखने को।शिक्षा से दूर करूं,मैं अशिक्षा का भ्रम,गढ़ने एक नया अध्याय,स्कूल चलें हम। शिक्षक का डांट,मुझे एक नई राह दिखाता है,पुस्तक,कॉपी,कलम,मुझे सीखना सिखाता है।कभी अज्ञानता से पग
स्कूल चलें हम – अकिल खान Read More »
मुसाफिर हैं हम जीवन पथ के मुसाफिर हैं हम जीवन पथ केराहें सबकी अलग-अलगधूप-छांव पथ के साथी हैंमंज़िल की है सबको ललक। राही हैं संघर्ष शील सबदामन में प्यार हो चाहे कसकपीड़ा के शोलों में है कोईकोई पा जाता खुशियों का फलक। मुसाफिर हूँ मैं उस डगर कीकाँटों पर जो नित रोज चलामधुऋतु हो या
जीवन पर कविता – कुसुम Read More »
जिन्दगी का मकसद रोज सोचती हूँ।जिन्दगी का मकसदताकती ही रहती हूँमंजिल की लम्बी राह। सोचती ही रहती हूँप्रकृति की गतिविधियाँ,जो चलती रहती अविराम।सूरज का उदय अस्तरजनी दिवस का निर्माण। रात का अंधियारा करता दूरचाँद की चाँदनी का नूर।तारों की झिल मिल रहतीअँधेरी रातों का भय हरती। शीतल समीर संग होता सवेरा,परीन्दों के कलरव ने सृष्टि
जिन्दगी पर कविता – पुष्पा शर्मा Read More »
आज भी बिखरे पड़े हैं – गंगाधर मनबोध गांगुली गंगाधर मनबोध गांगुली ” सुलेख “ समाज सुधारक ” युवा कवि “ कल तक बिखरे पड़े थे , आज भी बिखरे पड़े हैं ।अपने आप को देखो , हम कहाँ पर खड़े हैं ।।01।। बट गये हैं लोग , जाति और धर्म पर ।गर्व करते रहो , मूर्खतापूर्ण
आज भी बिखरे पड़े हैं – गंगाधर मनबोध गांगुली Read More »
लालसा पर कविता जो कभी खत्म ना हो,रोज एक के बाद एक,नई इच्छाओं का जन्म होना,पाने की धुन बनी रहती है, लालसा सबको खुश रखने तक,सपनों को पूरा करने तक,कब चैन की सांस लेंगे,अंधेरों से उजालों तक,कभी तो चैन मिलेगा ,पर ये लालसा बढ़ती रहती है, तुमसे कुछ कहूं कब सुनोगे मेरी बात,कुछ तुम्हें बताना
लालसा पर कविता – पूनम दुबे Read More »
मोर महानदी के पानी मा – केवरा यदु चाँदी कस चमके चम चम जिंहा चंदा नाचे छम छम ।सोंढू पैरी के संगम भोले के ड़मरु ड़म ड़म ।मोर महानदी के पानी मा। महानदी के बीच में बइठे शिव भोला भगवान ।सरग ले देवता धामी आके करथें प्रभू गुणगान ।माता सीता बनाइस शिव भोले ला मनाइस
महानदी पर कविता – केवरा यदु Read More »
संतोषी महंत की नवगीत हंसकर जीवन-अथ लिख दें या रोकर अंजाम लिखें।जीवन की पीड़ाओं के औ कितने आयाम लिखें।। धाराओं ने सदा संभालातटबंधों ने रार किया।बचकर कांटों से निकले तोफूलों ने ही वार किया।।बंटवारा लिख दें किस्मत काया खुद का इल्जाम लिखें।।जीवन की पीड़ाओं के……. चौसर की छाती पर खुशियोंके जब-जब भी पांव परे।कृष्णा कहलाने
संतोषी महंत की नवगीत – संतोषी महंत Read More »
एकांत/हाइकु/निमाई प्रधान’क्षितिज’ [१]मेरा एकांत सहचर-सर्जक उर्वर प्रांत! [२]दूर दिनांततरु-तल-पसरा मृदु एकांत! [३]वो एकांतघ्न वातायन-भ्रमर न रहे शांत ! [४]दिव्य-उजासशतदल कमल एकांतवास ! [५]एकांत सखाजागृत कुंडलिनी प्रसृत विभा ! *-@निमाई प्रधान’क्षितिज’* रायगढ़,छत्तीसगढ़ मो.नं.7804048925
एकांत/हाइकु/निमाई प्रधान’क्षितिज’ Read More »