कविता बहार

सामाजिक विषमता पर कविता- पद्म मुख पंडा

समाज और यथार्थ

सामाजिक विषमता पर कविता- बही बयार कुछ ऐसी जूझ रहे जीने के खातिर,पल पल की आहट सुनकर,घोर यंत्रणा नित्य झेलते,मृत्यु देवता की धुन पर।सुख हो स्वप्न, हंसी पागलपन,और सड़क पर जिसका घर,किस हेतु वह भय पाले,जब मृत्यु बोध हो जीवन भर? जो कंगाल वही भिक्षुक हो,ऐसा नियम नहीं कोई,जो धनवान, वही दाता हो,होता नहीं, सही […]

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विश्व रंगमंच दिवस पर प्रियदर्शन की कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

World Theatre Day: विश्व रंगमंच दिवस हर साल 27 मार्च को मनाया जाता है. विश्व रंगमंच दिवस उत्सव एक ऐसा दिन है जो रंगमंच को समर्पित है. विश्व रंगमंच दिवस पर प्रियदर्शन की कविता कुर्सियां लग चुकी हैंप्रकाश व्यवस्था संपूर्ण हैमाइक हो चुके हैं टेस्टअब एक-एक फुसफुसाहट पहुंचती है प्रेक्षागृह के कोने-कोने में तैयार है

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कर्म पर हिंदी में कविता

हिंदी कविता

श्रृंगार छन्द में एक प्रयास सादर समीक्षार्थ कर्म पर हिंदी में कविता कर्म का सभी करेंआह्वान।कृष्ण का ये है गीता ज्ञान।कर्मबिन होतभाग्य से हीन।सृष्टि में होत वही है दीन।। कर्म जो करे सदा निष्काम।पाय वह शांति औरआराम।आत्म मेंही स्थित हो हरप्राण।ब्रह्म में पा लेता है त्राण।। सृष्टि में रहता जो आसक्त।भोग में लिप्त रहे हर

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शिव महाकाल पर कविता – बाबू लाल शर्मा

हिंदी कविता

हे नीलकंठ शिव महाकाल भक्ति गीत- हे नीलकंठ शिव महाकाल (१६,१४मात्रिक) हे नीलकंठ शिव महाकाल,भूतनाथ हे अविनाशी!हिमराजा के जामाता शिव,गौरा के मन हिय वासी! देवों के सरदार सदाशिव,राम सिया के हो प्यारे!करो जगत कल्याण महा प्रभु,संकट हरलो जग सारे!सागर मंथन से विष पीकर,बने देव हित विश्वासी!हे नीलकंठ शिव महाकाल,भूतनाथ हे अविनासी! भस्म रमाए शीश चंद्र

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व्यक्तित्व विशेष कविता संग्रह

महादेवी वर्मा पर कविता- बाबूलाल शर्मा

हिंदी कविता

प्रस्तुत कविता हिंदी साहित्य के विख्यात छायावादी कवयित्री महादेवी वर्मा पर लिखी गई है ।जिसके रचयिता बाबूलाल शर्मा जी हैं ।आपने दोहे छंद पर यह कविता लिखी है।

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गुलाब पुष्प पर कविता – हिमांशु शेखर

हिंदी कविता

प्रस्तुत कविता “गुलाब नहीं है पुष्प आज” 22 सितंबर राष्ट्रीय गुलाब दिवस पर लिखी गई है।

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mahatma gandhi

महात्मा गांधी पर कविता – ज्योति अग्रवाला

हिंदी कविता

प्रस्तुत कविता महात्मा गांधी :स्वतंत्रता और स्वच्छता के जन नायक को आधार में रखकर लिखी गई है

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तुम गुलाब मैं तेरी पंखुरी – उमा विश्वकर्मा

हिंदी कविता

तुम गुलाब मैं तेरी पंखुरी – उमा विश्वकर्मा तुम गुलाब, मैं तेरी पंखुरी तुम सुगंध, मैं हूँ सौन्दर्य |तुझमें है लालित्य समाया मुझमें रचा-बसा माधुर्य | सारा जग, तुमसे सुरभित हैतुमसे ही, लावण्य उदित है तुम ही देव चरण में शोभित जन-जन का मन, रहे प्रफुल्लित तुम पर ईश्वर, की अनुकम्पा मुझमें रंग भरा प्राचुर्य

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आ बैठे उस पगडण्डी पर – बाबू लाल शर्मा

हिंदी कविता

आ बैठे उस पगडण्डी पर – बाबू लाल शर्मा आ बैठे उस पगडण्डी पर,जिनसे जीवन शुरू हुआ था। बचपन गुरबत खेलकूद में,उसके बाद पढ़े जमकर थे।रोजगार पाकर हम मन में,तब फूले ,यौवन मधुकर थे।भार गृहस्थी ढोने लगते,जब से संगिनी साथ हुआ था।आ बैठे उस पगडण्डी परजिनसे जीवन शुरू हुआ था। रिश्तों की तरुणाई हारी,वेतन से

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