आँखो का नूर
हिंदी कविता‘अपने लाल के लिए माँ की जीवन के प्रति सीख।
बाल हृदय हर इंसान के दिल में बसता है। बाल हृदय उम्र का मोहताज नहीं होता। उसे हर उम्र में जिंदा रखना ही बाल दिवस है।
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नागार्जुन की १० लोकप्रिय रचनाएँ यहाँ पर आपके समक्ष पस्तुत हैं चंदू, मैंने सपना देखा / नागार्जुन चंदू, मैंने सपना देखा, उछल रहे तुम ज्यों हिरनौटाचंदू, मैंने सपना देखा, अमुआ से हूँ पटना लौटाचंदू, मैंने सपना देखा, तुम्हें खोजते बद्री बाबूचंदू,मैंने सपना देखा, खेल-कूद में हो बेकाबू मैंने सपना देखा देखा, कल परसों ही छूट
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यहाँ पर इंदौर की कवयित्री सुशी सक्सेना की कविताएं आपके समक्ष प्रस्तुत किये किये जा रहे हैं ये इश्क ये इश्क का ही तो असर है,कि नजर भी जुबां बन जाती है।आपकी तारीफ में कुछ कहूं,तो ग़ज़ल बन जाती है। ये इश्क की इंतहा, नहीं तो क्या है,कि जिस तरफ भी देखती हूं,आपकी सूरत नज़र
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बाल दिवस पर बेहतरीन बाल कवितायेँ राजकिशोर धिरही के द्वारा प्रस्तुत किये जा रहे हैं जो आपको बेहद पसंद आयेगी.
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चारु चंद्र की चंचल किरणें / मैथिलीशरण गुप्त चारुचंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं हैं जल थल में,स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अम्बरतल में।पुलक प्रकट करती है धरती, हरित तृणों की नोकों से,मानों झीम[1] रहे हैं तरु भी, मन्द पवन के झोंकों से॥ पंचवटी की छाया में है, सुन्दर पर्ण-कुटीर बना,जिसके सम्मुख स्वच्छ शिला
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परिवर्तन / सुमित्रानंदन पंत (१)अहे निष्ठुर परिवर्तन!तुम्हारा ही तांडव नर्तनविश्व का करुण विवर्तन!तुम्हारा ही नयनोन्मीलन,निखिल उत्थान, पतन!अहे वासुकि सहस्र फन!लक्ष्य अलक्षित चरण तुम्हारे चिन्ह निरंतरछोड़ रहे हैं जग के विक्षत वक्षस्थल पर !शत-शत फेनोच्छ्वासित,स्फीत फुतकार भयंकरघुमा रहे हैं घनाकार जगती का अंबर !मृत्यु तुम्हारा गरल दंत, कंचुक कल्पान्तर ,अखिल विश्व की विवरवक्र कुंडलदिग्मंडल ! (२)आज कहां वह पूर्ण-पुरातन,
सुमित्रानंदन पंत की १० सर्वश्रेष्ठ कवितायेँ Read More »
दीप से दीप जले / माखनलाल चतुर्वेदी सुलग-सुलग री जोत दीप से दीप मिलेंकर-कंकण बज उठे, भूमि पर प्राण फलें। लक्ष्मी खेतों फली अटल वीराने मेंलक्ष्मी बँट-बँट बढ़ती आने-जाने मेंलक्ष्मी का आगमन अँधेरी रातों मेंलक्ष्मी श्रम के साथ घात-प्रतिघातों मेंलक्ष्मी सर्जन हुआकमल के फूलों मेंलक्ष्मी-पूजन सजे नवीन दुकूलों में।। गिरि, वन, नद-सागर, भू-नर्तन तेरा नित्य
माखनलाल चतुर्वेदी की १० सर्वश्रेष्ठ कवितायेँ Read More »
एक बेटी की करूणा जो अपने जन्म पर अपराधी सा महसूस करती अपनी मां को धैर्य बंधाती है
विश्व करुणा दिवस पर विशेष शायरी Read More »
हमारी पाठशाला लोकेश कुमार भोई, सहायक शिक्षक, प्राथमिक शाला छिर्राबाहरा की पहली रचना है जिसे उन्होंने अपने स्कूल को समर्पित किया है.
हम सब की है पाठशाला Read More »
प्रस्तुत हिंदी कविता का शीर्षक “बाल भिक्षुक” है जोकि आशीष कुमार मोहनिया, कैमुर, बिहार की रचना है. इसे वर्तमान समाज में दीन हीन अनाथ बच्चों की दयनीय स्थिति को ध्यान में रखकर लिखा गया है जिनका जीवन बसर आज भी मंदिर की सीढ़ियों पर या फिर हाट बाजार में भीख मांग कर होता है.
बाल भिक्षुक -आशीष कुमार Read More »
जीवन में आशावादी होना ही जीवन का परिचायक है ।
सूखा पर हरा-भरा दरख्त Read More »