बूढी दिल्ली पर कविता
हिंदी कवितादिल्ली देश की राजधानी है जहा राजनितिक हलचल का केंद्र रही है है एक कटाक्ष है दिल्ली के ऊपर / दिल्ली ने हमें क्या दिया और दिल्ली के दिल में क्या है /
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दिल्ली देश की राजधानी है जहा राजनितिक हलचल का केंद्र रही है है एक कटाक्ष है दिल्ली के ऊपर / दिल्ली ने हमें क्या दिया और दिल्ली के दिल में क्या है /
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हिंदी काव्य में नवीन विधि और प्रयोग के रूप में सृजित स्वरचित प्रेरणादायक अमात्रिक काव्य रचना –एक कदम चल…
एक कदम चल -डी कुमार अजस्र(अमात्रिक काव्य) Read More »
इस ग़ज़ल के माध्यम से संसार की भंगुरता और अस्थिरता की बात की जा रही है।अपने कर्तव्ययों का निष्ठापूर्वक निर्वहण करके गीता के आप्त वचनों को अंगीकार करने एवं सवेदनशील रहने की बात की गई है।
क्या भला रह जायेगा Read More »
यह मेरी मौलिक जागरण कविता है,जो उपेन्द्रवज्रा छंद में है।जब कभी मन जीवन के उद्देश्य से भटककर नैराश्य और अंधकार की ओर प्रवृत होने लगता है,तब यह कविता नई ऊर्जा और नया उद्देश्य देती है।
उठो जगो बंधु-जागरण कविता Read More »
समाज में रहने वाले राक्षस का दहन करें
राक्षस दहन पर कविता Read More »
सुई- धागा द्वारा संदेश- जीवन में साथ का महत्व
सुई धागा -माला पहल Read More »
प्रस्तुत हिंदी कविता का शीर्षक “मुक्ति संघर्ष है” जोकि ‘आशीष कुमार’ मोहनिया, कैमूर, बिहार की रचना है. इसे स्वतंत्रता को आधार मानकर रचा गया है
मुक्ति संघर्ष-आशीष कुमार (कविता) Read More »
नारी का महत्व का वर्णन कविता के माध्यम से किया गया है।
नारी का सम्मान – अकिल खान Read More »
प्रस्तुत संध्या-वन्दन राजेश पाण्डेय वत्स छत्तीसगढ़ द्वारा रचित है. शुभ संध्या नभ तले (संध्या-वन्दन) दिन रात संधिकाल, शुभ लग्न संध्या हाल,तारागण झाँक पड़े,पल सुखदाई में! नीड़ दिशा उड़ी दल,विहगों की कोलाहल,तिमिर को न्यौता मिला,सुर शहनाई में! लाडली सुन्दरी शाम, पल भर मेहमान,विमल आकाश खेली,मृदु शीतलाई में! शुभ संध्या नभ तले,पग घर ओर चलेवत्स वही फिर
शुभ संध्या नभ तले (संध्या-वन्दन) Read More »
यह नवदेवियों पर आधारित हिंदी कविता है जो कि डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी द्वारा रचित है.
नवदेवियों पर हिंदी कविता -डॉ. चंद्रेश कुमार छतलानी Read More »