हिंदी कविता

उनसे मेरा प्यार महादेव की निशानी है

हिंदी कविता

जब नायक नायिका से बेइन्तहां सच्ची मोहब्बत करता है उनसे मिलने का वक्त आता है तो नायिका के तरफ से कुछ विरोधी खड़े हुए तब अन्त मे नायक इस कविता के द्वारा उनके सामने खुले रुप मे आगाज करता है –

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गुलाब नहीं है पुष्प आज

हिंदी कविता

कविता बहार के मंच पर प्रसारित प्रतियोगिता में प्रतिभागिता हेतु “गुलाब” विषय पर कविताएं आमंत्रित थीं। मैं अपनी कविता इस संदर्भ में अग्रसारित कर रहा हूं। इसका शीर्षक है -“गुलाब नहीं है पुष्प आज”। इसमें गुलाब के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन है – ये प्रेम का प्रतीक है, मेहनत का प्रतीक है, दोस्ती का प्रतीक है, कोमलता का प्रतीक है….। इन सब की ओर इशारा करती मेरी कविता निर्धारित तिथि 23 सितंबर 2021 से पूर्व प्रेषित है। आशा है संज्ञान लिया जाएगा। धन्यवाद।

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नारियल पर कविता

हिंदी कविता

नारियल एक बहुवर्षी एवं एकबीजपत्री पौधा है। इसका तना लम्बा तथा शाखा रहित होता है। मुख्य तने के ऊपरी सिरे पर लम्बी पत्तियों का मुकुट होता है। ये वृक्ष समुद्र के किनारे या नमकीन जगह पर पाये जाते हैं। इसके फल हिन्दु | हिन्दुओं के धार्मिक अनुष्ठानों में प्रयुक्त होता है। बांग्ला में इसे नारिकेल

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mera bharat mahan

मेरा भारत देश महान (16-15 मापनी नवगीत)

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

मेरा भारत देश महान (16-15 मापनी नवगीत) पाटी पर खड़िया से लिख दूँमेरा भारत देश महान।पढ़ लिख कर मैं कवि बन गाऊँभारत माता के गुणगान।। बाबा चिन्ता मत कर मेरीलौटेंगे बीते दिन रीतदिनकर बनकर गीत लिखूँगाछंद लिखूँगा माँ की प्रीत गाएँगे सब शाम सवेरेऐसी लिखूँ तिरंगा तान।पाटी……………….,..।। पोथी कलम दिलाना मुझकोकुछ ही दिन बस सहने

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मन पर कविता

हिंदी कविता

मन पर कविता (१६,१६) मानव तन में मन होता है,जागृत मन चेतन होता है,अर्द्धचेतना मन सपनों मे,शेष बचे अवचेतन जाने,मन की गति मन ही पहचाने। मन के भिन्न भिन्न भागों में,इड़, ईगो अरु सुपर इगो में।मन मस्तिष्क प्रकार्य होता,मन ही भटके मन की माने,मन की गति मन ही पहचाने। मन करता मन की ही बातें,जागत

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बाल भिक्षु पर कविता

समाज और यथार्थ

दर्द न जाने कोय….. बाल भिक्षु पर कविता(विधाता छंद मुक्तक) झुकी पलकें निहारें ये,रुपैये को प्रदाता को।जुबानें बन्द दोनो की,करें यों याद माता को। अनाथों ने, भिखारी नें,तुम्हारा क्या बिगाड़ा है,दया आती नहीं देखो,निठुर देवों विधाता को। बना लाचार जीवन को,अकेला छोड़ कर इनको।गये माँ बाप जाने क्यों,गरीबी खा गई जिनको। सुने अब कौन जो

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आओ खेल खेलें- दीपा कुशवाहा

हिंदी कविता

“आओ खेल खेलें” एक कदम बढ़ाओ जोश दिखाओछुपे अपने प्रतिभाओं को होश में लाओजिम्मेदारियों की चादर में ढक गईअपनी खेल जिज्ञासा को जगाओमजबूती की ढाल पकड़कर तुमनई उम्मीदों को सजाओभूले बिसरे दोस्तों को बुलाओजिंदगी में थोड़ा आनंद लाओपरिवार के साथ मिलकर भीचलो थोड़ा खेल को सजाओंविलय होते बीमारियों से अनमोल जीवन को बचाओबचपन को याद

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आओ खेलें खेल- वर्तिका दुबे

मन और भावनाएँ

आओ खेलें खेल- वर्तिका दुबे आओ खेले खेल भइया आओ खेले खेल। खेल खेल में हो जाता है संस्कृतियों का मेल। खेल में होता दिमाग चुस्त शरीर स्वस्थ निरोगी। जीवन में आए संयम अनुशासन मन बन जाए योगी। आओ खेलें खेल – – – – – – – – अपनी दिनचर्या में हम खेलों को

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