कुछ ले दे के साब ( व्यंग्य ) – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
नारी जीवन और संवेदनाइस व्यंग्य को केवल व्यंग्य की दृष्टि से ही पढ़े यह केवल मनोरंजन के लिए है | जो भी सन्दर्भ इसमें दिए गए हैं वे केवल कल्पना मात्र हैं जिसका सच से कोई सम्बन्ध नहीं है |
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