हिंदी कविता

हिंदी मेरी भाषा -रूपेश कुमार

हिंदी कविता

हिन्‍दी दिवस 14 सितम्बर को  देशभर में मनाया जाता है। 1949 में आज ही के दिन संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिन्‍दी को देश की राजभाषा के रूप में स्‍वीकार किया था। हिन्‍दी विश्‍व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में एक है और 52 करोड से अधिक लोगों की पहली भाषा है।

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दर्द पर दोहे- मदन सिंह शेखावत ढोढसर

विरह और दर्द, हिंदी कविता

दर्द पर दोहे दर्द किसी को दे नही ,हे  जग  के करतार।दर्द देखा जाय नही ,किससे करू पुकार ।।1 दीन दुखी सब खुश हो, पीड़ा किसे न आय।सब जनता खुश हाल हो, विपदा नही सताय।।2 होती  मन  मे  वेदना,दर्द  दुखी  कर  जाय ।विपदा आफत टाल कर,सब की करे सहाय ।।3 दर्द  किसी  को  दे नही,लौटे 

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हाइकु

हाइकु- द्वितीय शतक

हिंदी कविता

हाइकु- द्वितीय शतक १.सत्ता का पेड़काग बनाए नीड़कोयल चूजे२.फाल्गुन संध्याबूँटे लिए बालिकाजमी चौपाल३.नदी का घाटस्नान भीड़ में वृद्धपोटली भय४.जल की प्याऊसिर पर पोटलीप्यासी बुढ़िया५.विवाहोत्सवचौपाल में मध्यस्थसिर पे बागा६.नीम की छाँवबुढ़िया चारपाईपड़े बताशे७शहरी पथनग्न है फुटपाथवस्त्रों में श्वान८.चाँदनी रातबाराती की आतिशछान में आग९.छान का घररखे बया ने अण्डेगिलहरियाँ१०.अभयारण्यछटपटाए मृगबाघ की मूर्ति११.बसंत मेघढोल बजाए ओलाटीन छप्पर१२.गृह वाटिकापेड़

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हाइकु

हाइकु प्रथम शतक

नारी जीवन और संवेदना

हाइकु शतक १.खेत में डेराहाथ में मोटी रोटीदूध की डोली२तेल बिनौरीसिर पर छबड़ीगीत गुंजन३होली के रंगचौपाल पर ताशचंग पे भंग४.नीम का पेड़वानर अठखेलीदंत निंबोली५सम्राट यंत्रधूप घड़ी देखताविद्यार्थी दल६संग्रहालयकांँच बाँक्स में ‘ममी’उत्सुक छात्रा७गुलाब बागपैंथर पिँजरे मेंकूदे वानर८मोती मंगरीतोप पे लेते सेल्फीसैलानी बाला९विजय स्तंभसैलानी लेते फोटोपद्मिनी ताल१०.पुष्कर मेलाबैलगाड़ी में बैठेविदेशी बाला११आना सागरकीकर छाँव बैठारेत पे मृग१२सिंधु का

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गणेश वंदना

हिंदी कविता

गणपति को विघ्ननाशक, बुद्धिदाता माना जाता है। कोई भी कार्य ठीक ढंग से सम्पन्न करने के लिए उसके प्रारम्भ में गणपति का पूजन किया जाता है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन “गणेश चतुर्थी” के नाम से जाना जाता हैं। इसे “विनायक चतुर्थी” भी कहते हैं । महाराष्ट्र में यह उत्सव सर्वाधिक

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होड़ लगी है विश्व में करें इकट्ठा शस्त्र

हिंदी कविता

होड़ लगी है विश्व में करें इकट्ठा शस्त्र होड़ लगी है विश्व में, करें इकट्ठा शस्त्र।राजनीतिक होने लगी,खुले आम निर्वस्त्र।। सीमाएँ जब लाँघता,है सत्ता का लोभ।जन-मन को आक्रांत कर,पैदा करता क्षोभ।। सत्ताधारी विश्व के, पैदा करें विवाद ।शांति हेतु अनिवार्य है,जनता से संवाद।। सृजनात्मक सहयोग से,बंद करें कटु युद्ध ।धरती पुत्रों अब उठो,सम्हलो स्वार्थ विरुद्ध।।

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दादा जी पर कविता

हिंदी कविता

दादा जी पर कविता दादा जी के संग में , इस जीवन के ज्ञान ।मेरे सच्चे मित्र सम ,जाते हैं मैदान ।।जाते हैं मैदान ,खेल वो मुझे सिखाते ।प्रेरक गहरी बात , कहानी रोज सुनाते ।।कह ननकी कवि तुच्छ , बताते है मर्यादा ।सबसे ज्यादा वक्त , दिया करते हैं दादा ।। दादा बनकर घूमता

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धन्य वही धन जो करे आत्म-जगत् कल्याण

हिंदी कविता

धन्य वही धन जो करे आत्म-जगत् कल्याण धन्य वही धन जो करे, आत्म-जगत् कल्याण।करे कामना धर्म की,मिले मधुर निर्वाण। संग्रह केवल वस्तु का,विग्रह से अनुबंध।सुविचारों की संपदा,से संभव संबंध।। धन-दौलत के साथ ही,बढ़ता क्यों अपराध।कठिन दंड भी शांति को,कहाँ सका है साध।। शिक्षा,जब माना गया,केवल भौतिक ज्ञान।मानव-मूल्यों के बिना,दुखद भ्राँत उत्थान।। निधन हुआ धन से

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तिजा उपास (हास्य कविता)

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

तिजा उपास (हास्य कविता) तिजा उपास रहे बर, काल करू भात खाय हे ।बिहना ले दरपन ला संगवारी बनाय हे।। 1 क‌ई किसीम रोटी पीठा झटपट बनात हे ।उठ उठ के आत हे, लस ले सुत जात हे।। 2 ल‌इका मन रोटी के,सुगंध ला पात हे ।सुंग सुंग ल‌इका मन चुलहा तीर जात हे।। 3

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तोड़े हुए रंग-बिरंगे फूल :नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

नारी जीवन और संवेदना

तोड़े हुए रंग-बिरंगे फूल टीप-टीप बरसता पानीछतरी ओढ़ेसुबह-सुबह चहलकदमी करतेघर से दूर सड़कों तक जा निकलादेखा–सड़क के किनारेलगे हैं फूलदार पौधे कईपौधों पर निकली हैं कलियाँ कईमग़र कहीं भीदूर-दूर तक पौधों परखिले हुए फूल एक भी नहींसहसा नजरें गईनहाए न धोएफूल चुन रहे पौधों सेमहिला-पुरुष कई-कईवही जो कहलाते आस्तिक जनरखे हुए हैं झिल्ली मेंतोड़े हुए

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