झुक नहीं सकते / अटल बिहारी वाजपेयी
हिंदी कविताझुक नहीं सकते / अटल बिहारी वाजपेयी टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते सत्य का संघर्ष सत्ता सेन्याय लड़ता निरंकुशता सेअंधेरे ने दी चुनौती हैकिरण अंतिम अस्त होती है दीप निष्ठा का लिये निष्कंपवज्र टूटे या उठे भूकंपयह बराबर का नहीं है युद्धहम निहत्थे, शत्रु है सन्नद्धहर तरह के शस्त्र से है सज्जऔर
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