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बेटी पर कविता / लक्ष्मीकान्त ‘रुद्रायुष’

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बेटी पर कविता / लक्ष्मीकान्त ‘रुद्रायुष’ सुख औ समृद्धि कारी,होती फिर भी बेचारी,क्यों ना जग को ये प्यारी,बेटी अभिमान है।माता का दुलार बेटी,पिता का है प्यार बेटी,खुशी का संसार बेटी,सबका सम्मान है।सूना घर महकाती,चिड़िया सी च-चहाती,“कांत” मन बहलाती,बेटी स्वभिमान है।प्यारा उपहार कोई,बेटी जैसा नही कोई,रिश्ते सब निभाये वोही,बेटी पहचान है ” कुण्डलियाँ “ बेटी स्वाभिमान […]

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हिन्दी कविता: रायपुर सेंट्रल जेल में-नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

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रायपुर सेंट्रल जेल में-नरेन्द्र कुमार कुलमित्र रायपुर में पढ़ता था मैंपंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालयथा दर्शनशास्त्र का विद्यार्थीजन्मभूमि सा प्यारा था आज़ाद छात्रावास गाँव वालों की नज़रों मेंथा बड़ा पढन्तामेरे बारे में कहते थे वे–“रइपुर में पढ़ता है पटाइल का नाती।” मेरे गाँव के पास का एक गाँवजहाँ रहती थी मेरी फुफेरी दीदीफुफेरा जीजा था जो

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हिन्दी कविता: कारगिल विजय दिवस की गाथा

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कारगिल विजय दिवस की गाथा;-
*सुन्दर लाल डडसेना”मधुर”*
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.) 493558

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हिन्दी कविता : जार्ज फ्लॉयड पर कविता- नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

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जार्ज फ्लॉयड पर कविता- जार्ज फ्लॉयड तुम आदमी थेतुम आदमी ही रहेपर तुम्हें पता नहींकि शैतानी नज़रों मेंआदमी होना कुबूल नहीं होताआख़िर तुम मारे गए काश तुम जान गए होतेकि तुम्हारा जिंदा रहने के लिएतुम्हारा आदमी होना ज़रूरी नहीं थाजितना जरूरी थातुम्हारी चमड़ी का गोरा रंग जार्ज फ्लॉयडकाश की तुम्हेंगिरगिट की तरहअपनी चमड़ी का रंग

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सूर घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

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घनाक्षरी छंद विधान:सूर घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ सूर घनाक्षरी विधान ३० वर्ण(८८८६) प्रतिचरण चार चरण समतुकांत चरणांत की कोई शर्त नहीं है। सूर घनाक्षरी विधान का उदाहरण . __जल रक्षण__ मनुज भूल नादानी,आज समय की मानी,बचत वर्षा का पानीसोचो कुण्ड बने। नही बहा ये अमृतबचा नीर से प्राकृत,धरा हेतु है सुकृतटांके कुण्ड बने। ताल तलैया बापीगहराई

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देव घनाक्षरी विधान -बाबूलाल शर्मा ‘विज्ञ’

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देव घनाक्षरी विधान -बाबूलाल शर्मा ‘विज्ञ’ देव घनाक्षरी विधान ३३वर्ण (८८८९) प्रतिचरण चार चरण समतुकांत चरणांत नगण१११(पुनरावृत्ति) (जैसे कदम कदम) देव घनाक्षरी विधान का उदाहरण __कदम-कदम__ लड़ें सीमा पर हम,पातकी जाएगा थम,कारवाँ चले बढ़ेगा,चलना कदम-कदम। पाक पड़ौसी बे दम,सुधारो उसको तुम,करना नहीं रहम,वह तो छदम छदम। चीन भाई धोखे सम,फैलता है काला तम,भारती माता पावन,झूठ

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हरिहरण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

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घनाक्षरी छंद विधान: हरिहरण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ हरिहरण घनाक्षरी विधान ३२ वर्ण( ८८८८) प्रतिचरण चार चरण समतुकांत आंतरिक समान्तता अपेक्षित चरणांत लघु लघु ११ हरिहरण घनाक्षरी का उदाहरण . __परिवर्तन__ हे श्याम वर्ण के घननर्मद सा हो ये मन,पत्थर शिव जीवनवसुधा पर सावन। सागर जैसा हो धनविहगों जैसा जीवन,यमुना सी बंशी धुनगंगा सा जल पावन।

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विजया घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

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घनाक्षरी छंद विधान: विजया घनाक्षरी -बाबूलाल शर्मा ‘विज्ञ’ विजया घनाक्षरी विधान ३२ वर्ण (८८८८) प्रतिचरण चार चरण समतुकांत आंतरिक समान्तता हो चरणांत नगण १११ विजया घनाक्षरी विधान का उदाहरण तिरंगा चाह कफन भारत माता वंदनमाटी सादर चंदन,मानस अभिनंदनचरणों में है नमन। जन गण का गायनहर दिन हो सावन,कण कण है पावनरहे आजाद वतन। सुन्दर सुन्दर

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कृपाण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

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घनाक्षरी छंद विधान: कृपाण घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ कृपाण घनाक्षरी विधान ३२ वर्ण(८८८८) प्रतिचरण चार चरण समतुकांत ८,८,८,८ पर यति हो, एवं चारो यति समतुकांत अनिवार्य चरणांत गुरु लघु २१ (गाल) कृपाण घनाक्षरी विधान का उदाहरण वर्षा नीर माने जाने भू की पीर,साथी सारे हैं जो धीर,गायें पौधे कागा कीर,रक्षे भैया वर्षा नीर। ले कुदाली आओ

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डमरू घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

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घनाक्षरी छंद विधान: डमरू घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’ डमरू घनाक्षरी विधान ३२ वर्ण(८८८८) प्रतिचरण १६,१६,वर्ण पर यति चार चरण समतुकांत समस्त वर्ण मात्रा विहीन हो डमरू घनाक्षरी विधान का उदाहरण हँसत नट चल पथ पनघटखटकत जल घट,धर पद नटखटभग पटकत घट। भय भगदड़ तबघर पथ लग जब,कहत रहत अबअभय हँसत नट। वन पथ तक करछछ घट

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मदन घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ’

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घनाक्षरी छंद विधान: मदन घनाक्षरी -बाबूलालशर्मा ‘विज्ञ मदन घनाक्षरी विधान ३२ वर्ण (८८८८) प्रतिचरण १६,१६ वर्ण पर यति चार चरण समतुकांत चलणांत २२ गुरु गुरु मदन घनाक्षरी विधान का उदाहरण __नीर जरूर बचाएँ__ वर्षा का नीर सहेजेंसंदेश सभी को भेजें,पुनर्भरण कर लोव्यर्थ न नीर बहाएँ। पेड़ लगाओ सब हीमेड़ बनाओ तब ही,खेत खेत जल कुंडेघर

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