हिंदी कविता

नीम-हकीम खतरा-ए-जान

हिंदी कविता

नीम-हकीम खतरा-ए-जान आए बिल्ली जबबंद कर लेते हैं आँखेंसभी कबूतरताकि टल जाए संकटआँखें बंद नहींलाइट बंद करने केआदेश हैं साहब केलेकिन साहबहम कबूतर नहींऔर वो भी बिल्ली नहीं नीम-हकीम खतरा-ए-जानपुख्ता इंतजाम कीजिएइसे गंभीरता से लीजिएटौने-टोटके हमबाद में कर लेंगेफिलहाल तोकोई रणनीति बनाइएसंकट से उबरने की –विनोद सिल्ला©

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मन का तामस पर कविता

हिंदी कविता

मन का तामस पर कविता हो तमस का घोर अंधेरा,तो तुम यूँ घबराना ना।गर पग डगमगाए तुम्हारे,तो मिलकर साथ निभाना।हाथ उठाकर प्रण करो तुम,मिलकर बोझ उठाना ना।गर अंतरतम में छाए अंधेरा,विश्वास का दीप जलाना ना।गर गली का दीप बुझा हो,अपने घर का दीप बुझाना ना।गर चुनौती कठिन लगे तो,विपदा को पीठ दिखाना ना।चित चंचल चितवन

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वर्दी के सम्मान पर कविता

मन और भावनाएँ

वर्दी के सम्मान पर कविता १बलिदानी पोशाक है, सैन्य पुलिस परिधान।खाकी वर्दी मातृ भू, नमन शहादत मान।।२खाकी वर्दी गर्व से, रखना स्व अभिमान।रक्षण गुरुतर भार है, तुमसे देश महान।।३सत्ता शासन स्थिर नहीं, स्थिर सैनिक शान।देश विकासी स्तंभ है, सेना पुलिस समान।।४देश धरा अरु धर्म हित, मरते वीर सपूत।मातृभूमि मर्याद पर , आजादी के दूत।।५आदि काल

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लोग क्या कहेंगे पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

लोग क्या कहेंगे पर कविता वो नहीं समझ सकतेआजादी का महत्वजो आजाद हैं आजादी का महत्वजानता है बंधुआ मजदूरजिसे जबरनरखा जाता है काम पर या पूछिए अछूतों सेजिन्हें नहीं मिलीआज तलक आजादीजिन्हें धर्मग्रंथआज भी करते हैं प्रताड़ित या फिरबता सकती हैं महिलाएंलगाए गये हैं जिन परकितने अंकुशकहा जाता है बात-बात परलोग क्या कहेंगे? -विनोद सिल्ला©

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माँ सिद्धिदात्री पर कविता

हिंदी कविता

माँ सिद्धिदात्री पर कविता माता दुःखनिवारिणी ,सभी सुखों की धाम।सिद्धिदात्री रूप नवम,छविअम्बाअभिराम।।छवि अम्बा अभिराम, करो मात आराधना।करती भव से पार ,शक्ति की करो साधना।।कहता कवि करजोरि, छूटता दुख से नाता।करता है जो भक्ति , मुक्ति देती है माता।।????करता है जो मात की, जप तप पूजा ध्यान।करती देवी भक्त के , कष्टों का अवसान।।कष्टों का अवसान

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लड़कीयों की दशा पर कविता

हिंदी कविता

लड़कीयों की दशा पर कविता एक लड़की कोदेखा हूँतीन वर्ष की थी वहमाँ की स्तन की दूधकुछ दिन पहले ही छोड़ी थीनाक बह रही थी उसकीचौबीसों घंटे कीदिन मेंवह बहुत सारीरूप धारण करती थीवह खाना पकाईटूटे माटी की हांड़ी मेंपत्थर की चूल्हे परलकड़ी की जलावन सेसब्जी भाजी बनाईलहसुन की छौंक भी लगाईबहुत स्वादिष्टमुँह में पानी

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नारी चेतना पर कविता

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

नारी चेतना पर कविता ऐ! नारीतू करती है अराधनाउन अराध्यों कीजो हैं तेरे दोषीकिया शोषण सदैवजिन्होंने तेरा समझा तुझेश्रंगार-रस कीविषय-वस्तुनहीं दिया हकसमानता काकिया सदैव भेदभाव गवाह हैं इस सबकेअनेक धर्म-ग्रंथजो चीख-चीख करकरते हैं ब्यानतेरे शोषण की कहानी -विनोद सिल्ला©

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जल संरक्षण पर कविता

हिंदी कविता

जल संरक्षण पर कविता आओ जल की तलाश करें,जीवों के लिए खास करें ।इसकी महत्ता को पहचानें,जल बचाने की बात करें । आओ नल टोटी को बंद करें,जरूरत तक ही उपयोग करें।जल संरक्षण के बारे में,मिलकर यह संवाद करें। आओ मानव कर्म करें,फल की चिंता न करें ।अपना कर्तव्य चलो निभाएं,जल संरक्षण पर अभियान चलाएं।~~~~~~~~~~~~~~~~~रचनाकार

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कोरोना की मार पर कविता

हिंदी कविता

कोरोना की मार पर कविता गाँव गली सुनसान पड़े हैं।शहर भी तो वीरान पड़े हैं।कोरोना का कहर,आदमी को नाच नचा रहा।हाहाकार मची है दुनिया में,इटली,फ्रांस,ईरान बता रहा।हमारी स्थिति भी कहीं कभी,इटली ईरान सी न हो जाये।पूरी दुनिया हाँ पूरी दुनिया को,ये एकमात्र डर सता रहा।उनकी तुलना में हम भारतकहीं नहीं टिकते हैं।तो अपने लिए हाँ

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नाम पर कविता

हिंदी कविता

नाम पर कविता अक़्सर मुझेमेरे कानों मेंसुनाई दे जाती हैमेरे नाम से पुकारती हुईमेरी दिवंगत माँ की आवाज़और घर के दूसरे कमरे में सो रहेबाबूजी की पुकार माँ की पुकार सुनमहज़ अपना वहम समझकरमौन संतुष्ट हो जाता हूँ पर जब जब बाबूजी केपुकारने की आवाज़ आती हैमेरे कानों में,हड़बड़ाकर चला जाता हूँउनके कमरे मेंऔर पूछता

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महागौरी पर कविता (कुंडलियाँ)

हिंदी कविता

महागौरी पर कविता : हिन्दुओं के शक्ति साम्प्रदाय में भगवती दुर्गा को ही दुनिया की पराशक्ति और सर्वोच्च देवता माना जाता है (शाक्त साम्प्रदाय ईश्वर को देवी के रूप में मानता है)। वेदों में तो दुर्गा का व्यापाक उल्लेख है, किन्तु उपनिषद में देवी “उमा हैमवती” (उमा, हिमालय की पुत्री) का वर्णन है। माँ दुर्गा

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पढ़ा-लिखा मूर्ख पर कविता

हिंदी कविता

पढ़ा-लिखा मूर्ख पर कविता मोहम्मद तुगलकतू हर बाररात के अंधेरे मेंकरता है जारीतुगलकी फरमानजो लागू होते हैंरात के अंधेरे में हीतू उजालों से डरता तो नहींअपने फरमान सुनाने से पूर्वकर लिया कर कुछ विचार विगत में भीजारी किए फरमानगलत नहीं थेसोने की जगहतांबे की मुद्रा चलानाउचित निर्णय थाराजधानी बदलना भीउचित निर्णय थाउपयुक्त तैयारी का अभावरहा

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