हिंदी कविता

चित्र मित्र इत्र विचित्र पर कविता

हिंदी कविता

चित्र मित्र इत्र विचित्र पर कविता चित्र रचित कपि देखकर,डरती सिय सुकुमारि।अगम पंथ वनवास में, रहती जनक दुलारि।। मित्र मिले यदि कर्ण सा, सखा कृष्ण सा साथ।विजित सकल संसार भव, बने त्रलोकी नाथ।। गन्धी चतुर सुजान नर, बेच रहे नित इत्र।सूँघ परख कर ले रहे, ग्राहक बड़े विचित्र।। मित्र इत्र सम मानिये, यश सुगंध प्रतिमान।भव […]

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शिक्षा पर कविता

समाज और यथार्थ

शिक्षा पर कविता शिक्षा का अधिकार सभी कोसभी शिक्षित कीजिये।कहते है महादान इसकोदान सबको दीजिए।।1।। शिक्षा का ये क्षेत्र असीमितअनुसंधान कीजिये।अधुनातन नवतकनीकों सेजनकल्याण कीजिये।।2।। शिक्षा से कोई भी वंचितरहे ना संसार मे।शिक्षा की सब अलख जगाएंहर एक परिवार में।।3।।???शिक्षा जीवन का मूल मंत्रसबको सुलभ कराएं।मेहनतकश और शोषित भीसब जन शिक्षा पाएं।।4।। बुनियादी शिक्षा को घर

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सार छंद विधान – बाबूलालशर्मा

हिंदी कविता

सार छंद विधान ऋतु बसंत लाई पछुआई, बीत रही शीतलता।पतझड़ आए कुहुके,कोयल,विरहा मानस जलता। नव कोंपल नवकली खिली है,भृंगों का आकर्षण।तितली मधु मक्खी रस चूषक,करते पुष्प समर्पण। बिना देह के कामदेव जग, रति को ढूँढ रहा है।रति खोजे निर्मलमनपति को,मन व्यापार बहा है। वृक्ष बौर से लदे चाहते, लिपट लता तरुणाई।चाह लता की लिपटे तरु

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हिमालय पर कविता

हिंदी कविता

हिमालय पर कविता नेपाल, चीन सीमा पर स्थित,हिमालय पर्वत की चोटी।गंगा यही से निकलती है,पत्थरों के साथ बहती है।हिमालय को पर्वत राज,नाम से जाना जाता है।पर्वतों का राजा माउंट एवरेस्ट,सबसे ज्यादा ऊंची चोटी है।हिमालय पर्वत की ऊंची चोटी,मीटर मे है 8,848।62 साल पहले भारतीय सर्वे मे,नापा गया 29028 फीट।आंख हिमालय पर्वत से है,आंसू की कोई

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ओजोन परत

पर्यावरण संरक्षण पर कविता

हिंदी कविता

पर्यावरण संरक्षण पर कविता दूषित हुई हवावतन कीकट गए पेड़सद्भाव केबह गई नैतिकतामृदा अपर्दन मेंहो गईं खोखली जड़ेंइंसानियत कीघट रही समानताओजोन परत की तरहदिलों की सरिताहो गई दूषितमिल गया इसमेंस्वार्थपरता का दूषित जलसांप्रदायिक दुर्गंध नेविषैली कर दी हवाआज पर्यावरणसंरक्षण कीसख्त जरूरत है -विनोद सिल्ला©

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बिखराव पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

बिखराव पर कविता नफरतों नेबढ़ा दी दूरियांइंसान-इंसान के बीच बांट दिया इंसानकितने टुकड़ों मेंस्त्री-पुरुषअगड़ा-पिझड़ाअमीर-गरीबनौकर-मालिकछूत-अछूतश्वेत-अश्वेतस्वर्ण-अवर्णधर्म-मजहब मेंखंड-खंड हो गया इंसाननित बढ़ता हीजा रहा है बिखराव -विनोद सिल्ला©

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किसान खेत जोतते हुए

किसान की दशा पर कविता

हिंदी कविता

किसान की दशा पर कविता देख तोर किसान के हालका होगे भगवान !कि मुड़ धर रोवए किसान,ये का दुख दे भगवान !! पर के जिनगी बड़ सवारें,अपन नई थोरको फिकर जी !बजर दुख उठाये तन म,लोहा बरोबर जिगर जी !!पंगपंगावत बेरा उठ जाथे ,तभे होथे सोनहा बिहान !कि मुड़ धर रोवए किसान !! झुमत -गावत

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हनुमत वंदना

हिंदी कविता

हनुमत वंदना राम नाम जाप कर, चित्त निज साफ कर,पवनसुत ध्यान धर,प्रभु को पुकारिये।भेद भाव भूल कर, क्रोध अहं नाश कर,बजरंगी शरण जा, जीवन सुधारिये।।राम भक्त हनुमान, करें नित्य गुणगानमंगल को पूज कर, जीवन सँवारिये।लाल देह सर्व प्रिय,सियाराम बसें हियलडुअन के भोग हों, आरती उतारिये। प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, 25 फरवरी 2020

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संस्कारों पर कविता

समाज और यथार्थ

संस्कारों पर कविता बीज रोप दे बंजर में कुछ,यूँ कोई होंश नहीं खोता।जन्म जात बातें जन सीखे,वस्त्र कुल्हाड़ी से कब धोता। संस्कृति अपनी गौरवशाली,संस्कारों की करते खेती।क्यों हम उनकी नकल उतारें,जिनकी संस्कृति अभी पिछेती।जब जब अपने फसल पकी थी,पश्चिम रहा खेत ही बोता।बीज रोप दे बंजर में कुछ,यूँ कोई होंश नही खोता। देश हमारा जग

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कवि निमंत्रण पर कविता

हिंदी कविता

कवि निमंत्रण पर कविता मित्रों तुम आनाआज मेरी कविता पाठ है कविता पाठ के बादतुम्हारे आने-जाने का खर्चा दूँगा शाम को पार्टी होगीमिलकर जश्न मनाएंगेजैसे हर बार मनाते हैं बस एक गुज़ारिश हैमहफ़िल मेंजब मैं कविता पढूँगामेरी हर पंक्तियों के बादतुम सभी एक साथवाह- वाह जरूर कहना कविता पढ़ने के बादजब मैं धन्यवाद बोलूँतुम ज़ोरदार तालियां बजाना

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शिव भक्ति गीत -बाबूलाल शर्मा

आध्यात्म और भक्ति

शिव भक्ति गीत -बाबूलाल शर्मा प्रस्तुत कविता शिव भक्ति गीत आधारित है। वह त्रिदेवों में एक देव हैं। इन्हें देवों के देव महादेव, भोलेनाथ, शंकर, महेश, रुद्र, नीलकंठ, गंगाधार आदि नामों से भी जाना जाता है।

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राज दरबारी पर कविता

हिंदी कविता

राज दरबारी वो हैं बड़े लेखकनवाजा जाता है उन्हेंखिताबों सेदी जाती हैसरकार द्वारा सुविधाएंनाना प्रकार कीबदले मेंमिलाते हैं वे कदम-तालसरकार सेकर रहे हैं निर्वहनराज-दरबारियों कीपरम्परा काउनकी लेखनी नेमोड़ लिया मुंहआमजन की वेदना सेहो गए बेमुख संवेदना सेचंद राजकीयरियायतों के लिए -विनोद सिल्ला©

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