हिंदी कविता

खुदा से फरियाद पर कविता -माधवी गणवीर

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खुदा से फरियाद पर कविता या खुदा मुझे ऎसी इनायत तो दे,मोहब्बत के बदले मोहब्बत तो दे। खटक रहे है हम जिनकी निगाहों में,आजमाइश के बदले आजमाइश तो दे।न मुकर अपनी ही जुबां से ,ईमान के बदले ईमान तो दे। बजा कर अपनी ढ़फली अपना राग,तरन्नुम के बदले तरन्नुम तो दे।हमने जफा न सीखी तुमने […]

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क्रिसमस डे -कवि डीजेन्द्र कुर्रे ‘कोहिनूर’

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क्रिसमस डे सर पे टोपी हाथ मे क्रिसमस,चलो सांता बनते हैं।प्रभु के जन्म दिवस पर,पुनीत कर्म हम करते हैं । बच्चों के साथ मिलकर,हँसी ठिठोली करते हैं।खूब नाचे हम खूब गाए,बच्चों के मन बहलाते है। चलो गिरजाघर जाकर,प्रभु के महिमा गाते हैं।पवित्र बाइबिल पड़कर,ध्यान मसीह में लगाते है। आओ सब मिलकर ,क्रिसमस उत्सव मनाते हैं।दिनदुखियों

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मिट्टी की घट पर कविता की महिमा बताती सुकमोती चौहान रुचि की छप्पय छंद में यह अनूठा काव्य

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

मिट्टी की घट पर कविता मिट्टी घट की ओर ,चलो अब लौटे हम सब।प्लास्टिक का प्रतिबंध,मनुज स्वीकारोगे कब।मृदा प्रदूषण रोक,पीजिए घट का पानी।स्वस्थ रहेगा गात, स्वच्छता बने निशानी।घड़ा सुराही की शुद्धता, मान रहा विज्ञान भी।लाइलाज रोगों की दवा,मिट्टी यह वरदान भी। ✍ सुकमोती चौहान रुचिबिछिया,महासमुन्द,छ.ग.

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गीता द्विवेदी की शानदार कविता

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गीता द्विवेदी की शानदार कविता अलाव कभी-कभी जिंदगीअलाव जैसी धधकती हैउसमें हाथ सेंकते हैंअपने भी पराए भीबुझने से बचाने कीसबकी कोशिश रहती है,डालते रहते हैं,लकड़़ियाँ पारी-पारी,कितना अजीब है ना!न आग न धुआँपर जिंदगी तो जलती है,सभी को पता है।क्योंकि कभी न कभी,सभी को इसका अनुभव हुआ है।कोई राख हो जाता है,कोई कुन्दन,और तब…..हाथ सेंकने वाले,दूर

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चुनाव में होगा दंगल-दूजराम साहू

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चुनाव में होगा दंगल अब होगा दंगल,गाँव-गाँव, गली-गली !!बजेगा बिगुल चुनाव की,गाँव- गाँव, गली-गली !! लोकतंत्र की महापर्व में,काफिले खूब चलेंगे!न दिखेगा अबीर का रंग,चुनावी रंग चढ़ेंगे !!लुभावने, छलावे की,मंत्रोच्चार होगी गली-गली ! पांव पकड़ेंगे दीन का भीयाचक बन वोट मांगेंगे !लंबी-चौड़ी अस्वासन होगीवादे खूब गिनायेंगे !!सच्चाई नहीं सुई नोंक बराबरपरख लेना भली -भली !

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बारी के पताल-महेन्द्र देवांगन माटी

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बारी के पताल वाह रे हमर बारी के पताल ।ते दिखथस सुघ्घर लाल लाल ।। गरीब अमीर दुनो तोला भाथे ।झोला मे भर भरके तोला लाथे ।। तोर बिना कुछु साग ह नइ मिठाये ।सलाद बनाके तोला भात मे खाये ।। धनिया मिरची मिलाके चटनी बनाथे।रोटी अऊ बासी मे चाट चाट के खाथे।। वाह रे

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शरदपूर्णिमा पर कविता-  डा. नीलम

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शरदपूर्णिमा पर कविता ओढ़ के चादर कोहरे कीसूरज घर से निकला थाकर फैला कर थोड़ी धूपदेने की, दिन भर कोशिश करता रहा सांझ ने जब दामन फैलायानिराश होकर सूरज फिर लौट गयाकोशिश फिर चाँद-सितारों ने भी की थीपर कोहरे की चादर वैसी ही बिछी रही कोहरे की चादर ,पर ..बहुत गाड़ी थीहवाओं ने भी तीखी

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मौत पर कविता: जिंदगी का पड़ाव या कुदरत का हसीन तोहफा- डा.नीलम

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मौत पर कविता मौत तू जिंदगी का पड़ाव है याहै कुदरत का हसीन तोहफा है आगोश तेरा बहुत ही शांत -शीतलजो हैं दुनियां से नाराज़ उन्हें है मिलता सुकून तुझसे है तू कहाँ कब किसी के पास जाती हैहर किसी को तू अपने पास बुलाती है कभी तू मेहरबां होती है तोनींद में ही ले

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लिखना पढ़ना पर कविता -अंचल

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लिखना पढ़ना पर कविता पढ़ना लिखना चाहिए,जीवन में जी मस्त।शिक्षित करते हैं सभी,संकट को जी पस्त।।संकट को जी पस्त,होत हैं भारी ताकत।डरते कभी न भाय,भगे जी संकट सामत।।कह कवि अंचल मित्र,कभी मत डर को गढ़ना।मंजिल पाना सत्य,सदा सब लिखना पढ़ना।। अंचल

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मतदाता पर कुण्डिलयाँ

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मतदाता पर कुण्डिलयाँ?? भाग्य विधाता भाग्य विधाता देश का, स्वयं आप श्रीमान।मिला वोट अधिकार है, करिये जी मतदान।।करिये जी मतदान, एक मत पड़ता भारी।सभी छोड़कर काम, प्रथम यह जिम्मेदारी।।कहे अमित यह आज, नाम जिनका मतदाता।मिला श्रेष्ठ सौभाग्य, आप ही भाग्य विधाता।। मतदाता मतदाता मत डालिए, लोकतंत्र की शान।वोट डालना आपको, शक्ति स्वयं पहचान।।शक्ति स्वयं पहचान,

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केवरा यदु मीरा के दोहे

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केवरा यदु मीरा के दोहे (1) चंदन माथे पर चंदन लगा, कैसा ढ़ोंग रचाय ।मंदिर मठ के नाम पर, वह व्यापार चलाय ।। (2)अग्निपथ सैनिक चलते अग्निपथ, लिये तिरंगा हाथ ।पीछे फिर हटते नहीं, कटे भले ही माथ ।। (3)दीपक बेटा कुल दीपक बना, बेटी का अपमान ।भ्रूण कोख में मारते, होगा कब सम्मान ।।

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गुरु घासीदास बाबा पर हिंदी कविता

समाज और यथार्थ

गुरू घासीदास छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर जिले के गिरौदपुरी गांव में पिता महंगुदास जी एवं माता अमरौतिन के यहाँ अवतरित हुये थे गुरू घासीदास जी सतनाम धर्म जिसे आम बोल चाल में सतनामी समाज कहा जाता है, के प्रवर्तक थे।

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