हिंदी कविता

कुण्डलिया

हिंदी कविता

कुण्डलिया अंदर की यह शून्यता ,                     बढ़ जाये अवसाद ।संशय विष से ग्रस्त मन ,                     ढूढ़े  ज्ञान  प्रसाद ।।ढूढ़े   ज्ञान  प्रसाद ,           व्यथित मन व्याकुल होता ।आत्म – बोध से दूर ,    …     खड़ा    एकाकी    रोता ।।कह ननकी कवि तुच्छ ,             सतत शुचिता  अभ्यंतर ।कृपा  करें  जब  संत ,              बोध  होता  उर  अंदर ।।                    ~  […]

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पानी के रूप

हिंदी कविता

 पानी के रूप धरती का जब मन टूटा तो झरना बन कर फूटा पानी हृदय हिमालय का पिघला जब नदिया बन कर बहता पानी ।। पेट की आग बुझावन हेतु टप टप मेहनत टपका पानी उर में दर्द  समाया जब जब आँसू बन कर बहता पानी ।। सूरज की गर्मी से उड़ कर भाप बना बन रहता पानी एक जगह यदि बन्ध जाए तो गगन

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मन की जिद ने इस धरती पर कितने रंग बिखेरे

नारी जीवन और संवेदना

मन की जिद ने इस धरती पर कितने रंग बिखेरे दिन   गुजरे   या   रातें  बीतीं  ,रोज लगाती  फेरे।मन की जिद ने इस धरती पर, कितने रंग बिखेरे।कभी  संकटों  के  बादल ने, सुख  सूरज को घेरा।कभी बना दुख  बाढ़  भयावह  ,मन में डाले डेरा।जिद ही  है जिसने  धरती  पर ,एकलव्य अवतारा।जिद  ही थी जिसने  रावण  को

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चहचहाती गौरैया

हिंदी कविता

चहचहाती गौरैया चहचहाती गौरैयामुंडेर में बैठअपनी घोसला बनाती है,चार दाना खाती हैचु चु की आवाज करती है,घोसले में बैठेनन्ही चिड़िया के लिएचोंच में दबाकरदाना लाती है,रंगीन दुनिया मेंअपनी परवाज लेकररंग बिखरेती है,स्वछंद आकाश मेंअपनी उड़ान भरती है,न कोई सीमान कोई बंधनसभी मुल्क के लाड़लीउड़ान से बन जाती है,पक्षी तो हैगौरैया की उड़ानसब को भाँति है,घर

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जल संकट पर कविता

नारी जीवन और संवेदना,

विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्व के सभी देशों में स्वच्छ एवं सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना है साथ ही जल संरक्षण के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित करना है। जल संकट पर कविता पानी मत बर्बाद कर ,          बूँद – बूँद अनमोल |प्यासे ही जो मर गये

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नास्तिकता पर कविता

हिंदी कविता

नास्तिकता पर कविता हमें पता नहींपर बढ़ रहे हैंधीरे धीरेनास्तिकता की ओरत्याग रहे हैंसंस्कारों को,आडम्बरों कोसमझ रहे हैंहकीकतअच्छा है।परजताने कोबताते हैंमैं हूँ आस्तिक।फिर भीछोंड रहे हैंहम ताबीजमजहबी टोपीनामकरण रस्मझालर उतरवानाबहुत कुछ।बढ़ रहे हैंधीरे धीरेनास्तिकता की ओरक्योंकिनास्तिकता हीवैज्ञानिकता है। राजकिशोर धिरहीकविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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तीन कविताएं

हिंदी कविता

तीन कविताएं                         1बाहें फैलायेमांग रही दुआएँ,भूल गया क्यामेरी वफ़ाएँ!ओ निर्मोही मेघ!इतना ना तरसा,तप रही तेरी वसुधाअब तो जल बरसा!                        2बूंद-बूंद को अवनी तरसे,अम्बर फिरभी ना बरसे!प्यासा पथिक,पनघट प्यासाप्यासा फिरा, प्यासे डगर से!प्यासी अँखिया पता पूछे,पानी का प्यासे अधर से!बूंद-बूंद को अवनी तरसेअम्बर फिरभी ना बरसे!                      3प्रदूषण से कराहती,शांत हो गई है!कहते हैं

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कश्मीरी पत्थरबाजों पर दोहे

हिंदी कविता

कश्मीरी पत्थरबाजों पर दोहे धरती का जो स्वर्ग था, बना नर्क वह आज।गलियों में कश्मीर की, अब दहशत का राज।।भटक गये सब नव युवक, फैलाते आतंक।सड़कों पर तांडव करें, होकर के निःशंक।।उग्रवाद की शह मिली, भटक गये कुछ छात्र।ज्ञानार्जन की उम्र में, बने घृणा के पात्र।।पत्थरबाजी खुल करें, अल्प नहीं डर व्याप्त।सेना का भी भय

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चंदन के ग़ज़ल (chandan ke gazal)

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यहाँ पर चंद्रभान पटेल चंदन के ग़ज़ल (Chandan Ke Gazal) के बारे में पढेंगे यदि आपको अच्छी लगी हो तो शेयर जरुर करें मैं दरिया के बीच कहीं डूबा पत्थर मैं दरिया के बीच कहीं डूबा पत्थर ,तू गहनों में जड़ा हुआ महँगा पत्थर।। तुझ को देख के नदी का पानी ठहर गया,तुझ को छू

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रामनाथ की कुण्डलिया

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रामनाथ की कुण्डलिया (1)  प्रातः  जागो भोर में ,                    लेके  हरि  का   नाम ।       मातृभूमि वंदन करो ,                    फिर पीछे सब काम ।।       फिर पीछे सब काम ,                   करो तुम दुनियादारी ।       अपनाओ    आहार ,                   शुद्ध ताजे  तरकारी ।।       कह ननकी कविराज ,                 मांस ये मदिरा त्यागो ।       देर  रात  मत जाग ,                  हमेशा   प्रातः 

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मिल मस्त हो कर फाग में

हिंदी कविता

मिल मस्त हो कर फाग में सब झूम लो रस राग में।मिल मस्त हो कर फाग में।।खुशियों भरा यह पर्व है।इसपे हमें अति गर्व है।।यह मास फागुन चाव का।ऋतुराज के मधु भाव का।।हर और दृश्य सुहावने।सब कूँज वृक्ष लुभावने ।।मन से मिटा हर क्लेश को।उर में रखो मत द्वेष को।।क्षण आज है न विलाप का।यह

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होलिका दहन पर हिंदी कविता / पंकज प्रियम

नारी जीवन और संवेदना

होलिका दहन पर हिंदी कविता / पंकज प्रियम बुराई खत्म करने का प्रण करेंआओ फिर होलिका दहन करें।औरत की इज्जत का प्रण करें,आओ फिर होलिका दहन करें। यहां तो हर रोज जलती है नारीदहेज कभी दुष्कर्म की है मारीरोज कोई रावण अपहरण करेपहले इनका मिलकर दमन करेआओ फिर….. हर घर प्रह्लाद सा कुंठित जीवनमां बाप

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