है नमन देश की माटी को -राजेश पाण्डेय अब्र
हिंदी कविताहै नमन देश की माटी को विश्वजीत है स्वंत तिरंगा तीन रंगों की अमृत गंगासरफ़रोश होता हर जन मन मत लेना तुम इससे पंगा, ऊर्ज समाहित सैन्य बलों में जन, धन लेकर खड़े पलों मेंऊर्जा का संचार देश मेंप्रश्न खड़े अनुत्तरित हलों में, सबल करे नेतृत्व देश का अभिमानी हो नहीं द्वेष कावक़्त पड़े सर कलम
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