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छेरछेरा त्योहार पर कविता
अन्धविश्वास पर कविता
कोशिश क्यों नही करता अपना घर बसाने को
संगम नगरी प्रयागराज
किरीट सवैया पर कविता
समर शेष है रुको नहीं
रफ़्ता-रफ़्ता मेरे पास आने लगे
फिर बोलें भारत माँ की जय
हिन्द देश के अंबर पर
भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं
आजादी की लड़ाई में महिला
चंदा मामा दूर हैं
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