हिंदी कविता

छेरछेरा त्योहार पर कविता

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छेरछेरा त्योहार पूस मास की पूर्णिमा, अन्न भरे घर द्वार।जश्न मनाता आ गया, छेरछेरा त्योहार।।अन्न दान का पर्व है, संस्कृति की पहचान।मालिक या मजदूर हो, इस दिन एक समान।। घर-घर जातें हैं सभी, गाते मंगल गान।मुट्ठी भर-भर लोग भी, करते हैं सब दान।।भेष बदल कैलाश-पति, गये उमा के द्वार।अन्नदान से फिर मिला, इक दूजे को […]

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अन्धविश्वास पर कविता

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

अन्धविश्वास पर कविता तंत्र मंत्र के चक्कर की खबरे खूब आती हैअन्धविश्वास में अक्सर जानें ही जाती है। सुन लो घटना हुआ जो कोरबा रामकक्षार हैअंधभक्त पुत्र ने कर दिया खुद माँ पर वार हैभ्रम जाल में फंसकर अपनी माँ को गंवा लियालहू भी पीया उसने माँ का मांस भी खा लिया पड़ा रहा मति

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कोशिश क्यों नही करता अपना घर बसाने को

हिंदी कविता

कोशिश क्यों नही करता अपना घर बसाने को ऐ पाक़!तू क्यों तना है अपना घर जलाने को। कोशिश क्यों नही करता अपना घर बसाने को।। तुम्हारे तमाम ज़ुल्मों को सीनें से लगाते रहे। पर गुस्सा क्यों दिलाता है हथियार उठाने को।। पंछी की तरह तो तुझे हम आज़ाद कर दिये थे। फिर क्यों चाहता है

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संगम नगरी प्रयागराज

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संगम नगरी प्रयागराज संक्रांति के पावन दिवस परचलो आज हम कुंभ नहालेंप्रयागराज के संगम तट परमाँ गंगे का भव्यदर्शन पा लें।।     भव्य दिख रही संगम नगरी     भाँति- भाँति के लोग हजार     शाही स्नान करने को पहले     देखो नागा की लगी कतार।।साधु संतकी भीड़ है उमड़ीनागा, जूना,जंघम, किम्बरडुबकी लगाकर इस संगम मेंजीवन बनाते हैं पुण्योज्वल।।     दादा,

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किरीट सवैया पर कविता

हिंदी कविता

किरीट सवैया पर कविता भारत भव्य विचार सदा शुभ, भारत सद् व्यवहार सदा शुभभारत मंगल कारक है नित, भारत ही हित कारक है शुभ।भारत दिव्य प्रकाश सदा शुभ, भारत कर्म प्रधान सदा शुभ।भारत भावन भूमि महा शुचि, भारत पावन धार सदा शुभ। पुष्पाशर्मा”कुसुम”

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समर शेष है रुको नहीं

देशभक्ति, हिंदी कविता

समर शेष है रुको नहीं समर शेष है रुको नहींअब करो जीत की तैयारीआने वाले भारत कीबाधाएँ होंगी खंडित सारी ,राजद्रोह की बात करे जोउसे मसल कर रख देनादेशभक्ति का हो मशाल जोउसे शीश पर धर लेना,रुको नहीं तुम झुको नहीं अब मानवता की है बारीसुस्त पड़े सब शीर्ष पहरुएजनमानस दण्डित सारी,कालचक्र जो दिखलाए तुमउसे

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रफ़्ता-रफ़्ता मेरे पास आने लगे

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रफ़्ता-रफ़्ता मेरे पास आने लगे रफ़्ता-रफ़्ता मेरे पास आने लगेहर कहीं हम यहाँ गुनगुनाने लगेप्यार की अधखुली खिड़कियों की डगरएक दूजे में हम सामने लगे.इस जनम के ये बन्धन गहराने लगेदूर रहकर भी वो मुस्कुराने लगेग़म यहाँ कम मिलेगा हमारे सिवादर्द की छाँव भी अब सुहाने लगे.रिश्तों की कसौटी पे आने लगेवो हमें हम उन्हें

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mera bharat mahan

फिर बोलें भारत माँ की जय

हिंदी कविता

फिर बोलें भारत माँ की जय हिमाच्छादित उत्तुंग शिखरभारत माँ के प्रहरी हैं प्रखर।देखी जब माँ की क्लांत दशापूछा, माँ क्या है तेरी व्यथा ?क्यों हृदय तुम्हारा व्याकुल हैक्यों भरे नयन, कुछ बोलो तो ! क्या बोलूँ , मेरी आँखों सेये अश्रु कहाँ अब थमते हैं।ममता का समंदर सूख गयाजब देखी इनकी दानवता।क्या सपने देखे

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mahapurush

हिन्द देश के अंबर पर

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हिन्द देश के अंबर पर नव सज्जित आज विहान है हिन्द देश के अंबर परनव सज्जित आज विहान हैहर्षित हो लहराए तिरंगादेशप्रेम में डूबा देश जहान है। आजादी के दीवानों नेसंविधान निर्माण की ठानी थीऊँच नीच का भेद नहीं थाउन्मुक्त लहू में रवानी थी। संविधान निर्माताओं का श्रमगणतंत्र लागू हुआ था आजपूर्ण स्वराज तो हासिल

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mera bharat mahan

भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं

हिंदी कविता

भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं मिलकर आओ जग में हम सब,                    भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं।….माँ भारती के सब भारतवासी ,                     सदा सदा गुण गाते हैं।।जब आजादी की अलख जगी,                   वीरों ने प्राण गवाये थे।यह मातृभूमि की रक्षा को,                  वे बलिदानी कहलाये थे।।पावन गणतंत्र यह अपना,                 कर्तव्यों को भी निभाते हैं।…….भारत को श्रेष्ठ बनाते हैं…भारत

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चंदा मामा दूर हैं

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चंदा मामा दूर हैं चंदा मामा दूर हैं ,  पर हम तो मजबूर है।  कैसे आए पास में,  हम लगे हैं यह ही प्रयास में हम जब भी आगे बढ़ते हैं,तुम आगे बढ़ जाते हो।रुककर देखें जब भी तुमको,तुम ऊपर चढ़ जाते हो।कभी तुम दिखते तुन्नक से, कभी तुम दिखते भरपूर हो।घटती-बढ़ती कलाओं में,अपने में रहते चूर हो।चंदा

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