चार के चरचा/ डा.विजय कन्नौजे
चार के चरचा*****4*** चार दिन के जिनगी संगीचार दिन के हवे जवानीचारेच दिन तपबे संगीफेर नि चलय मनमानी। चारेच दिन के धन दौलतचारेच दिन के कठौता।चारेच दिन तप ले बाबूफेर नइ मिलय मौका।। चार भागित चार,होथे बराबर गण सुन।चार दिन के जिनगी मचारो ठहर गुण।। चार झन में चरबत्ता गोठचारो ठहर के मार।चार झनके संग … Read more