सागर- मनहरण घनाक्षरी
प्रकृति और पर्यावरणसागर- मनहरण घनाक्षरी पोखर व झील देखो , जिसमें न गहराई ,थोड़ा सा ही जल पाय, मारते उफान हैं I सागर को देखो वहाँ , नदियाँ हैं कई जहाँ ,सबको समेट हिय , करे न गुमान है I जिसका न ओर छोर , दिल में अथाँह ठोर ,सबको ही एक रस , देता सम्मान है
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