कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

संसद ल सड़क म लगा के तो देख

हिंदी कविता

गुरुजी कस पारा म पढ़ा के तो देख, अरे ! संसद ल सड़क म लगा के तो देख। गिंजरथे गुरु ह गली म पुस्तक ल धर के, बटोरे हे लईकन ल मास्टर गाँव भर के।

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widow

विधवा पर कविता

समाज और यथार्थ

मैंने अपनी स्वरचित कविता “विधवाएं” कुछ समय पहले ही लिखी है ,और इसे लिखने के लिए प्रेरणा भी मुझे यथार्थ ही मिली। कि हम चाहे कितनी ही तरक्की क्यूं न कर ले मगर हमारी सोच औरतों को लेकर अब भी संकीर्ण ही है।

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उनसे मेरा प्यार महादेव की निशानी है

हिंदी कविता

जब नायक नायिका से बेइन्तहां सच्ची मोहब्बत करता है उनसे मिलने का वक्त आता है तो नायिका के तरफ से कुछ विरोधी खड़े हुए तब अन्त मे नायक इस कविता के द्वारा उनके सामने खुले रुप मे आगाज करता है –

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गुलाब नहीं है पुष्प आज

हिंदी कविता

कविता बहार के मंच पर प्रसारित प्रतियोगिता में प्रतिभागिता हेतु “गुलाब” विषय पर कविताएं आमंत्रित थीं। मैं अपनी कविता इस संदर्भ में अग्रसारित कर रहा हूं। इसका शीर्षक है -“गुलाब नहीं है पुष्प आज”। इसमें गुलाब के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन है – ये प्रेम का प्रतीक है, मेहनत का प्रतीक है, दोस्ती का प्रतीक है, कोमलता का प्रतीक है….। इन सब की ओर इशारा करती मेरी कविता निर्धारित तिथि 23 सितंबर 2021 से पूर्व प्रेषित है। आशा है संज्ञान लिया जाएगा। धन्यवाद।

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