संसद ल सड़क म लगा के तो देख
हिंदी कवितागुरुजी कस पारा म पढ़ा के तो देख, अरे ! संसद ल सड़क म लगा के तो देख। गिंजरथे गुरु ह गली म पुस्तक ल धर के, बटोरे हे लईकन ल मास्टर गाँव भर के।
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गुरुजी कस पारा म पढ़ा के तो देख, अरे ! संसद ल सड़क म लगा के तो देख। गिंजरथे गुरु ह गली म पुस्तक ल धर के, बटोरे हे लईकन ल मास्टर गाँव भर के।
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ओढ़ना बिना जेखर जिंनगी गुजरगे, मरनी म ओखर कपड़ा चढ़ाबो।
मरने वाले की याद में कविता Read More »
कपटी करोना जीव के काल होगे
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भुँईया के छाती ह फाटगे। पानी सुखागे हे घाट के।
करिया बादर पर कविता Read More »
लखनऊ में जो ओला ड्राइवर और एक लड़की की झड़प
आत्मसम्मान पर कविता Read More »
मैंने अपनी स्वरचित कविता “विधवाएं” कुछ समय पहले ही लिखी है ,और इसे लिखने के लिए प्रेरणा भी मुझे यथार्थ ही मिली। कि हम चाहे कितनी ही तरक्की क्यूं न कर ले मगर हमारी सोच औरतों को लेकर अब भी संकीर्ण ही है।
जब नायक नायिका से बेइन्तहां सच्ची मोहब्बत करता है उनसे मिलने का वक्त आता है तो नायिका के तरफ से कुछ विरोधी खड़े हुए तब अन्त मे नायक इस कविता के द्वारा उनके सामने खुले रुप मे आगाज करता है –
उनसे मेरा प्यार महादेव की निशानी है Read More »
कविता बहार के मंच पर प्रसारित प्रतियोगिता में प्रतिभागिता हेतु “गुलाब” विषय पर कविताएं आमंत्रित थीं। मैं अपनी कविता इस संदर्भ में अग्रसारित कर रहा हूं। इसका शीर्षक है -“गुलाब नहीं है पुष्प आज”। इसमें गुलाब के विभिन्न स्वरूपों का वर्णन है – ये प्रेम का प्रतीक है, मेहनत का प्रतीक है, दोस्ती का प्रतीक है, कोमलता का प्रतीक है….। इन सब की ओर इशारा करती मेरी कविता निर्धारित तिथि 23 सितंबर 2021 से पूर्व प्रेषित है। आशा है संज्ञान लिया जाएगा। धन्यवाद।
गुलाब नहीं है पुष्प आज Read More »
गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर समर्पित गजानन आराधना
श्रीगणेश पर हिंदी कविता Read More »
गुलाब की अभिलाषा का वर्णन कविता के माध्यम से किया गया है।
गुलाब की अभिलाषा – अकिल खान Read More »