कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

मानवता के खातिर अब वृक्ष लगाऐंगे

हिंदी कविता

मानवता के खातिर अब वृक्ष लगाऐंगे।   कटेंगे वृक्ष , जंगल में तो, कैसे होगा विश्व में मंगल, बढ़ती जनसंख्या से हो रहा, जब संसार में मानव – दंगल। पर्यावरण समस्या को सुलझाऐंगे, मानवता के खातिर अब वृक्ष लगाऐंगे। मधुमक्खियों का शहद और चिड़ियों की आवाज, कंद – मूल फल में छिपाहै स्वस्थ सेहत का राज। […]

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थाम लो सँभालकर देश की मशाल को

हिंदी कविता

थाम लो सँभालकर देश की मशाल को हिन्द के बहादुरो शूरवीर बालको!थाम लो सँभाल कर देश की मशाल को! अन्धकार का गरूर आन-बान तोड़ दो,बालको, भविष्य के लिए मिसाल छोड़ दो,दो नयी-नयी दिशा वर्तमान काल को।थाम लो सँभाल कर देश की मशाल को! देश माँगता कि खून से रंगा गुलाब दो,तुम उठो सिपाहियो ! शत्रु

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नदी का रास्ता

हिंदी कविता

नदी का रास्ता नदी को रास्ता किसने दिखाया?सिखाया था उसे किसनेकि अपनी भावना के वेग कोउन्मुक्त बहने दे?कि वह अपने लिएखुद खोज लेगीसिन्धु की गंभीरतास्वच्छंद बहकरइसे हम पूछते आए युगों से,और सुनते भी युगों से आ रहे उत्तर नदी कामुझे कोई कभी आया नहीं था राह दिखलाने;बनाया मार्ग मैंने आप ही अपना। ढकेला था शिलाओं

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कूट अकबर के|तेजल छंद (वाचिक) – बाबूलाल शर्मा

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कूट अकबर के|तेजल छंद (वाचिक) – बाबूलाल शर्मा वर्णिक- तगण मगण, यगण यगण तगण गुरुमापनी- २२१ २२२, १२२ १२२ २२१ २ . 🌛 *…कूट अकबर के* 🌜 . *१*माने नहीं राणा, हठीला थकित हो टोडर गया।हे शाह माना वह, नहीं वह हठी है राणा नया।अकबर हुआ कुंठित, विकारी निराशा मन में बहे।मेरा महा शासन, उदयपुर

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हिंदी संग्रह कविता- वीर बालक

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वीर बालक हम प्रभात की नई किरण हैं,हम दिन के आलोक नवल।हम नवीन भारत के सैनिक,धीर, वीर, गम्भीर, अचल।हम प्रहरी ऊँचे हिमाद्रि के,सुरभि स्वर्ग की लेते हैं।हम हैं शांति-दूत धरणी के,छाँह सभी को देते हैं।वीर-प्रसू माँ की आँखों के,हम नवीन उजियाले हैं।गंगा-यमुना, हिन्द-महासागर,के हम रखवाले हैं।हम हैं शिवा-प्रताप, रोटियाँभले घास की खाएँगे।मगर किसी जुल्मी के

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हिंदी संग्रह कविता-सुख-शांतिमय संसार हो

हिंदी कविता

सुख-शांतिमय संसार हो सुख-शांतिमय संसार हो। पशु-शक्ति का न प्रयोग हो, सद्भाव का उपयोग हो, सबसे सदा सहयोग हो, निज चित्त पर निज वित्त पर सबका सदा अधिकार हो,सुख-शांतिमय संसार हो। व्यक्तित्व का सम्मान हो,निज देश का अभिमान हो,पर विश्व-हित का ध्यान हो,निज स्वार्थ में ही भूलकरकोई नहीं अनुदार हो,सुख-शांतिमय संसार हो। सबका सदा उत्कर्ष

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struggle

हम उजाला जगमगाना चाहते हैं -केदारनाथ अग्रवाल

हिंदी कविता

हम उजाला जगमगाना चाहते हैं -केदारनाथ अग्रवाल हम उजाला जगमगाना चाहते हैंअब अँधेरे को हटाना चाहते हैं। हम मरे दिल को जिलाना चाहते हैं,हम गिरे सिर को उठाना चाहते हैं। बेसुरा स्वर हम मिटाना चाहते हैं।ताल-तुक पर गान गाना चाहते हैं। हम सबों को सम बनाना चाहते हैं।अब बराबर पर बिठाना चाहते हैं। हम उन्हें

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सपनों को साकार करें -प्रेमशंकर रघुवंशी

हिंदी कविता

सपनों को साकार करें -प्रेमशंकर रघुवंशी आओ, हम सब भारत मां की माटी से श्रृंगार करें! यह वह धरती, जिसने हमको निज उत्सर्ग सिखाया है,यह वह धरती, जिसने हमको अपना अमिय पिलाया है।आज उसी धरती की रक्षा में अपने उद्गार करें! इस जीवन-धन से भी प्यारा हमको अपना देश है,अलग-अलग हैं पंथ हमारे, किन्तु एक

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village based Poem

गाँव की महिमा पर अशोक शर्मा जी की कविता

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गाँव की महिमा पर अशोक शर्मा जी की कविता गांव और शहर लोग भागे शहर-शहर , हम भागे देहात,हमको लागत है गाँवों में, खुशियों की सौगात। उहाँ अट्टालिकाएं आकाश छूती, यहाँ झोपड़ी की ठंडी छाँव।रात रात भर चलता शहर जब,चैन शकून से सोता गाँव। जगमग जगमग करे शहर, ग्राम जुगनू से उजियारा है।चकाचैंध में हम

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प्रताप का राज्यारोहण-बाबूलाल शर्मा

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प्रताप का राज्यारोहण-बाबूलाल शर्मा मापनी- २२१ २२२, १२२ १२२ २२ वाचिक. *प्रताप का राज्यारोहण*. १सामंत दरबारी, कहे यह कुँवर खल मति मद।रक्षण उदयपुर हित, सँभालो तुम्ही राणा पद।सौगंध बप्पा की, निभे जब मुगल हो बाहर।मेवाड़ का जन जन, पुकारे सजग उठ नाहर।. २राणा बनो कीका, कुँवर अब स्वजन से अड़ कर।महिमा रखें महि भी, हमारी

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पृथ्वीराज चौहान पर दोहे – बाबू लाल शर्मा

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पृथ्वीराज चौहान पर दोहे (दोहा छंद) अजयमेरु गढ़ बींठली, साँभर पति चौहान।सोमेश्वर के अंश से, जन्मा पूत महान।। ग्यारह सौ उनचास मे, जन्मा शिशु शुभकाम।कर्पूरी के गर्भ से, राय पिथौरा नाम।। अल्प आयु में बन गए, अजयमेरु महाराज।माँ के संगत कर रहे, सभी राज के काज।। तब दिल्ली सम्राट थे, नाना पाल अनंग।राज पाट सब

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