कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

संगीत और जीवन -बिसेन कुमार यादव’बिसु

हिंदी कविता

आना है, और चलें जाना है!जीवन का रीत पुराना है!! जीवन का नहीं ठिकाना है!जन्म लिया तो मर जाना है!! गाना है और बजना है!जीवन एक तराना है!! संगीत को मीत बनाओ!शब्दों को गीत बनाओ!! सा,रे,गा,मा,पा,धा नि,से,जीवन में राग बना! और दो दिलों के मेल सेअमर प्रेम अनुराग बना!! संगीत के सात स्वरों से, मधुर-मधुर […]

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राह नीर की छोड़ – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

हिंदी कविता

इस रचना में कवि ने जीवन में आगे बढ़ने को सभी को प्रेरित किया है |
राह नीर की छोड़ – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

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स्कूल कक्षा पर कविता

मेरी कक्षा पर कविता – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

हिंदी कविता

इस रचना में कवि ने अपनी कक्षा एवं शिक्षकों के सद्चरित्र होने का वर्णन किया है |
मेरी कक्षा – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

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जुगाड़ पर कविता – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

समाज और यथार्थ

इस रचना को व्यंग्य के रूप में पेश किया गया है | समाज में चल रहीं अनैतिक परम्पराओं पर कुठाराघात करने की एक कोशिश रचनाकार ने की है |
जुगाड़ – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

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hasdev jangal

नारा भर हांकत हन (व्यंग्य रचना)

प्रकृति और पर्यावरण

एकर सेती भैया हो , जम्मो मनखे मन,ला मिलजुल के,लालच ला दुरीहा के पर्यावरण बचाए बर कुछ करना
पड़ही। लेकिन ये हा केवल मुंह अउ किताब भर मा तिरिया जाथे।

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घाम के महीना छत्तीसगढ़ी कविता

हिंदी कविता

घाम के महीना छत्तीसगढ़ी कविता नदिया के तीर अमरइया के छांव हे।अब तो बिलम जा कइथव मोर नदी तीर गांव हे।। जेठ के मंझनिया के बेरा म तिपत भोंमरा हे।खरे मंझनिया के बेरा म उड़त हवा बड़ोरा हे।। बिन पनही के छाला परत तोर पांव हे।मोर मया पिरित के तोर बर जुर छांव हे।। खोर

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save nature

पर्यावरण और मानव/ अशोक शर्मा

प्रकृति और पर्यावरण

पर्यावरण और मानव/ अशोक शर्मा धरा का श्रृंगार देता, चारो ओर पाया जाता,इसकी आगोश में ही, दुनिया ये रहती।धूप छाँव जल नमीं, वायु वृक्ष और जमीं,जीव सहभागिता को, पर्यावरण कहती। पर देखो मूढ़ बुद्धि, नही रही नर सुधि,काट दिए वृक्ष देखो, धरा लगे जलती।कहीं सूखा तूफ़ां कहीं, प्रकृति बीमार रही,मही पर मानवता, बाढ़ में है

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वृक्ष की पुकार कविता -महदीप जंघेल

हिंदी कविता

चंद पैसों के लिए वृक्ष का सौदा न करे। वृक्ष है, तो विश्व है। वृक्ष हमारी माँ के समान है, जो हमे जीवन प्रदान करके सब कुछ अर्पण करती है। अतः पेड़ लगाएं और पर्यावरण बचाएं🌻🌻

वृक्ष की पुकार – कविता, महदीप जंघेल

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क्यों काट रहे हो जंगल -बिसेन कुमार यादव’बिसु’ (वन बचाओ आधारित कविता)

प्रकृति और पर्यावरण

क्यों काट रहे हो जंगल (वन बचाओ आधारित कविता) क्यों कर रहे हो अहित अमंगल!क्यों काट रहे हो तुम जंगल!! धरती की हरियाली को तूने लूटा!बताओ कितने जंगल को तूने काटा!! वनों में अब न गुलमोहर न गूलर खड़ी है!हरी-भरी धरती हमारी बंजर पड़ी है!! अगर ये जंगल नहीं रहा तो, कजरी की गीत कहां

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सम्भल जाओ आज से- प्रिया सिंह

हिंदी कविता

सम्भल जाओ आज से- प्रिया सिंह भारत वर्ष की बेटी हूं, समझ गई अपना अधिकार ।अन्याय नहीं सहन करेंगे, अब मेरी भी वाणी में धार।अब चाहोगे तुम रोकना हमें , अपने आदतन अंदाज से।पर रोकने वाले!  खुद रुक जाओ, सम्भल जाओ आज से । जितना करना था अत्याचार हम पर, उसको हम सह गये।सहते सहते

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cycle

03 जून विश्व साइकिल दिवस पर दोहे

नारी जीवन और संवेदना

03 जून विश्व साइकिल दिवस पर दोहे पाँवगाड़ी साइकिल साधन एक है,सस्ता और आसान।जिसकी मर्जी वो चले, चल दे सीना तान।। बचपन साथी संग चढ़, बैठे मौज उड़ाय।धक्का दें साथी गिरे त, उसको खूब चिड़ाय।। आगे पीछे बीच में, तीन पीढ़ी बिठाय।हँसते गाते बढ़े चलें, देख लोग हरसाय।। खुद ढोती व बोझ संग, खर्चे भी

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तिल-तिल कर हम जलना सीखें

हिंदी कविता

तिल-तिल कर हम जलना सीखें जीवन दीप वर्तिका तन की, स्नेह हृदय में भरना सीखें।दानवता का तिमिर हटाने, तिल-तिल कर हम जलना सीखें। अमा निशासी घोर निशा हो, अन्धकारमय दसों दिशा हों।झंझा के झोंके हों प्रतिपल, फिर भी अविचल चलना सीखें ॥ तिल.. बीहड़ वन चाहे नद – नाले, शैल शृंगारभी बाधा डालें।कुश-कंटक-युत पंथ विकट

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