कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

मोबाइल महाराज

हिंदी कविता

मोबाइल महाराज जय हो तुम्हारी हे मोबाइल महाराजतकनीकि युग के तुम ही हो सरताजबिन भोजन  दिन कट जाता हैपर तुम बिन क्षण पल नहीं न आज।हे मोबाइल तुम बिन सुबह न होवेतुम संग आॅनलाइन रह सकें पूरी रातगुडमार्निंग से लेकर गुडनाइट का सफरमैसेज में ही होती अच्छी बुरी हर बात।हर पल आरजू मोबाइल महाराज कीमिलता […]

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पाती सैनिक का पत्नी के नाम

हिंदी कविता

पाती सैनिक का पत्नी के नाम प्राण पिआरी दिल की रानी  | सदा सुहागिन होउ सयानी   ||आज तेरी चिट्ठी क्या आई   |  याद मुझे सबकी है सताई  ||वन्दवुं प्रथम बाबा अरु दादी | सीस झुकाऊँ मातु पिता जी  ||कैसे हैं सब चाचा चाची     | बडकी मैया बड़े पिता जी   ||गुडिया जैसी कैसी बहना    | आशिर्वाद

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नारी पर सुन्दर कविता

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

नारी पर सुन्दर कविता आँखों   से  आंसू   बहते  हैं पानी   पानी  है  नारी। दुनियां की नज़रों में बस इक करूण कहानी है नारी।। युगों  -युगों  से  जाने  कितने कितने अत्याचार सहे। अबला से  सबला तक आयी हार न  मानी  है  नारी।। ब्रह्मा   विष्णु   गोद   खिलाए नाच नचाया नटवर को। अनुसुइया   है   कौसल्या   है राधा   रानी  

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पीड़ाएँ

हिंदी कविता

पीड़ाएँ पिंजरा  चला  छोड़  कर , पंछी अनंत दूर ।यादें  ही  अब  शेष  हैं , परिजन  हैं  बेनूर ।। आँसू से रिश्ता घना ,  आँखों  ने ली जोड़ ।निर्मोही क्यों हो गये , ले गये सुख निचोड़ ।।गहनें सिसक रहे सजन , रूठे  सब श्रृंगार ।माथे की  ये  बिंदिया , पोंछ गये दिलदार ।। मन

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सेना पर कविता

हिंदी कविता

सेना पर कविता सेना भारत वर्ष की, उत्तम और महान।इसके साहस की सदा, जग करता गुणगान।जग करता गुणगान, लड़े पूरे दमखम से।लेती रिपु की जान, खींच कर लाती बिल से।*और बढ़ाती *शान* , जीत बिन साँस न लेना।सर्व गुणों की खान, बनी बलशाली सेना।ताकत अपनी दें दिखा, दुश्मन को दें मात।ऐसी ठोकर दें उसे, नहीं

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मेरी कविता मां काली है

हिंदी कविता

मेरी कविता मां काली है मेरी कविता में करुण नही,क्रंदन कर अश्क बहायेगी ।श्रृंगार नहीं है कविता में ,जो गीत प्रेम के गायेगी ।सैनिक के साथ चला करती,यह भारत की रखवाली है ।शत्रु का शोणित पान करे ,मेरी कविता मां काली है ।प्रलय कर दे शत्रु दल में,वैरी को त्रास भयंकर है।जनहित को जो विषपान

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वक्त ने सितम क्या ढाया है

नारी जीवन और संवेदना

वक्त ने सितम क्या ढाया है यह कैसी बेवसी है ,कैसा वक्त,अपनी हद में रह कर भी सजा पाईचाहा ही क्या था फ़कत दो गज जमीन ,वो भी न मिली और महाभारत हो गयी।चाहा ही क्या था बस अपना हक जीने कोराजनीति में द्रोपदी गुनाहगार हो गयी।त्याग,सेवा ,फर्ज दायित्व ही तो निभायेदेखो तो फिर भी

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mother their kids

माँ सी हो गई हूँ

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। माँ सी हो गई हूँ जब भी चादर बदलतीमाँ पर झल्ला पड़ती    ये क्या है माँ?सारा सामान तकिए के

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सड़क पर कविता

हिंदी कविता

सड़क पर कविता अजगर के जीभ सी ये सड़कसड़क नहीं है साहब….चीरघर है।हर दस मिनट में यहाँहोती हैं हलाल…इन द्रुतगामी वाहनों से।रोज होते सड़क हादसों सेलीजिए सबकजरा सावधानी सेकीजिए सफरक्या तुम्हें नहीं हैजिन्दगी से प्यारनहीं ,तो उनके बारे में सोचिएजो मानते हैं आपको संसार।जरा संभलकर चलिए हुजूरसड़कों पर गाड़ियाँ नहींयमराज गस्त लगाते हैंयहाँ रिपोर्ट दर्ज

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नाराज़- डॉ० ऋचा शर्मा

समाज और यथार्थ

नाराज़- डॉ० ऋचा शर्मा माँ बेटे से अक्सर रहती है नाराज़नहीं करता बेटा कोई भी काजयही समझाना चाहती है माँजीवन का गहरा राज़बस इसीलिए रहती है बेचारी नाराज़बेटे को पहनाना चाहती हैकामयाबी का ताज़समाज को मुँह दिखा पाऊँरख ले बेटा इतनी लाजमैं हार चुकी, थक चुकी हूँसुन ले एक बात मेरी आजसबकी तरह कर पाऊँमैं

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रात ढलती रही

हिंदी कविता

रात ढलती रही रात ढलती रही, दिन निकलते रहे,उजली किरणों का अब भी इंतजार है।दर्द पलता रहा, दिल के कोने में कहीं ,लब पर ख़ामोशियों का इजहार है।जीवन का अर्थ इतना सरल तो नहीं,कि सूत्र से सवाल हल हो गया।एक कदम ही चले थे चुपके से हम,सारे शहर में कोलाहल हो गया।संवादों का अंतहीन सिलसिला,शब्द

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बसंत तुम आए क्यों

हिंदी कविता

बसंत तुम आए क्यों ? मन में प्रेम जगाये क्यों?बसंत तुम आए क्यों ? सुगंधो से भरीसभी आम्र मंजरीकोयल कूकती फिरेइत्ती है बावरीसबके ह्रदय में हूक उठाने मन में प्रेम जगाये क्यों?बसंत तुम आए क्यों ? हरी पत्तियाँ बनी तरुणीआलिंगन करती लताओं काअनुरागी बन भंवरकलियों से जा मिलासकुचाती हैं हवाएँदिलों को एहसास दिलाने मन में

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