कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

फागुन में पलाश है रंगों भरी दवात

हिंदी कविता

फागुन में पलाश है रंगों भरी दवात फागुन में पलाश है, रंगों भरी दवात ।रंग गुलाबी हो गया, इन रंगों के साथ ।।अँखियों से ही पूछ गया, फागुन कई सवाल ।ख्बावों का संग पा लिया, ये नींदें कंगाल ।।पलट-पलट मौसम तके, भौचक निरखें धूप ।रह-रहकर चित्त में हँसे, ये फागुन के रूप ।।फूलों भरी फुलवारियाँ, […]

फागुन में पलाश है रंगों भरी दवात Read More »

फागुन आ गया

हिंदी कविता

     फागुन आ गया हर्षोल्लास था गुमशुदादौर तलाश का  आ गया।गुम हुई खुशियों को लेकरफिर से  फागुन आ गया॥झुर्रियां  देखी जब चेहरे पर लगा बुढ़ापा आ गया।उम्र की सीमा को तोड़करउत्साही फागुन आ गया॥अहंकार का घना कोहराएकाकीपन  छा गया।अंधेरों को चीरकर लोउजला  फागुन आ गया॥पहरा गहरा था गम  काअवसाद  मन में छा गया।टूटे दिलों के तार

फागुन आ गया Read More »

बासंती फागुन

हिंदी कविता

⁠⁠⁠ बासंती फागुन ओ बसंत की चपल हवाओं,फागुन का सत्कार करो।शिथिल पड़े मानव मन मेंफुर्ती का  संचार करो।1बीत गयी है आज शरद ऋतु,फिर से गर्मी आयेगी.ऋतु परिवर्तन की यह आहट,सब के मन को भायेगी।2कमल-कमलिनी ताल-सरोवर,रंग अनूठे दिखलाते।गेंदा-गुलाब टेसू सब मिलकरइन्द्रधनुष से बन जाते।3लदकर मंजरियों से उपवन,छटा बिखेरें हैं अनुपम।पुष्पों से सम्मोहित भँवरें,छेड़ें वीणा सी सरगम।4अमराइयों

बासंती फागुन Read More »

हसरतों को गले से लगाते रहे

हिंदी कविता

हसरतों को गले से लगाते रहे हसरतों को गले से लगाते रहे,थोड़ा थोड़ा सही पास आते रहे..आप की बेबसी का पता है हमें,चुप रहे पर बहुत ज़ख़्म खाते रहे..इस ज़माने का दस्तूर सदियों से है,बेवजह लोग ऊँगली उठाते रहे..मेरी दीवानगी मेरी पहचान थी,आग अपने ही इसमें लगाते रहे..इश्क़ करना भी अब तो गुनह हो गया,हम

हसरतों को गले से लगाते रहे Read More »

कैसे जुगनू पकड़ूं?

हिंदी कविता

कैसे जुगनू पकड़ूं? पाँव महावर ,हाथों में मेहँदीकलाई में कँगना दिये सँवार ।माथे बिंदिया माँग में सिंदूरमंगलसूत्र गले दिया सँवार ।जननी पर भूल गयी बतानाघर गृहस्थी कैसे सँभालूबाली उमरिया लिखने पढ़नेखेलने की ,कैसे बिसरा दूँ ।मेहँदी रचे हाथों में कलछीकलम कैसे पकडूँगी अब ।पाँव सजे बिछिया महावरजूते मौजे कैसे पहनूँगी अब ।बेड़ी डाली कैसी तुमने

कैसे जुगनू पकड़ूं? Read More »

किस मंजिल की ओर ?

समाज और यथार्थ

किस मंजिल की ओर ? क्यारी सूख रही है निरंतर..आग जल रही हैं हर कहीं..घर हो या पास पडौ़स ..विश्वास की डोर नहीं है…टूट रही हैं नित ख्वाहिशेंनहीं  रहा है भाईचारा…प्रेम…स्नेह छूट गया है..कहीं दूर…अंतरिक्ष सदृश्य..वैमनस्य पलने लगा है नजरों में..अंधकार छा रहा है… बादल धुलते नहीं है… अबमन की कालिख…दिल की काल कोठरी मेंईर्ष्या

किस मंजिल की ओर ? Read More »

सिर पर है चुनाव

हिंदी कविता

सिर पर है चुनाव बीच बवंडर गोते खाती, फंस गई जैसे नाकुछ ऐसा माहौल बना है, सिर पर है चुनावउबड़ खाबड़ गड्ढे वाले, अब दिखते है गांवये अब तो मुद्दा है भैया, सिर पर है चुनावअपनी मांगे हमको तुम , झट से बतलावलगे हाथ झट पूरी होंगी,सिर पर है चुनावबरसों से है गांव अंधेरा, खम्भे

सिर पर है चुनाव Read More »

स्वयंसिद्धा

हिंदी कविता

स्वयंसिद्धा देहरी को लाँघने ,साहस सदा तुममें रहा,अधिकार के सत्कार मेंकर्तव्य की कारा बना,क्यूँ  प्रश्न वाचक तुम बनी,अवधारणा को तोड़खोल पाँखे खोलहै तू सदा से ही ,जगतनियन्ता ने बनायासृष्टि के आदि से,पुराण, वेद, उपनिषद्कालातीत से कालांतरगढ़ा है ,सुझाया,जन्म जन्मातर से होदेवी तुम,स्वयंसिद्धा। ✍✍✍✍✍✍✍✍डॉ मीता अग्रवाल रायपुर छत्तीसगढ़कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

स्वयंसिद्धा Read More »

गौरी पर दोहे

नारी जीवन और संवेदना

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं।शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है। “गौरी पर दोहे” 1.शंकर की अर्धान्गिनी, गौरी जी कहलाय  बैठी शिव के वाम में,

गौरी पर दोहे Read More »

बेटा-बेटी में भेद क्यों पर कविता

हिंदी कविता

बेटा-बेटी में भेद क्यों पर कविता सागर होते हैं बेटे, तो गंगा होती है बेटियांचांद होते हैं बेटे, तो चांदनी होती हैं बेटियांजग में दोनों ही अनमोल फिर भेद कैसा।।कमल होते बेटे,तो गुलाब होती हैं बेटियांपर्वत होते बेटे, तो चट्टान होती हैं बेटियांजग में दोनों ही अनमोल फिर भेद कैसा।।पेड़ होते हैं बेटे,तो धरा होती

बेटा-बेटी में भेद क्यों पर कविता Read More »

गौरैया पर कविता

हिंदी कविता

गौरैया पर कविता तू आई मेरे आँगन मेंअपने नन्हें बच्चे को लेकरफूदक फूदक खिला रही थीअपना चोंच, चोंच में देकरसजग सब खतरों सेताकती घुम घुम करनजाकत से चुगती दानाआहट पा उड़ जाती फुर्रदानों को खत्म होता देखमिट्ठी भर अनाज बिखराईडरकर क्यों तू चली गईजब मैंने सहृदयता दिखलाईप्यारी गौरैया तू सीखाती हैबच्चे को दुनिया की रीतसंभलकर

गौरैया पर कविता Read More »

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर दोहे

नारी जीवन और संवेदना

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर दोहे नारी से है सुख  मिला, नारी से सम्मान।बिन नारी घर घर नही, लगता है सुनसान ।।1 नारी को सम्मान दो, नारी मात समान ।नारी से घर स्वर्ग है, सब पर देती जान ।।2 बिन घरनी के घर नहीं, बिना पुरुष परिवार ।स्त्री पुरुष का साथ रहे, जीवन देत सवार ।।3

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर दोहे Read More »

Scroll to Top