कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

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शाकाहारी भोजन/ हरि प्रकाश गुप्ता

प्रकृति और पर्यावरण

शाकाहारी भोजन अपनाइए भोजन अपनी अपनी पसंद का सभी का होता है।कोई मांसाहारी तो कोई शाकाहारी होता है ।।कुछ कहते मांसाहारी अच्छा होता है।कोई शाकाहारी को अच्छा कहता है ।।अपनी अलग-अलग सोच पर सभी कुछ निर्भर करता है।कहते हैं और सुना जंगली जानवरमांसाहारी होते हैं।फिर इंसान शाकाहारी छोड़क्यों मांसाहारी होते हैं।।शाकाहारी भोजन कर जीव जंतु […]

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जीवन की नैया धीरे-धीरे खेना

हिंदी कविता

जीवन की नैया धीरे-धीरे खेना (छंद मुक्त रचना)“ओ खेवइया।जीवन की नैया,है बहुत ख़ूबसूरत,कमसिन है,भरी हुई है नज़ाकत से।देख,लहरें आ रहीं है दौड़कर,डुबोने को तत्पर।सम्हाल पतवार,ख़ीज लहरों की,तूफ़ान साथ ला सकती हैं।जीवन की नैया को,धीरे-धीरे खेना।रुकना नहीं ।पलटना नहीं।जो छुट गया ,जो मिल न सका,ग़म उसका नहीं करना।खेता जा।जो मिल जाए ,साथ ले आगे ही आगे

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हिन्दू जगे तो विश्व जगेगा RSS Geet

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हिन्दू जगे तो विश्व जगेगा हिन्दू जगे तो विश्व जगेगा, मानव का विश्वास जगेगा।भेदभावना तमस हटेगा, समरसता अमृत बरसेगा।हिन्दू जगेगा, विश्व जगेगा।।ध्रु.।। हर हिन्दू सदा से विश्व बन्धु है जड़ चेतन अपना माना है।मानव पशु तरु गिरि सरिता में एक ब्रह्म को पहिचाना है।जो चाहे जिस पथ से आये साधक केन्द्र बिन्दु पहुँचेगा।।1।। हिन्दू जगेगा……

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फिर क्या दूर किनारा

हिंदी कविता

फिर क्या दूर किनारा त्याग प्रेम के पथ पर चलकरमूल न कोई हारा।हिम्मत से पतवार सम्भालोफिर क्या दूर किनारा। हो जो नहीं अनुकूल हवा तोपरवा उसकी मत कर।मौजों से टकराता बढ़ चलउठ माँझी साहस धर।धुन्ध पड़े या आँधी आयेउमड़ पड़े जल धारा॥१॥ हाथ बढ़ा पतवार को पकड़ोखोल खेवय्या लंगर।मदद मल्लाहों की करता हैबाबा भोले संकर।जान

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हम जैसे चलते हैं तुम भी चलो ना

हिंदी कविता

हम जैसे चलते हैं , तुम भी चलो ना।हम जैसे रहते हैं , तुम भी रहो ना। । बहती हुई नदियां देखो , कल-कल बहती है ,कल-कल बहती है और , सागर में मिल जाती है। नदिया यह कहती है , तुम भी कहो ना ,हम जैसे बहते हैं , तुम भी बहो नाहम जैसे

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शरद पूर्णिमा पर कुंडलिया छंद

हिंदी कविता

शरद पूर्णिमा पर कुंडलिया छंद 1—- उज्ज्वल- उज्ज्वल है धरा,चंद्र -किरण बरसात । चाँद गगन से झाँकता ,रूप मनोहर गात।। रूप मनोहर गात ,रजत सम बहती धारा। लिए शरद सौगात ,चंद्र का रूप निखारा।। कहे सुधा सुन मीत , प्रीत है मन का प्राँजल।  सजे पुनों की रात ,धरा है उज्ज्वल उज्ज्वल।। 2— छम-छम बजती

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शाकाहारी भोजन / मधु वशिष्ठ

हिंदी कविता

शाकाहारी भोजन यह भोजन जो तुमने खाया है। क्यों किसी निरीह पशु को तड़पाया है? क्या उसके दर्द भी बढ़कर थी भूख तुम्हारी।जिव्ह्या का स्वाद क्या उसके जीवन से ज्यादा अनमोल था? उन्हें प्लेट में सजा कर खाते हुए क्या तुम्हें नहीं कोई क्षोभ था? माना इस खाने से तुम्हें पोषण तो मिलेगा?लेकिन क्या उन

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शाकाहार / पवन दाळू

हिंदी कविता

शाकाहार लेना हमेशा शाकाहारना करना मांसाहारपास न आये आजारयही हे बस उपहार शुद्ध पकवान सेमन भी स्वच्छ रहेक्रोध न ज्यादा आयेजो शाकाहार करें क्या खाये कब खायेयह न कोई समजायेकरें जो आदरतिथ्यतुम शाकाहार हि पथ्य कसम खाकर कुछ ऐसीआज से करुँगी शाकाहारकिसीकी बात न मानूंगीहात न लगाउ मांसाहार पवन दाळू, खामगाव, महाराष्ट्र

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शाकाहार / शुभा शुक्ला निशा

हिंदी कविता

शाकाहार सर्वोत्तम आहार शाकाहारी आहार ही है सर्वोत्तम आहार जो स्वस्थ रखता मानव तन और हटाए मन का भार कौली कौली हरी भरी लौकी और लंबा कांटेदार कड़वा करेलारस इनका हटाता मानव शरीर से रोगों का झमेला हरी हरी पालक खाओ और मेथी भाजी छौंकीमसाले में मिलकर बनती हमारी भाजी चोखी गाजर, टमाटर, सेव ,पपीता

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शाकाहार से वास्ता/ खेमू पाराशर

हिंदी कविता

शाकाहार से वास्ता स्वाद का नहीं सवाल स्वास्थ्य का है बवालशाकाहार देता मनुष्य को लंबा जीवन कालबनो सिर्फ शाकाहार के दलालखुशी से खाइए रोटी-दालबनेगा जिंदगी में एक खूबसूरत जाल मत बनो अब इतने अंग्रेजमांसाहार से करो परहेजशादी में दीजिए सिर्फ शाकाहार का दहेजशाकाहार से चमकता चेहरे पर तेजइस बात को रख लीजिए सहेज जिसने शाकाहार

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शाकाहार / वीना आडवाणी

हिंदी कविता

शाकाहार सर्वोत्तम शाक कंद मूल जब सृष्टि ने दियातो क्यों किसी को काट के खाएंश्रेष्ठ गुणों से भरे ये शाक कंद औषधियों के काम में भी आए।। शाकाहारी बन शाकाहार खा मानवसर्वोच्च श्रेणी मे तब तू आएप्रच्चुर मात्रा में शाक से खाकरशक्ति, रक्त शरीर का तेरा बढ़ जाए।। उठा पलट पढ़ इतिहास के पन्ने पहले

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