नव वर्ष का उत्सव !
हिंदी कविता*नव वर्ष का उत्सव !* मैंने नव वर्ष का उत्सवआज ये नही मनाया है……….!किसे मनाऊँ,किसे नहीकुछ समझ न आया है …..!! चाहे ये विक्रम संवत हो या जो ग्रेगोरियन रंगाया हैचाहे अपना शक संवत होया हिजरी ने जो नचाया है !..मैंने.. गर दिन खराब चल रहा तोदिन को दीन क्यों बताया है,जब अपना जेब गरम
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