दृश्य के उस पार / रमेश कुमार सोनी
समाज और यथार्थदृश्य के उस पार / रमेश कुमार सोनी उस एक दृश्य में उसकीआँख में मैंने गंभीर ख़ौफ़ देखाजिसे उन्होंने ही पाल-पोष कर बड़ा किया थाखून से इतनी मोहब्बत कीहुजूम चलती है उनके साथ लार टपकातेअहंकार से चूर इन्हें किसी से कोई मतलब नहीं। दूसरे दृश्य में करुणा है, लाचारी है किउसका कोई और मालिक हैमाली
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