स्वयं को देखना

हिंदी कविता

स्वयं को देखना खुद को जानने के लिएमैंने प्रश्न नहीं पूछे,मैंने अपने दिन देखे। घड़ी की सुइयों ने बतायामेरा समय कहाँ गिरता है,और रात ने बतायामेरा मन किसके पास भटकता है। मैंने अपने शब्द नहीं गिने,अपने कदम गिने—वे बार-बारउसी दिशा में जाते रहेजिसे मैं स्वीकार नहीं करता था। मैं बोला—मैं न्याय चाहता हूँ,मैं शांति चाहता

स्वयं को देखना Read More »

दिखावे का मन

हिंदी कविता

दिखावे का मन लोग आईने में नहीं,आँखों में खुद को देखते हैं—दूसरों की आँखों में। दुकान की रोशनी मेंशर्ट नहीं चुनी जाती,अपनी कीमत तौली जाती है—कहीं सस्ते न पड़ जाएँ हम। गला थोड़ा और खुला,जाँघ थोड़ी और ऊपर,कपड़ा नहीं,स्वीकृति पहनी जाती है। फिर वही मनरिश्तों की अलमारी खोलता है—देखो मेरा साथी,देखो मेरा प्रेम,देखो मेरा जीवन।

दिखावे का मन Read More »

“उनकी आँखों में नहीं”

हिंदी कविता

मैंउनकी आँखों में खोजा गया चेहरा नहीं हूँ,मैं वह साँस हूँजो बिना अनुमति के चलती है। जब दुनिया ने कहा—“तुम ऐसे हो”,मैंने मान लिया,और उसी क्षणअपने भीतर का सिंहासनउधार दे दिया। दूसरों की दृष्टिआईना बनी,और मैंअपने ही प्रतिबिंब काकैदी हो गया। डर तब पैदा हुआ,जब मेरे होने का प्रमाणकिसी और की स्वीकृति बन गया।जहाँ निर्भरता

“उनकी आँखों में नहीं” Read More »

कर्मकांड पे व्यंग्य: रैप सॉन्ग (सरल शब्दों में)

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

[Intro]पूजा-पाठ का मेला है,दिखावे का सब खेला है।गंगा में नहाया, पर मन में मैल,कर्मकांड में अटके, टोटल फैल। [Verse 1]सफेद कपड़ा, मन काला,धूप-बत्ती से क्या बदले लाला?पंडित बोले, “दान-दक्षिणा”,पाप से मुक्ति का ढोंग है साला। सुबह मंदिर, रात में ठेका,भक्ति कम, बस दिखावा फैला।मंत्र पढ़े, पर स्वार्थ छुपाए,भगवान से भी सौदा करवाए! [Hook]कर्मकांड, ओ कर्मकांड,भगवान

कर्मकांड पे व्यंग्य: रैप सॉन्ग (सरल शब्दों में) Read More »

माँ दंतेश्वरी के नाम ले, हिरदय म आस

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

मुखड़ा (Intro) छत्तीसगढ़ के भुइयां म बिखरे उजास,माँ दंतेश्वरी के नाम ले, हिरदय म आस।नाचे धरती, गाए अम्बर,नाचे धरती, गाए अम्बर,और ढोलक की थाप,गरबा संग खो जाए, जीवन संताप। अंतरा 1 (Verse 1) महुए की खुशबू संग, बहती बयार,नाचा के कदमों में, नवजीवन का संसार।तेज तलवारों वाली माँ की जयकार,हर दिल में हो विश्वास और

माँ दंतेश्वरी के नाम ले, हिरदय म आस Read More »

नान्हें कहिनी- टुरी खोजइ

हिंदी कविता

नान्हें कहिनी- टुरी खोजइ “बड़े बिहनिया जाड़ बतास के दिन म कहां जावत हो जी? हाड़ा गोड़ा ठंडा परत हे इहा।” मंगलू किहिस।             “टुरी खोजइ चलत हे कका।चल ना आज कहूं डाहर तही ह लेग।” समारू कहिस। मंगलू कथे चल ना त लेगत हँव। अइसे कहिके समारू अउ मंगलू

नान्हें कहिनी- टुरी खोजइ Read More »

यह रासायनिक अस्तित्व

मन और भावनाएँ

यह रासायनिक अस्तित्व एक शब्दकान से टकराता है—औरपूरा शरीरउथल-पुथल में आ जाता है। एक शब्द,औरतापमान बढ़ जाता है।हृदय तेज़ हो जाता है।श्वास बदल जाती है। यह क्या है? यदिरासायनिक प्रतिक्रिया नहीं,तोऔर क्या है? यह देहरसायनों का ढेर है। इसमेंरासायनिक विचार उठते हैं।रासायनिक भाव बहते हैं।रासायनिक इच्छाएँआकर्षित करती हैं।रासायनिक भयसिकोड़ते हैं।रासायनिक महत्वाकांक्षाएँदौड़ाती हैं।रासायनिक प्रेमआसक्ति बन जाता

यह रासायनिक अस्तित्व Read More »

अधूरे वादों का ढेर

हिंदी कविता

अधूरे वादों का ढेर मन मेंजो कुछ भी आता है,एक वादा लेकर आता है। वादा यही होता है—मैं तुम्हें शांति दूँगा। यदि यह वादा न हो,तोवह वस्तु,वह विचार,वह व्यक्तिमन के द्वार तकपहुंच ही नहीं पाता। मन का नियमबहुत स्पष्ट है—जो शांति काआश्वासन नहीं देता,वह भीतरठहर नहीं सकता। इसलिएमन में जो भी है,वहशांति के वादे के

अधूरे वादों का ढेर Read More »

तैयार होने से पहले कूदो

मन और भावनाएँ

तैयार होने से पहले कूदो ताक़तकोई जमा पूँजी नहीं है।वहप्रतिक्रिया है। अधिकांश लोगएक अजीब विश्वास मेंघुटते रहते हैं—कि हम कमज़ोर हैं,असमर्थ हैं,शायद बेकार भी। हम बहुत सी बातों मेंसंदेह करते हैं,पर एक बात मेंअद्भुत रूप सेनिश्चित होते हैं—मेरे पासइतनी शक्ति नहीं है। और इस विश्वास के पक्ष मेंहमारे पासतर्क हैं,स्मृतियाँ हैं,अनुभवों काएक पहाड़ है—जो इसधीमे

तैयार होने से पहले कूदो Read More »

भीतर का प्राचीन युद्ध

हिंदी कविता

भीतर का प्राचीन युद्ध तुम अकेले जन्मे नहीं हो।तुम देह सेजुड़े हुए आए हो—जैसे दो अस्तित्वएक ही गांठ में बँधे हों। आना साथ हुआ,पररास्ता हमेशासाथ नहीं चल सकता। चेतनामुक्ति चाहती है।देहदोहराव मेंसुरक्षा खोजती है। चेतनाउड़ना चाहती है।देहफिर उसी गुफा मेंलौट जाना चाहती है। और फिर भीदोनों कोसाथ रहना है। चेतना बिना देहअभिव्यक्ति नहीं पा सकती।देह

भीतर का प्राचीन युद्ध Read More »

उद्धार की प्रतीक्षा बंद करो

हिंदी कविता

उद्धार की प्रतीक्षा बंद करो जिस काम कोतुम्हेंखुद के लिएकरना था,उसे टाल दिया—और अबकिसी और सेउसी कमी कीभरपाई चाहते हो। स्पष्टता,समृद्धि,और जीवन मेंअर्थ लाने कीमूल जिम्मेदारीकेवलतुम्हारी है। कोई औरइसके लिएजन्मा नहीं है। हाँ,कोई चाहे तोसहयोग दे सकता है—स्वेच्छा से।परयह उसका कर्तव्य नहीं। औरयदि वहतुम्हारी अपेक्षाएँन उठाए,तोतुम्हेंठगा हुआमहसूस करने काकोई अधिकार नहीं। सच सरल है—तुम्हारा जीवन,तुम्हारी

उद्धार की प्रतीक्षा बंद करो Read More »

पिंजरा बाहर नहीं था

हिंदी कविता

पिंजरा बाहर नहीं था तुम पक्षी हो।उड़ना तुम्हारा स्वभाव है।उड़ना सीखना नहीं पड़ता—सिर्फ़मुक्त होना पड़ता है। फिर भीहम अजीब हैं। हमदरवाज़ा खोलने के बजायपिंजरे के भीतरपंख फड़फड़ाने काअभ्यास कराते हैं।और उसेआध्यात्मिक साधनाकह देते हैं। यह किसे धोखा देना है? पक्षी कोकिसी प्रशिक्षण कीज़रूरत नहीं।उसे चाहिए—आकाश।खुली जगह। ठीक वैसे हीतुम्हेंकुछ हासिल नहीं करना है।तुम्हेंसिर्फ़जो झूठ हैउसे

पिंजरा बाहर नहीं था Read More »

Scroll to Top