स्वयं को देखना
हिंदी कवितास्वयं को देखना खुद को जानने के लिएमैंने प्रश्न नहीं पूछे,मैंने अपने दिन देखे। घड़ी की सुइयों ने बतायामेरा समय कहाँ गिरता है,और रात ने बतायामेरा मन किसके पास भटकता है। मैंने अपने शब्द नहीं गिने,अपने कदम गिने—वे बार-बारउसी दिशा में जाते रहेजिसे मैं स्वीकार नहीं करता था। मैं बोला—मैं न्याय चाहता हूँ,मैं शांति चाहता
