कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

morning

प्रात: वन्दन – हरीश बिष्ठ शतदल

हिंदी कविता

प्रात: वन्दन करे अमंगल को मंगल, पवनपुत्र हनुमान |सम्मुख उनके आने से , डरें सभी शैतान || हृदय बसे सिया-राम जी, श्रद्धा-भक्ति अपार |शिवजी के बजरंगबली , जग में रूद्र अवतार || संकट सारे भक्तों के , पल में देते टार |भजे सिया अरु राम संग़, यह सारा संसार || भक्तों में सर्वश्रेष्ठ हैं , […]

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वीर जवानों तुझे सलाम – बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

वीर जवानों तुझे सलाम आन – बान और शान देश की नही रुकने देते।वन्दे मातरम गान तिरंगा झंडा़ नहीं झुकने देते ।देश हित में फूलते-फरते करते सदा देशका नाम।देशकी खातीर जीते मरते वीर जवानों तुझेसलाम। बुरे नियत वालों को नाकों चना चबवा देते।दुश्मनों को धूल चटा छण भर में छक्का छुडा़ देते। राष्ट्र रोग को

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शिक्षक की अभिलाषा – अखिल खान

समाज और यथार्थ

5 अक्टूबर 1994 को यूनेस्को ने घोषणा की थी कि हमारे जीवन में शिक्षकों के योगदान का जश्न मनाने और सम्मान करने के लिए इस दिन को विश्व शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाएगा। डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र

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गुरु ज्ञान का सागर -रुपेश कुमार

हिंदी कविता

गुरु ज्ञान का सागर जीवन की सबसे पहले गुरु ,माता पिता होते है ,जीवन में गुरु का नाम ,सबसे ऊंचा होता है ,गुरु जीवन में मेरे ,साइकिल के पहिए जैसा होते है ,गुरु ज्ञान का सागर ,गुरु महासागर होते है ! गुरु बिन ज्ञान हमें नहीं ,कभी नहीं है मिलता ,गुरु बिन जीवन की कल्पना

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स्वच्छता अभियान चाहिए

प्रकृति और पर्यावरण

स्वच्छता अभियान चाहिए दया-धर्म करुणामय पावनअधरोंपर मुस्कान चाहिए।अनमोल मानव जीवनमें स्वच्छता अभियान चाहिए। परमार्थ परहित पुरुषार्थ क्षमा शीलता दान चाहिए।स्वच्छता से नेक कमाई भोजन वस्त्र मकान चाहिए। देशधर्म सत्कर्म सुपावन प्रगतिपथ कल्यान चाहिए।नेकी भलाई पुण्य में भी स्वच्छता अभियान चाहिए। बन्धुत्व एकत्व समत्व का निज अंतः में भान चाहिए।हरि दिखे हर-हर में हरदम ऐसा सुमिरन

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दीपक सा जलता गुरू

हिंदी कविता

दीपक सा जलता गुरू दीपक सा जलता गुरू,सबके हित जग जान।गुरू से हीं पाते सभी, सरस विद्या गुण ज्ञान।। जग में गुरु सिरमौर है,तम गम हरे गुमान।भर आलोक जन-मन सदा ,देते है मुस्कान।। निर्झर सा निर्मल गुरू ,मन का होता साफ।शुचिता का छोड़े सदा ,सभी के उपर छाप।। महिमाअनूठा गुरु की,अग-जग सदा महान।चरणों में गुरू

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शाला और शिक्षक को समर्पित कविता

समाज और यथार्थ

डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र के राष्ट्रपति बने। उनका जन्म दिवस ही शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। “शिक्षक दिवस मनाने का यही उद्देश्य है कि कृतज्ञ राष्ट्र अपने शिक्षक राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन के प्रति अपनी असीम श्रद्धा

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morning

प्रातः वंदना संग्रह

हिंदी कविता

हरिश बिष्ट का प्रातः वंदना हे बजरंगी तेरे द्वारे |हाथ जोड़ सब भक्त पुकारे ||दुष्टों को तुम मार भगाते |भक्त जनों को पार लगाते || सेवा-भाव से सदा समर्पित |प्रभु चरणों में जीवन अर्पित ||भक्ति आपसे सीखे कोई |आप जगाऍं किस्मत सोई || चौपाई छंद मातु-भवानी जय जगदम्बे |विनती सुन लो हे माँ अम्बे ||सुनती

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doha sangrah

मंगल मूर्ति गजानना गणेश पर दोहे

हिंदी कविता

गणपति को विघ्ननाशक, बुद्धिदाता माना जाता है। कोई भी कार्य ठीक ढंग से सम्पन्न करने के लिए उसके प्रारम्भ में गणपति का पूजन किया जाता है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन “गणेश चतुर्थी” के नाम से जाना जाता हैं। इसे “विनायक चतुर्थी” भी कहते हैं । महाराष्ट्र में यह उत्सव सर्वाधिक

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doha sangrah

बदलते रिश्ते पर दोहा

हिंदी कविता

बदलते रिश्ते दिन-दिन होता जा रहा,रिश्तों में बदलाव।प्यार रोज ही घट रहा ,दिखता हृदय दुराव।। नही लिहाज न शर्म है ,पिता पुत्र के बीच।माँ बेटी सम्बन्ध भी , निभे मुट्ठियाँ भींच।। पती- पत्नी सम्बन्ध भी ,रहते डाँवाडोल।आँखों में आँसू सदा , कहे कहानी बोल।। सास-बहू सम्बन्ध तो ,दो जोड़ो की सौत।छल कपट बस चाह रहे,इक

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सनातन धर्म पर कविता

हिंदी कविता

सनातन धर्म पर कविता देश को देखकर आगे बढ़े सनातनधर्म हिन्दी भारतवर्ष महानके लिये।देश को देखकर आगे बढ़े उत्थान के लिये। स्वदेश की रक्षा में जन-जन रहे तत्पर।सदभाव विश्वबंधुत्व का हो भाव परस्पर।काम क्रोध मोह लोभ मिटे दम्भ व मत्सर।रहे सब कोई एकत्व समता में अग्रशर।उद्धत रहे पल-पल प्रभु गुणगान के लिये।देश को देखकर आगे

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गणेश- मनहरण घनाक्षरी

हिंदी कविता

गणेश- मनहरण घनाक्षरी ब्रह्म सृष्टिकार दैव,भूमि रचि हेतु जैव,मातृभूमि भार पूर्ण,धारे नाग शेष है। शीश काटे पुत्र का वे,क्रोध मिटे हुआ ज्ञान,हस्ति शीश रोपे शिव,दैवीय निवेश हैं। पार्वती सनेह जान,दिए शम्भु वरदान,पूज्य गेह गेह नेह,देवता गणेश हैं। विष्णु शम्भु देव अज,भूप लोक दम्भ तज,पूजते गणेश को ही,स्वर्ग के सुरेश हैं।. —-+—बाबू लाल शर्मा, बौहरा, विज्ञसिकन्दरा,

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