लगी आग सरहद पर,कैसे राग बसंती गाऊँ मैं
हिंदी कवितासीमा रक्षा करते,उनको झुककर शीश नवाऊँ। लगी आग सरहद पर,कैसे राग बसंती गाऊँ। जान हथेली पर रख, सैनिक सीमा पर डटे हुए। मातृ भूमि रक्षा में,वो सब अपनों से दूर हुए।। मेरी भी इच्छा है,दुश्मन से मैं भी लड़ जाऊँ। लगी आग सरहद पर,कैसे राग बसंती गाऊँ।। फड़के आज भुजाए, नहीं बसंती रंग सुहाता। मां
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