कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

गगन उपाध्याय नैना की रचनाएँ

हिंदी कविता

गगन उपाध्याय नैना की रचनाएँ : यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। माँ वर्णन जो गाये लिखते लिखते मेरी लेखनी                अकस्मात रूक जायें।कोई शब्द नहीं […]

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चोका कैसे लिखें (How to write Choka )

हिंदी कविता

चोका कैसे लिखें शिल्प की दृष्टि से चोका की पंक्तियों में क्रमशः 5 और 7 वर्णों की आवृत्ति होती है तथा अंतिम पाँच पंक्तियों में 5,7,5,7,7 वर्णक्रम अर्थात एक ताँका के क्रम से कविता पूर्ण होती है । कविता की लंबाई की सीमा रचनाकार की भाव पूर्णता पर निर्भर  रहती है  । या यूँ कहें

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हाइकु कैसे लिखें (How to write haiku)

हिंदी कविता

हाइकु कैसे लिखें “हाइकु” एक ऐसी सम्पूर्ण लघु कविता है जो पाठक के मर्म या मस्तिष्क को तीक्ष्णता से स्पर्श करते हुए झकझोरने की सामर्थ्य रखता है । हिन्दी काव्य क्षेत्र में यह विधा अब कोई अपरिचित विधा नहीं है । विश्व की सबसे छोटी और चर्चित विधा “हाइकु” 05,07,05 वर्ण क्रम की त्रिपदी लघु

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पद्ममुख पंडा महापल्ली के 10 हिंदी कवितायेँ

देशभक्ति

पुरातन काल में गुरू के प्रति शिष्य की जो प्रगाढ़ भक्ति भावना थी, वह अब कहीं भी देखने को नहीं मिलता है।

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आज के समय की पुकार पर कविता

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

आज के समय की पुकार पर कविता आओ हम सब एक बनें छोड़ बुराई नेक बनें।जन-जनअपनाकरे सुधार आज समय की यही पुकार।दहेज दानव का नाम मिटायें जलती बहु बेटी बचायेंगे।जागरूक हो जतन करें निज डोली नहीं लुटेरे कहार। सब कोई सोचे समझे सुने भ्रष्ट नेता कदापि न चुने।भ्रष्ट नेताओं के कारण ही देश में बढता

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स्वामी विवेकानंद

यौवन पर हिन्दी कविता ( युवा दिवस विशेष )

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

यौवन पर हिन्दी कविता यौवन तो ढलता सदा , मान यही है सार ।लौट नहीं आता कभी , बीते पल जो चार ।।बीते पल जो चार , कर्म सत करिए प्यारे ।वृद्धावस्था रोग , सताए हिम्मत हारे ।।नियति कहे कर जोड़, पुष्ट होता है तन-मन ।इसी उम्र में साध , सफल होगा फिर यौवन ।।

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शोकहर/सुभांगी छंद में कविता

हिंदी कविता

शोकहर/सुभांगी छंद में कविता ~ *शोकहर/सुभांगी छंद* ~ *विधान- 8,8,8,6* *तुकांत- पहली दूसरी यति अंत तुकांत* *चरण- चार चरण सम तुकांत* नंद दुलारे जन जन प्यारे, हे गोपाला, ध्यान धरो। हे कमलनयन हे मनमोहन नाथ द्वारिका कृपा करो। अजया अच्युत अनया अदभुत लाल यशोदा कष्ट हरो। हे ज्ञानेश्वर हे मुरलीधर पार्थसारथी राह वरो। हेआदिदेव देवाधिदेव

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सागर पर हिंदी कविता – सुकमोती चौहान रुचि

हिंदी कविता

सागर पर हिंदी कविता सागर गहरा ज्ञान सा, बड़ा वृहद आकार |कौन भला नापे इसे, डूबा ले संसार |डूबा ले संसार, नहीं सीमा है कोई |कहलाये रत्नेश, यही कंचन की लोई |कहती रुचि यह बात , यही मस्ती का आगर |अनुपम दे आनंद,देख लो गहरा सागर || सागर तट पर बैठकर ,लहरें गिनकर आज |भाव

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किसे पता है कल क्या होगा – बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

किसे पता है कल क्या होगा निज स्वार्थ में बल क्या होगा?कभी किसीका भल क्या होगा?वर्तमान का सदुपयोग कर- आज नहीं तो कल क्या होगा? एकता बिन मनोबल क्या होगा?साहस बिन सम्बल क्या होगा?पीर पराई बिन दुनीयां में-सोचो अश्रु जल क्या होगा? प्यार बिना पल-पल क्या होगा?शान्ति सुख अचल क्या होगा?पल में परलय- लय सब

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मातृ दिवस पर हिंदी कविता (Martee Divas Par Kavita )

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

मातृ दिवस पर हिंदी कविता (Martee Divas Par Kavita) : मातृपितृ पूजा दिवस भारत देश त्योहारों का देश है भारत में गणेश उत्सव, होली, दिवाली, दशहरा, जन्माष्टमी, नवदुर्गा त्योहार मनाये जाते हैं। कुछ वर्षों पूर्व मातृ पितृ पूजा दिवस प्रकाश में आया। आज यह 14 फरवरी को देश विदेश में मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में रमन सरकार द्वारा

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कृष्ण कन्हैया – डॉ एन के सेठी

हिंदी कविता

कृष्ण कन्हैया आए हैं कृष्ण कन्हैयाहर्षित हैं बाबा मैयाधूम मची चहुँ ओरखुशियां मनाइए।। आए है तारणहारहोगा दुर्जन संहारस्वागत करें मिलकेघर में बुलाइए।। बादल बरस रहेकालिंदी भी खूब बहेआए हैं दुख मिटानेगुणगान गाइए।। हुई ब्रजभूमि धन्यउनसा न कोई अन्यसौम्य सुंदर रूप कोहिय में बसाइये।। नंद के दुलारे हैंजन जन के प्यारे हैंमुरलीधर गोपालादरस दिखाइए।। सूरत है

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goverdhan shri krishna

जन्माष्टमी पर दोहे -मदन सिंह शेखावत

हिंदी कविता

जन्माष्टमी पर दोहे भादौ मास अष्ठम तिथि , प्रकटे कृष्ण मुरार।प्रहरी सब अचेत हुए , जेल गये खुल द्वार।।1 जमुना जी उफान करे, पैर छुआ कर शान्त।वासुदेव धर टोकरी , नन्द राज के कान्त।।2 कंस बङा व्याकुल हुआ,ढूढे अष्ठम बाल।नगर गांव सब ढूंढकर ,मारे अनेक लाल।।3 मधुर मुरलिया जब बजी,रीझ गये सब ग्वाल।नट नागर नटखट

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