आम जन की हालात पर कविता – विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

खप-खप मरता आमजन खप-खप मरता आमजन, मौज उड़ाते सेठ।शीतकाल में ठिठुरता, बहे पसीना जेठ।। खून-पसीना बह रहा, कर्मठ करता कार।परजीवी का ही चला, लाखों का व्यापार।। कमा-कमा कर रह गया, मजदूरों का हाथ।पूंजी ने फिर भी किया, सेठों का ही साथ।। अंधी चक्की पीसती, कुत्ता चाटे चून।कर्मठ तेरी कार से, सेठ कमाते दून।। नहर सड़क

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शिव जी पर कविता – हरीश बिष्ट

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शिव जी पर कविता शिवशंकर के चरणों में सब, नित-नित शीश नवाते हैं |नीलकंठ भोलेबाबा की, प्रतिपल महिमा गाते हैं ||दूध-नीर अरु बेलपत्र सब, शिव के शीश चढाते हैं |महादेव,गणनाथ, स्वरमयी, सेवा भाव जगाते हैं ||भक्तों की भक्ती से खुश हो, उनको पार लगाते हैं |कामारी, सुरसूदन जग में, सबके भाग जगाते हैं ||देव-दनुज, जन,

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निर्धन पर अत्याचार – उपमेंद्र सक्सेना

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आज यहाँ निर्धन का भोजन, छीन रहा धनवान हैहड़प रहा क्यों राशन उनका, यह कैसा इंसान है। हमने देखा नंगे भूखे, राशन कार्ड बिना रहते हैंहाय व्यवस्था की कमजोरी, जिसको बेचारे सहते हैंजिसने उनका मुँह खोला है, वह खुद उनका पेट भरेगाअनुचित लाभ उठाने वालों, न्याय स्वयं भगवान करेगा जो सक्षम है आज किसलिए, करता

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होबै ब्याहु करौ तइयारी – उपमेंद्र सक्सेना

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होबै ब्याहु करौ तइयारी चलिऔ संग हमारे तुमुअउ, गौंतर खूब मिलैगी भारीराम कली के बड़े लला को, होबै ब्याहु करौ तइयारी। माँगन भात गई मइके बा, लेकिन नाय भतीजी मानीबोली मौको बहू बनाबौ, नाय करौ कछु आनाकानीजइसे -तइसे पिंड छुड़ाओ, खूबै भई हुँअन पै ख्वारीराम कली के बड़े लला को, होबै ब्याहु करौ तइयारी। पहिना

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मंजिल पर कविता – सृष्टि मिश्रा

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मंजिल पर कविता राही तू आगे बढ़ता चल, देखो मंजिल दूर नहीं है।मेहनत कर आगे बढ़ता चल, देखो वो तेरे पास खड़ी है।। सच्चाई के ताकत के बल पर,अपने सपनों को पूरा कर।दिखा दे अपने जज्बे को तू,मातृभुमि की रक्षा कर।।राही तू आगे बढ़ता चल, देखो मंजिल दूर नहीं है। मत सह जुल्म और अत्याचारों

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स्वाभिमान पर कविता

हिंदी कविता

स्वाभिमान पर कविता जब शब्द अधरों से परे हुए और कोरे कागज काले कर जायें तो जब अंधेरा ही अंधेरा हो और एक चिंगारी जल जाए तो जब हार गए और टूट गए बिखरे फिर भी रूके नहीं स्वाभिमान फिर भी मरा नहीं गिरे मगर झुके नहीं।। तूफानों का मंजर था सामने दुश्मन लिए खंजर

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माँ शारदे की कृपा

हिंदी कविता

माँ शारदे की कृपा अज्ञानता का नाश हो ज्ञान का दीप जले माँ शारदे की कृपा हो जाए सफलता तब गले मिले। निकाल लाता ज्ञान के मोती उच्च हो जाती ज्ञान की ज्योति माँ शारदे की कृपा जो होती अब तक अज्ञानता में पले। ज्ञान का कमल खिलता अज्ञानता के सरोबर में मेहनत से कर

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मन की अभिलाषा

हिंदी कविता

मन की अभिलाषा वेदना का हो अंत फिर आए जीवन में बसंत मन की प्रसन्नता हो अनंत दुःख का पूर्णविराम हो मन में न कोहराम हो। आस का पंक्षी सहन पाए उड़ने को पूरा गगन पाए दुविधा में न क्षण लुटाए मन का मधूर सुर तान हो मन में न कोहराम हो। संघर्ष का मार्ग

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नवोदय क्रांति परिवार प्रेरणा गीत

प्रेरणा और सकारात्मकता, हिंदी कविता

जन जन को जगाएंगे।नवोदय क्रांति लाएंगे।आओ शिक्षक, प्यारे शिक्षक,हम सब मिलकर शिक्षा में नई क्रांति लाएंगे।जन जन को जगाएंगे।नवोदय क्रांति लाएंगे। पालक,अभिभावक,जनप्रतिनिधि मिलकर शालाको रंगीन बनाएंगे।जन जन को जगाएंगे।नवोदय क्रांति लाएंगे। राष्ट्रिय शिक्षक संचेतना लाएंगे।कश्मीर से कन्याकुमारी तकशिक्षा का अलख जगाएंगे।हर शाला को डिजिटल बनाएंगे।जन जन को जगाएंगे।नवोदय क्रांति लाएंगे। हम हैं शिक्षक, शिक्षा की

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जब विपदा आ जाए सम्मुख – उपमेंद्र सक्सेना

हिंदी कविता

जब विपदा आ जाए सम्मुख जिसका साथ निभातीं परियाँ, मनचाहा सुख पाता हैजब विपदा आ जाए सम्मुख, कोई नहीं बचाता है। क्या है उचित और क्या अनुचित, बनी न इसकी परिभाषादुविधा में जो फँसा कभी भी, टूटी उसकी अभिलाषाजिसका मन हो लगा गधी में, वह उसको अपनाता हैजब विपदा आ जाए सम्मुख, कोई नहीं बचाता

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नया अब साल है आया – उपमेंद्र सक्सेना

हिंदी कविता

नया अब साल है आया नया अब साल है आया, रहे इंसानियत कायममुहब्बत के चिरागाँ इसलिए हमने जलाए हैं। सुकूने बेकराँ मिलती, अगर पुरशिस यहाँ पे होन हो वारफ़्तगी कोई, दिले मुज्तर कहीं क्यों होनवीदे सरबुलंदी से, जुड़ें सब ये तमन्ना हैसरे आज़ार के पिन्दार को कुदरत यहाँ दे धो अमीरों के घरों में खूब

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पीर दिलों की मिटायें

हिंदी कविता

पीर दिलों की मिटायें पीर दिलों की मिटायें, चलो एक ऐसा नया जहां बसायेंपीर दिलों की मिटायें, चलो एक ऐसा नया जहां बसायें lपलती हों जहां खुशियाँ, चलो एक ऐसा आशियाँ सजाएँ ll हर एक चहरे पर हो मुस्कान, ना हो ग़मों का कोई निशान lफेहरे जहां संस्कृति, संस्कारों का परचम, चलो एक ऐसा उपवन

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