कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

हो नहीं सकती – बाबुराम सिंह

हिंदी कविता

हो नहीं सकती शुचिता सच्चाई से बड़ा कोई तप नहीं दूजा,सत्संग बिना मन की सफाई हो नहीं सकती। नर जीवन जबतक पुरा निःस्वार्थ नहीं बनता,तबतक सही किसीकी भलाई हो नहीं सकती। अन्दर से जाग भाग सदा पाप दुराचार से,सदज्ञान बिन पुण्यकी कमाई हो नहीं सकती। काम -कौल में फँसकर ना कृपण बनो कभी,सदा दान बिन […]

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सर्द हवाएँ – सुकमोती चौहान रुचि

हिंदी कविता

सर्द हवाएँ – सुकमोती चौहान रुचि सर्द हवाएँ हृदय समाये, तन मन महका जाये |आ कानों में कुछ कहती है, मधुरिम भाव जगाये | हमको तुम कल शाम मिले थे, पसरी थी खामोशी |भाव अनेकों उमड़ पड़े थे, लब पर थी मदहोशी ||शांत सुखद मौसम लगता है, मन ये शोर मचाये |सर्द हवाएँ हृदय समाये,

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कुम्हार को समर्पित कविता -निहाल सिंह

हिंदी कविता

कुम्हार को समर्पित कविता -निहाल सिंह फूस की झोपड़ी तले बैठकर।चाक को घुमाता है वो दिनभर। खुदरे हुए हाथों से गुंदकेमाटी के वो बनाता है मटकेतड़के कलेवा करने के बादलगा रहता है वो फिर दिन- रातस्वयं धूॅंप में नित प्रति दिन जलकरचाक को घुमाता है वो दिनभर | ऑंखों की ज्योति धुॅंधली पड़ गईचश्मे की

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हलषष्ठी पर हिंदी कविता – नीरामणी श्रीवास नियति

हिंदी कविता

हलषष्ठी पर हिंदी कविता आयी हलषष्ठी शुभम , माँ का यह व्रत खास ।अपने बच्चों के लिए , रखती है उपवास ।।रखती है उपवास , करे सगरी की पूजा ।बिना चले हल भोज्य , नहीं करते है दूजा ।।नियति कहे कर जोड़ , हृदय व्रत कर हर्षायी ।कथा सुनेंगे आज , मातु हल षष्ठी आयी

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चिकित्सक/ डाक्टर दिवस पर हिंदी कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता,

चिकित्सक/ डाक्टर दिवस पर हिंदी कविता चिकित्सक हिय में सेवा भावना, नहीं किसी से बैर।स्वास्थ्य सभी का ठीक हो, त्याग दिए सुख सैर।।नित्य चिकित्सक कर्म रत, करे नहीं आराम।लड़ते अंतिम श्वांस तक,चाहे सबकी खैर।। कठिन परीक्षा पास कर, बने चिकित्सक देख।धरती के भगवान है, बदले किस्मत रेख।।आओ हम सम्मान दे, उनको मिलकर आज।उठा शुभम कर लेखनी,

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doha sangrah

मित्रता पर दोहे – गोपाल ‘सौम्य सरल

हिंदी कविता

यहां पर *गोपाल ‘सौम्य सरल’‌ द्वारा रचित सच्ची मित्रता को समर्पित एक रचना प्रस्तुत है।

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Rakshabandhan

रक्षाबन्धन पर दोहे – बाबूलाल शर्मा, बौहरा

मन और भावनाएँ

रक्षा बन्धन एक महत्वपूर्ण पर्व है। श्रावण पूर्णिमा के दिन बहनें अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधती हैं। यह ‘रक्षासूत्र’ मात्र धागे का एक टुकड़ा नहीं होता है, बल्कि इसकी महिमा अपरम्पार होती है। कहा जाता है कि एक बार युधिष्ठिर ने सांसारिक संकटों से मुक्ति के लिये भगवान कृष्ण से उपाय पूछा तो कृष्ण

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सृष्टि कुमारी की कवितायेँ

समाज और यथार्थ

सृष्टि कुमारी की कवितायेँ आज की नारी मैं आज की नारी हूं, इतिहास रचाने वाली हूं,पढ़ जिसे गर्व महसूस करे वो इतिहास बनाने वाली हूं।नारी हूं आज की, खुले आसमान में उड़ना चाहती हूं मैं,बांध अपने जिम्मेदारियों का जुड़ा, अपने सपनों को पूरा करना चाहती हूं मैं।अब अपने जुल्मों का शिकार नहीं बना सकता कोई

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आगे आगे तीजा तिहार आगे – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

आगे आगे तीजा तिहार आगे – मनीभाई नवरत्न ऐ दीदी ओ,  ऐ बहिनी ओ।आगे आगे तीजा तिहार आगे।। सावन भादों सुख के देवय्या।झमाझम बादर चले पुरवय्या।।डारा पाना ह सबो हरियागे।आगे आगे तीजा तिहार आगे।। झूलेना बने हे  सुग्घर पटनी।धरे रहव जी दवरा के गठनी।ठेठरी खुरमी अउ खारा कटनी।भजिया सुहाथे लहसून के चटनी।नोनी बाबू ऐदे खाये

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doha sangrah

बछ बारस पर कविता – दोहा छंद

हिंदी कविता

बछ बारस पर कविता – दोहा छंद बछ बारस सम्मानिए, गौ बछड़े की मात।मिटे पाप संताप तन, दैव प्रमाणित बात।। पावस सावन में मनें, बछ बारस का पर्व।गौ सेवा कर नर मिले, मेवा मंगल गर्व।। भिगो मोठ को लीजिए, उत्तम यह आहार।गौ को मीठे में खिला, बछ बारस व्यवहार।। गौ माताएँ हिन्द हित, बछ सौभाग्य

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