हो नहीं सकती – बाबुराम सिंह
हिंदी कविताहो नहीं सकती शुचिता सच्चाई से बड़ा कोई तप नहीं दूजा,सत्संग बिना मन की सफाई हो नहीं सकती। नर जीवन जबतक पुरा निःस्वार्थ नहीं बनता,तबतक सही किसीकी भलाई हो नहीं सकती। अन्दर से जाग भाग सदा पाप दुराचार से,सदज्ञान बिन पुण्यकी कमाई हो नहीं सकती। काम -कौल में फँसकर ना कृपण बनो कभी,सदा दान बिन […]
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