रंग इन्द्रधनुष
हिंदी कवितारंग इन्द्रधनुष ….. धरती का हरापन सदा से बुलाते रहे मुझेमैं उसके आँचल में दूब बनकर पसर गया ,नीला विस्तृत आकाश हुर्र बुलाता रहा मुझेमैं उसमें घुसकर नीलकंठ हो गया ,मैं उनकी गली के गुलाबी रंग बीचप्रेम प्याला पीकर महक गया ;युवा बसंत को सजाते हुए कभीकाँपे नहीं मेरे हाथ लेकिनअपनी बेटी को विदा करते

