कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

रोटी पर कविता- विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

रोटी पर कविता- विनोद सिल्ला रोटी तू भी गजब है, कर दे काला चाम।देश छोड़ के हैं गए, छूटे आँगन धाम।। रोटी तूने कर दिए, घर से बेघर लोग।रोटी ही ईलाज है, रोटी ही है रोग।। रोटी तेरे ही लिए, बेलें पापड़ रोज।मोहताज तेरे सभी , तेरी ही नित खोज।। रोटी सबसे है बड़ी, इससे […]

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कारगिल के शहीदों को नमन करते हुए कविता

नारी जीवन और संवेदना

कारगिल के शहीदों को नमन करते हुए कविता वतन के हिफाजत के लिए त्याग दिये अपने प्राण। तुमनें आह तक नहीं किये त्यागते समय अपने प्राण।। सीने में गोली खा के हो गये देश के लिए शहीद। मुख में था मुस्कान गोली खा के भी बोले जय हिंद।। मेरे वतन के जांबाज सिपाहियों तुमको शत्

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नये तराने – माधुरी मुस्कान ग़ज़ल

हिंदी कविता

नये तराने – माधुरी मुस्कान ग़ज़ल करीब आओ न दूर जाओ मुझे गले से सनम लगा लो।न जी सकेंगे न मर सकेंगे जहाँ भी हो तुम हमे बुला लो ।। अभी अभी तो बहार देखी नये तराने मचल रहे हैंअभी उजालों ने आँख खोली चलो न खुशियों को भी मना लो । मुझे नज़र से

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mahatma gandhi

अहिंसा दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

अहिंसा दिवस पर कविता: अंतर्राष्ट्रीय अंहिसा दिवस महात्मा गांधी के जन्मदिन पर 2 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसे भारत में गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। अहिंसा दिवस पर कविता साबरमती के संत तुझे लाख बार प्रणाम है साबरमती के संत तुझे, लाख बार प्रणाम हैअहिंसा के पुजारी तुझे,लाख बार प्रणाम हैस्वतन्त्रा की राह हो या, सत्यता की

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विश्वास के पुल – सन्त राम सलाम

हिंदी कविता

विश्वास के पुल उफनती नदी में उमड़ता सैलाब, पुलिया के नीचे पानी गहरा है।बीच मझधार में फँसा है जीवन, विश्वास के पुलिया पर ठहरा है।। जीवन मृत्यु दो छोर जीवन के, जहाँ पर पाँच तत्वों का पहरा है।सजग हवा सोते हैं साँसों पर, तब तब ही यह जीवन कहरा है।। धूप और छाँव में बीतता

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खुद से वादा – सुशी सक्सेना

हिंदी कविता

खुद से वादा साहिब, खुद से भी एक वादा करना है।मंजिल तक पहुंचने का इरादा करना है।नित नए संघर्ष होंगे, जीवन के पथ पर,मगर सवार हो कर, उत्साह के रथ पर।कांटों भरा हो या फूलों भरा, जारी ये सफ़र रखना,कदम जमीं पर हो, और आसमां पर नजर रखना।मुश्किलें सर झुका दें, तेरे कदमों पर,नित नए

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शीतल छाया दे रहे – विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

शीतल छाया दे रहे शीतल छाया दे रहे, परउपकारी पेड़। हरे पेड़ को काट कर, कुदरत को ना छेड़।। पेड़ दे रहे औषधी, ले के रहो निरोग।पेड़ लगाने चाहिए, काट रहे हैं लोग।। पालन पोषण कर रहे, देकर के फल फूल। पेड़ लगा उपकार कर, पींग डाल कर झूल।। पेड़ सलामत जब तलक, सोओ लंबी

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कहाँ गई कागज की कश्ती – प्यारेलाल साहू

हिंदी कविता

कहाँ गई कागज की कश्ती – प्यारेलाल साहू कहाँ गई कागज की कश्ती।कहाँ गई बचपन की मस्ती।। बचपन कितना था मस्ताना।कभी रूठना और मनाना।। साथ साथ खेला करते थे।आपस में फिर हम लड़ते थे।। साथ साथ पढ़ने जाते थे।बाँट बाँट कर हम खाते थे।। छुट्टी के दिन मौज मनाते।अमराई से आम चुराते।। कभी पकड़ में

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निवेदन करें हम महादेव प्यारे – उपमेंद्र सक्सेना

हिंदी कविता

निवेदन करें हम महादेव प्यारे – उपमेंद्र सक्सेना गीत- उपमेंद्र सक्सेना एडवोकेट बने आप भोले जहर पी लिया सब, लगें आप हमको सब से ही न्यारेनिवेदन करें हम महादेव प्यारे, न डूबें कभी भी हमारे सितारे। बजे हर तरफ आपका खूब डंका, न होती किसी को कहीं आज शंकाभवानी की चाहत हो क्यों न पूरी,

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स्वास्थ्य पर सजगता – विनोद सिल्ला

प्रकृति और पर्यावरण

स्वास्थ्य पर सजगता सेहत सुविधा कम हुई, बढ़े बहुत से रोग| दाम दवाओं के बढ़े, तड़प रहे हैं लोग|| अस्पताल के द्वार पर, बड़ी लगी है भीड़|रोग परीक्षण हो रहे, सब की अपनी पीड़|| ऊंचे भवन बना लिए, पैसा किया निवेश|दूर हुआ जब प्रकृति से, पनपे सभी कलेश|| खान-पान बदले सभी, फास्ट-फूड परवान|रोगों की भरमार

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चुगली रस – विनोद सिल्ला

हिंदी कविता

चुगली रस मीठा चुगली रस लगे, सुनते देकर ध्यान। छूट बात जाए नहीं, फैला लेते कान।। चुगलखोर सबसे बुरा, कर दे आटोपाट।नारद से आगे निकल, सबकी करता काट।। चुगली सबको मोहती, नर हो चाहे नार।चुगली के फल तीन हैं, फूट द्वेष तकरार।। चुगली निंदा जो करें, सही नहीं वो लोग।चुगल पतन की ओर है, पड़े

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पावस पर कविता – नीरामणी श्रीवास नियति

हिंदी कविता

पावस पर कविता पावस ऋतु अब आ गई , घिरी घटा घनघोर ।चमचम चमके दामिनी , बादल करते शोर ।।बादल करते शोर , भरे नदिया अरु नाला ।चले कृषक खलिहान , लगा कर घर में ताला ।नियति कहे कर जोड़ , दिखे ज्यों रात्रि अमावस ।अँधियारा चहुँ ओर , घटा छाये जब पावस ।। पावन

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