कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

नशा नर्क का द्वार है – बाबूराम सिंह

नारी जीवन और संवेदना

हिंदी कविता – नशा नर्क का द्वार है मानव आहार के विरूध्द मांसाहार सुरा,बिडी़ ,सिगरेट, सुर्ती नशा सब बेकार है।नहीं प्राणवान है महान मानव योनि में वो,जिसको लोभ ,काम,कृपणता से प्यार है। अवगुण का खान इन्सान बने नाहक में,बिडी़, सुर्ती,सुरा नशा जिसका आहार है।सर्व प्रगति का गति अवरोध करे,ऐसा जहर बिडी़ , सुर्ति मांसाहार है। […]

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प्रात: वन्दन – हरीश बिष्ट

हिंदी कविता

जन-जन  की रक्षा है  करती |भक्तजनों  के दुख भी हरती ||ऊँचे   पर्वत   माँ   का   डेरा |माँ   करती   है  वहीं  बसेरा || भक्त   पुकारे   दौड़ी   आती |दुष्टजनों   को   धूल  चटाती ||भक्तों   की करती  रखवाली |जगजननी  माँ  खप्परवाली || भक्त सभी जयकार लगाते |चरणों में नित शीश नवाते ||मनोकामना    पूरी   करती |खुशियों से माँ झोली भरती ||

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जय जय हनुमान पर कविता हिंदी में – बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

जय जय हनुमान पर कविता जय भक्त शिरोमणि शरणागत जय हो कृपानिधान।जयबजरंगी रामदूत जय पवनपुत्र जय जय हनुमान।। जय आनंद कंदन केशरी नंदन जग वंदन शुभकारी।जय मद खलगंजन असुरनिकंदन भवभंजन भयहारी।जय जयजनपालक द्रुतगतिचालक सुचिमय फलहारी।जय श्रीहरि धावन प्रभु गुणगावन पावन प्रेम पुजारी। जय अंजनी लाला शुभ योग निराला जय महिमान।जय बजरंगी रामदूत जय पवनपुत्र जय-जय

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साक्षरता अभियान – बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

विश्व साक्षरता दिवस की हार्दिक मंगल शुभ कामनायें साक्षरता अभियान —————————–साक्षरता अभियान चलायें,घर-घर अलख जगायें। जन-जन साक्षर भव्य बनायें,ज्ञान ज्योति फैलायें। बिना विद्या नर बैल समाना ,कहता है जग सारा।मिटे नहीं विद्या बिन कभीभी,मानव मनअँधियारा।तम अंधकार तिमिर सभी मिल,आओ दूर भगायें।साक्षरता अभियान चलायें ,घर-घर अलख जगायें। विद्या धन ऐसा है जगत में,बाँट न सकता कोई।बिन

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गणपति बाबा

हिंदी कविता

गणपति को विघ्ननाशक, बुद्धिदाता माना जाता है। कोई भी कार्य ठीक ढंग से सम्पन्न करने के लिए उसके प्रारम्भ में गणपति का पूजन किया जाता है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन “गणेश चतुर्थी” के नाम से जाना जाता हैं। इसे “विनायक चतुर्थी” भी कहते हैं । महाराष्ट्र में यह उत्सव सर्वाधिक

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श्री राधा अष्टमी पर हिंदी कविता

हिंदी कविता

श्री राधा अष्टमी पर हिंदी कविता सनातन धर्म में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि श्री राधाष्टमी के नाम से प्रसिद्ध है। शास्त्रों में इस तिथि को श्री राधाजी का प्राकट्य दिवस माना गया है। श्री राधाजी वृषभानु की यज्ञ भूमि से प्रकट हुई थीं। राधा पुकारे  तोहे राधा पुकारे  तोहे  श्याम  हाथ जोड़  कर।आ जाओ  मोहन  प्यारे  मथुरा  को छोड़  कर।।आ

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शबा राव की कवितायेँ

समाज और यथार्थ

शबा राव की कवितायेँ आज की बात मैं घर से निकली पढ़ाई के लिए,बस अड्डे पर बस का इंतजार करते रहे,कुछ देर बाद बस आ गई,मैं और बाकी के लोग बस में बैठ गए। बस में बैठी महिला मेरे से बात करने लगी,मैंने उनसे पूछा तुम क्या करती हो?महिला ने जवाब दिया बड़े बड़े घरों

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गणेश जी की प्रतिमा – एस के नीरज

हिंदी कविता

गणपति को विघ्ननाशक, बुद्धिदाता माना जाता है। कोई भी कार्य ठीक ढंग से सम्पन्न करने के लिए उसके प्रारम्भ में गणपति का पूजन किया जाता है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन “गणेश चतुर्थी” के नाम से जाना जाता हैं। इसे “विनायक चतुर्थी” भी कहते हैं । महाराष्ट्र में यह उत्सव सर्वाधिक

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आखिर क्यों? – सृष्टि कुमारी

समाज और यथार्थ

आखिर क्यों? क्यों बना दिया मुझे पराया? क्यों कर दिया आपने मेरा दान?एक बेटी पूछ रही पिता से,क्या मेरी नहीं कोई अपनी पहचान? बेटों के आने पर खुशियां मनाते हो,फिर बेटी के आने पर हम क्यों?एक बेटी पूछ रही पिता से,हम भी तो आपके ही अंश हैं, क्यों मुझे पराया कहते हो? कभी मां, कभी

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हे गणनायक – विनोद कुमार चौहान

हिंदी कविता

हे गणनायक (सार छंद) हे गणनायक हे लम्बोदर, गजमुख गौरी नंदन।लोपोन्मुख थाली से होते, अक्षत-रोली-चंदन।। हे शशिवर्णम शुभगुणकानन, छाई है लाचारी।बढ़ती मँहगाई से अब तो, हारी जनता सारी।। हे यज्ञकाय हे योगाधिप, भोग लगाऊँ कैसे।मोदक की कीमत तो बप्पा, बढ़े कनक के जैसे।। हे उमापुत्र हे प्रथमेश्वर, मँहगे हैं अब ईंधन।मूषक वाहन ही अच्छा है,

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गौरी पुत्र गणेश – सुकमोती चौहान

हिंदी कविता

गौरी पुत्र गणेश आओ हे गौरी पुत्र गणेश!हरने हम सब के क्लेश। अग्र पूजन के अधिकारी,ज्ञान विद्या के भंडारी,मंगल मूर्ति अतुल बलधारी,पधारो हे गजानन!भरने जीवन में आनंद।आओ हे गौरी पुत्र गणेश!हरने हम सबके क्लेश | शिव शक्ति के तुम दुलारे,देवगणों के हो नायक।कर्म को पूजा माने आप,अष्ट सिद्धि के दायक ।विराजो हे कृपा निधान!देने बुद्धि

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बचपन पर कविता

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

जन्म से लेकर किशोरावस्था तक के आयु काल को कहते है। विकासात्मक मनोविज्ञान में, बचपन को शैशवावस्था (चलना सीखना), प्रारंभिक बचपन (खेलने की उम्र), मध्य बचपन (स्कूली उम्र), तथा किशोरावस्था (वयः संधि) के विकासात्मक चरणों में विभाजित किया गया है। इसी प्यारे बचपन पर ही आधारित है यह बचपन पर कविता बचपन पर कविता मेरा बचपन-

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