शबनम पर कविता

शबनम पर कविता

शबनम की चमक
हमारे तुम्हारे
मधुर रिश्तों की गंध
लिए होती है
मानो तो
ये सच है
गर न मानों तो
ये ही शबनम
पानी का कतरा
मात्र होती है।।।

बहार
बहार
🔗 इस कविता को साझा करें
📱 WhatsApp
✅ लिंक कॉपी हो गया!

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Login
🔐
कवि बनें
Scroll to Top