“जेब और जिस्म की शादी”
समाज और यथार्थ“जेब और जिस्म की शादी” शादी—एक ऐसा शब्दजिसके भीतर प्रेम से ज़्यादाभ्रम रहता है।हम सोचते हैंहम किसी व्यक्ति को चुन रहे हैं—पर सच मेंहम उसके भीतर नहीं देखते,सिर्फ़ उसकी सतह को नापते हैं। लड़की की दृष्टिलड़के की जेब में उतरती है—वह भविष्य नहीं ढूँढती,भविष्य की गारंटी ढूँढती है।जैसे मनुष्य नहीं,एक बीमा पॉलिसी चुन रही होजिस […]
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