सामाजिक बदलाव पर छत्तीसगढ़ी कविता
हिंदी कवितासामाजिक बदलाव पर छत्तीसगढ़ी कविता करलई होगे संगी ,करलई होगे गा।छानी होगे ढलई ,करलई होगे गा ।।पहिली के माटी घर ,मोला एसी लागे।करसी के पानी म ,मोर पियास भागे।मंझन पहा दन, ताश अऊ कसाड़ी म।टेढ़ा फंसे रे , हमर बिरथा-बाड़ी म।ए जमाना बदलई , करलई होगे गा ।करलई होगे संगी , करलई होगे गा ॥ […]
सामाजिक बदलाव पर छत्तीसगढ़ी कविता Read More »




