मनीभाई नवरत्न की कविता

सुभाषचन्द्र बोस

सुभाषचन्द्र बोस : एक अक्षय अग्नि / मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

सुभाषचन्द्र बोस : एक अक्षय अग्नि (अतुकांत कविता) इतिहास कभी–कभीएक ऐसे व्यक्तित्व को जन्म देता हैजो केवल घटनाओं का हिस्सा नहीं होता,बल्कि स्वयंनयी दिशा देता है।सुभाषचन्द्र बोसऐसे ही पुरुष थे—जो मृत्यु के बाद भीयुवाओं की नसों मेंविद्रोह की गर्मी जगाते रहे। साहसउनका परिचय नहीं,उनकी धड़कन था।इसीलिए वे ‘नेताजी’ हुए—मरकर भी जीवित,चुप रहकर भी बोलते हुए। […]

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सरदार पटेल

सरदार पटेल : अदम्य इच्छाशक्ति का पथ / मनीभाई नवरत्न

आध्यात्म और भक्ति

सरदार पटेल : अदम्य इच्छाशक्ति का पथ (अतुकांत कविता) राष्ट्र एक व्यक्ति के कारण महान नहीं होता,पर कभी-कभीएक व्यक्तिराष्ट्र की रीढ़ बन जाता है।कठोरता जिसे लोग कठोरता समझते हैं,वह भीतर जलते हुए कर्तव्य का ताप होता है।सरदार पटेलउसी ताप से बनेवही लौह बनाजिसने एक बिखरे देश कोएक धड़कन में जोड़ा। करमसद की मिट्टीसाधारण थीपर उससे

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Surdas

सूरदास : एक जागृति-यात्रा – मनीभाई नवरत्न

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

सूरदास : एक जागृति-यात्रा (अतुकांत कविता) कविता का आरम्भ वहीं होता हैजहाँ मन प्रश्न करता है—दृष्टि का मूल्य क्या है?दिखाई देने वाली दुनिया बड़ी हैया भीतर जलती हुई अनुभूति?और तभी कोई सूरदास-सा मनुष्यएक अंधकार को रोशनी में बदल देता है। सीही हो या रुनकता—स्थान बदल जाता है,पर प्रतिभा का स्रोत नहीं।1540 के आसपास जन्मा एक

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स्वामी दयानन्द सरस्वती

स्वामी दयानन्द सरस्वती – मनीभाई नवरत्न

समाज और यथार्थ

स्वामी दयानन्द सरस्वती – मनीभाई नवरत्न उन्नीसवीं शताब्दी के धूमिल क्षितिज परजब राष्ट्र की आत्मा अंधकार में ढंकी थी,जब मनुष्य की चेतना जड़ता के बोझ तले दबी थी,तभी एक तेजस्वी दीप्ति उठी—संस्कारों में तप्त, ज्ञान में प्रखर,जो स्वयं प्रकाश बनकर जनमन में आशा की लौ जलाने आया। टंकारा की मिट्टी में जन्मा मूलशंकरकेवल बालक नहीं,

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Mahatma-Gandhi

महात्मा गांधी – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

महात्मा गांधी – मनीभाई नवरत्न (मौलिक | अतुकांत शैली | संपूर्ण जीवन-गाथा समाहित) एक युग—जिसने सत्य और अहिंसा कोकेवल विचार नहीं,बल्कि जीवन की धड़कन बनाया,उस युग का नाम था—महात्मा गांधी। एक साधारण घर में जन्मा बालक,पर उसकी आत्मा मेंमानो भारत का भविष्य लिखा था। 2 अक्तूबर 1869, पोरबन्दर—समुद्र की लहरों से घिरा छोटा-सा नगर;पर वहाँ

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श्रीमती इंदिरा गांधी -मनीभाई नवरत्न

मन और भावनाएँ

श्रीमती इंदिरा गांधी -मनीभाई नवरत्न (मौलिक, अतुकांत, संपूर्ण जीवन-गाथा समाहित कविता) एक बच्ची—जिसके जन्म पर सरोजिनी ने कहा था,“तुम्हारे घर में भारत की नयी भावना ने जन्म लिया है”—वह धीरे-धीरेभारत की आत्मा में धड़कने लगी। आनंद भवन की शांत गलियों में,राजनीति की आहटउसके खेल की धुन में घुली रही।माँ कमला की बीमारी,पिता नेहरू की दूर

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विनोबा भावे — मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

विनोबा भावे — मनीभाई नवरत्न भारत की मिट्टीजब सामाजिक असमानताओं सेथकने लगी थी,जब भूमि और मनदोनों बंटते-बंटतेअपनी करुण पुकार में डूब चुके थे—तब एक शांत साधु उठा,माथे पर तेज,मन में करुणा,और हाथों में केवलअहिंसा का स्पर्श।वह था—विनोबा भावे। महाराष्ट्र के छोटे से गाँव गागोदे मेंएक बालक नेअपनी माँ के भजनों मेंधर्म नहीं,जीवन का सूत्र सीखा।रुक्मणिबाई

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गुरु नानक देव — मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

गुरु नानक देव — मनीभाई नवरत्न भारत की पुण्य धरती परजब मनुष्य भेद–भाव के अंधकार में बँटा हुआ था,जब धर्म का सारअनुष्ठानों की भीड़ में खो रहा था—तब एक शांत प्रकाश उभरा,जिसने कहा—“ईश्वर एक है, और वह हर हृदय में विद्यमान है।”वही प्रकाश थे—गुरु नानक देव। 1469 ईस्वी, कार्तिक पूर्णिमा—तलवंडी की मिट्टीएक दिव्य बालक से

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महावीर स्वामी — मनीभाई नवरत्न

नारी जीवन और संवेदना

महावीर स्वामी — मनीभाई नवरत्न भारत की आध्यात्मिक धरती परजब अहिंसा की रोशनी मंद पड़ रही थी,जब जीवन की पीड़ा कोकोई स्थिर मार्ग नहीं मिलता था—तब एक दिव्य स्वर प्रकट हुआ,जिसने कहा—“शांति बाहर नहीं, अपने भीतर से उपजती है।”वही स्वर बने—महावीर स्वामी। 599 ईसा पूर्व की वह सुबह,कुण्डग्राम की धरतीएक असाधारण आत्मा का स्वागत कर

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पं० जवाहरलाल नेहरू -मनीभाई नवरत्न

मन और भावनाएँ

पं० जवाहरलाल नेहरू -मनीभाई नवरत्न इतिहास के पन्नों परएक नामगुलाब की पंखुड़ी–सा कोमल,पर संघर्ष की आग–सा प्रखर—जवाहरलाल नेहरू। राजसी वैभव में जन्मे,पर मन में सादगी का उजाला लिए;14 नवम्बर 1889—मोतीलाल नेहरू की शान,स्वरूप रानी की आँखों का तारा।घर के शिक्षकों से सीखा पहला अक्षर,और जल्द ही इंग्लैण्ड का मार्गउनकी सीख का विस्तार बन गया। हैरो

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डा० भीमराव अम्बेडकर – मनीभाई नवरत्न

समाज और यथार्थ

डा० भीमराव अम्बेडकर अत्यंत साधारण जीवन में जन्मा एक बालक,जिसके पाँवों में जमी धूल भीएक दिन भारतीय लोकतंत्र की नींव बनने वाली थी। 14 अप्रैल 1891 —रत्नागिरि की उसी धरती पर,जहाँ जाति की दीवारेंइंसान को इंसान होने नहीं देती थीं,वहीं पैदा हुआ भीमराव,जिसे दुनिया बाद में‘बाबासाहेब’ कहकर प्रणाम करने वाली थी। गरीबी, भेदभाव, उपेक्षा—ये उनके

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मदर टेरेसा : ममता और सेवा की मूर्ति -मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

मदर टेरेसा : ममता और सेवा की मूर्ति -मनीभाई नवरत्न अल्बानिया की धरती से जन्मीयह करुणा की धाराभारत की मिट्टी में समा करपूरी दुनिया की माँ बन गई।दुख को अपना आभूषण,सेवा को अपना धर्मऔर मनुष्य कोईश्वर का ही अंश मानने वालीवह अनूठी शक्ति—यही थीं मदर टेरेसा। स्कोप्जे के छोटे-से घर मेंअगनेस गोंक्सा नाम की एक

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