मनीभाई नवरत्न की कविता

शिवाजी : मेरे आदर्श पुरुष – मनीभाई नवरत्न

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

शिवाजी : मेरे आदर्श पुरुष (अतुकांत कविता) भारत की धरा परजब अन्याय का अंधेरा गहराता गया,जब धर्म, संस्कृति और आत्मगौरवजकड़नों में सिसकने लगे—तभी उठे एक प्रकाश-पुरुष,एक ज्योति जो दिशा भी बनी और संघर्ष भी।यह ज्योति थी—मेरे आदर्श पुरुषछत्रपति शिवाजी महाराज। उनका जन्म शिबनेरी के किले में हुआ—पर वे किले की दीवारों तक सीमित न रहे।जीजामाता […]

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गुरु गोविन्दसिंह — मनीभाई नवरत्न

आध्यात्म और भक्ति, हिंदी कविता

गुरु गोविन्दसिंह — मनीभाई नवरत्न एक ओर शत्रुओं को तलवार से ललकारने वाला,दूसरी ओर कलम से काव्य के मोती बीनने वाला,हाथ पर बाज और हृदय में करुणा छिपाए,धर्म, मानवता और राष्ट्रधर्म के लिएअथक खड़े रहने वाला—वह विलक्षण पुरुष थे गुरु गोविन्दसिंह। पटना की धरती पर23 दिसम्बर 1666 को जन्मेएक प्रकाश…जो आगे चलकरभय और अन्याय के

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ले ली जिंदगी ने करवट -मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

ले ली जिंदगी ने करवट रहता नहीं यहां; कुछ भी पहले सा।सब बदल रहा है , तू भी बदल।छिपता कहां है कुछ भी किसी से,छिप छिपके , क्या निकले हल?करना यहां जो भीसच्चाई के दम पेकर लेना तू झटपटले ली जिंदगी ने करवट । बसना नहीं है, बढ़ना है तुझे।अपनों से रो के लड़ना है

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उपभोग का पहाड़ – मनीभाई नवरत्न

प्रकृति और पर्यावरण

🛍️ उपभोग का पहाड़ 🛍️ वे बाज़ार जाते हैंबस एक कपड़ा लेने,पर लौटते हैं —थैले से लदे,मन से खाली। आवश्यकता दरवाज़े पर रह जाती है,लालच भीतर कुर्सी पर बैठ जाता है।“सेल चल रही है”,“एक खरीदो एक मुफ़्त पाओ” —ये जादू के शब्द हैं,जो मनुष्य को वस्तु बना देते हैं। दुकानों में अब वस्त्र नहीं,स्वप्न टंगे

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फैशन के दौर पर इच्छा की गारंटी ना करें -मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

👗 फैशन के दौर पर इच्छा की गारंटी ना करें 👠 फैशन बदलते हैं —मौसम की तरह,रंगों की तरह,रुचियों की तरह। आज जो नया है,कल वही पुराना हो जाएगा।आज जो आकर्षक लगता है,कल वही अलमारी में पड़ेगा,भूल गया, बेकार। इच्छाएँ भी ऐसी ही होती हैं —फैशन की तरह अस्थायी,क्षणिक, चमकीली,पर भीतर से रिक्त। हर नया

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“धर्मनिरपेक्ष संविधान, धार्मिक भीड़” – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

“धर्मनिरपेक्ष संविधान, धार्मिक भीड़” (एक सवाल की शक्ल में कविता) हमने क़सम खाई थीइक धरती की,जहाँ मज़हब से ऊपर होगी इंसानियत।पर मंदिर-मस्जिद की दीवारों ने ,सोचा नहीं थाघुटती संविधान की आहट? संविधान पे तो लिखा है —“सब धर्म समान”,पर ज़ुबानों पे क्योंनफ़रत के बयान?राज सत्ता हो निष्पक्ष,अगर यही है बात,पर जनता खुद बँटी हो,क्या फिर

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“एक ही चेहरा” — मनीभाई नवरत्न

समाज और यथार्थ

🌓 “एक ही चेहरा” — मनीभाई नवरत्न विश्वास —एक नज़र है,जो देखना नहीं चाहती,सुनना भी नहीं,जो अपने भीतर के मौन कोईश्वर का उत्तर समझ बैठती है। जब तू हाथ जोड़ता है,तो ईश्वर मुस्कुराता है —पर जब तू सवाल छोड़ देता है,तो वही मुस्कानडर में बदल जाती है। धार में बहा दिया गया नारियल,पूजा की थाली,एक

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भूख का शास्त्र- मनीभाई नवरत्न

प्रकृति और पर्यावरण

“भूख का शास्त्र” भूखा आदमीविचार नहीं करता,वह रोटी की आकृति में ईश्वर देखता है।जो टुकड़ा फेंक दे —वही उसका भगवान बन जाता है। भूख, आदर्शों की अंतिम परीक्षा है,जहाँ नीति किताबों में रह जाती हैऔर पेट—धर्मग्रंथ बन जाता है। चापलूसी कोई गुण नहीं,पर भूख उसे भी सिखा देती है“जी हजूर” के मीठे उच्चारण,“सत्य” से कहीं

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शराब पीना आत्महत्या क्यों है? |भूलना चाहता हूँ कि मैं जी रहा हूँ- मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

यह अतुकांत हिंदी कविता “धीरे-धीरे मरना” शराब की लत से आत्मविनाश की दर्दभरी यात्रा को दर्शाती है। पढ़िए — कैसे हर पैग एक इंसान के सपनों और उम्मीदों को धीरे-धीरे खत्म करता जाता है। भूलना चाहता हूँ कि मैं जी रहा हूँ।” (अतुकांत कविता) रात की खामोशी मेंवह बोतल से बातें करता है,जैसे किसी पुराने

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ईश्वर का सौदा – मनीभाई नवरत्न की व्यंग्यात्मक कविता

समाज और यथार्थ

मनीभाई नवरत्न की कविता “ईश्वर का सौदा” समाज पर व्यंग्य करती है कि कैसे इंसान ने ईश्वर को राजनीति, जात-पांत और व्यापार का साधन बना दिया है। पढ़ें यह विचारोत्तेजक रचना। ईश्वर अनंत, शाश्वत और सर्वव्यापी है। लेकिन समय के साथ इंसान ने अपनी स्वार्थपूर्ण सोच और आडंबरों में उसे बांधकर छोटा कर दिया है।

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ईश्वर का अपमान – मनीभाई नवरत्न की विचारोत्तेजक कविता

समाज और यथार्थ

मनीभाई नवरत्न की कविता “ईश्वर का अपमान” में बताया गया है कि इंसान ने ईश्वर की महानता को सीमित कर दिया है। पढ़ें यह विचारोत्तेजक रचना जो समाज की सोच पर गहरा प्रहार करती है।ईश्वर सर्वव्यापी है, उसे किसी मंदिर या पूजा की सीमाओं में बाँधना संभव नहीं। कवि मनीभाई नवरत्न अपनी कविता “ईश्वर का

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धूल का पांडुलिपि: मनीभाई नवरत्न की मार्मिक कविता | भावनात्मक हिंदी कविता

समाज और यथार्थ

मनीभाई नवरत्न की कविता “धूल का पांडुलिपि” एक लेखक की अनकही कहानी बयान करती है, जो समाज की सच्चाई को शब्दों में पिरोती है। पढ़ें यह भावनात्मक और विचारोत्तेजक रचना। कविता का उद्देश्य “धूल का पांडुलिपि” कविता का उद्देश्य समाज में व्याप्त असमानता, उपेक्षा और मानवीय संवेदनाओं की अनदेखी को उजागर करना है। यह एक

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