वो कांधा ना दिखा – आदित्य मिश्रा

एक मजबूत या कठोर व्यक्ति की व्यथा

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जिंदगी पर कविता – आदित्य मिश्रा

पिता

जब कोई किसी से प्यार करता है तो उसकी व्यथा उसको ही पता रहती है

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धरती स्वर्ग दिखाई दे

प्रकृति

पर्यावरण संरक्षण के लिए एक बार फिर से पहले की तरह अपनी वसुंधरा पर हरियाली और प्राण वायु के लिए प्रदूषण रोकना होगा ।
आओ मिलकर कसम खाते है कि वृक्षारोपण जरूर करना है।

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झुमका : प्यार के प्यार की निशानी

झुमका

झुमका : प्यार के प्यार की निशानी आज मैंने अपने तोहफे का बॉक्स निकाला,जिसे बड़े सलीके से मैंने संभाल के रखा था,आदत कहूं या तोहफे के प्रति मेरा लगावमैंने अपना हर एक तोहफा संभाल के रखा है बड़े प्यार सेऔर जब ये तोहफा आपके प्यार का दिया होतो उसके प्रति प्यार और बढ़ जाता है, … Read more

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हमें जमीं से मत उखाड़ो-अदित्य मिश्रा

हमें जमीं से मत उखाड़ो रो-रोकर पुकार रहा हूं हमें जमीं से मत उखाड़ो।रक्तस्राव से भीग गया हूं मैं कुल्हाड़ी अब मत मारो। आसमां के बादल से पूछो मुझको कैसे पाला है।हर मौसम में सींचा हमको मिट्टी-करकट झाड़ा है। उन मंद हवाओं से पूछो जो झूला हमें झुलाया है।पल-पल मेरा ख्याल रखा है अंकुर तभी … Read more

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