hindi poem on food
Hindi poem on food
शाकाहारी जीवन / देवेंद्र चरण खरे आलोक
शाकाहारी जीवन करें व्यतीत जन्म हुआ मानव का लेकर ,सौम्य प्रकृति आधार।तृण- तृण इसके रग- रग में है,रचता रहता सार।अंग सभी प्रत्यंग सजे हैं,सात्विक शक्ति शरीर,मन का मनका प्रस्तुत करता ,मन ही मन आभार। है विकास के पथ पर चलता,रज कण लिए शरीर।मज्जा रक्त अस्थियां पोषण,पाने हेतु अधीर।हारमोन है घ्रेलिन नामक, बढे़ भूख आहार,सम्यक नींद … Read more
शाकाहारी भोजन/ हरि प्रकाश गुप्ता
शाकाहारी भोजन अपनाइए भोजन अपनी अपनी पसंद का सभी का होता है।कोई मांसाहारी तो कोई शाकाहारी होता है ।।कुछ कहते मांसाहारी अच्छा होता है।कोई शाकाहारी को अच्छा कहता है ।।अपनी अलग-अलग सोच पर सभी कुछ निर्भर करता है।कहते हैं और सुना जंगली जानवरमांसाहारी होते हैं।फिर इंसान शाकाहारी छोड़क्यों मांसाहारी होते हैं।।शाकाहारी भोजन कर जीव जंतु … Read more
शाकाहारी भोजन / मधु वशिष्ठ
शाकाहारी भोजन यह भोजन जो तुमने खाया है। क्यों किसी निरीह पशु को तड़पाया है? क्या उसके दर्द भी बढ़कर थी भूख तुम्हारी।जिव्ह्या का स्वाद क्या उसके जीवन से ज्यादा अनमोल था? उन्हें प्लेट में सजा कर खाते हुए क्या तुम्हें नहीं कोई क्षोभ था? माना इस खाने से तुम्हें पोषण तो मिलेगा?लेकिन क्या उन … Read more