*बेटी पर आधारित कविता

गुड़िया पर बाल कविता

बिटिया के मुखड़े पर धवल मुस्कान

बिटिया के मुखड़े पर धवल मुस्कान मनुजता शूचिता शुभता,खुशियों की पहचान होती है।जहाँ बिटिया के मुखड़े पर,धवल मुस्कान होती है।इसी बिटिया से ही खुशियाँ,सतत उत्थान होती है।जहाँ बिटिया के मुखड़े,पर धवल मुस्कान होती है। सदन में हर्ष था उस दिन,सुता जिस दिन पधारी थी।दिया जिसने पिता का नाम,यह बिटिया दुलारी थी।महा लक्ष्मी यही बेटी,यही वात्सल्य …

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गुड़िया पर बाल कविता

बेटी पर कविता – सुशी सक्सेना

मेरी बिटिया मेरी बिटिया, मेरे घर की शान है।मेरे जीने का मकसद, मेरी जान है। पता ही न चला, कब बड़ी हो गई,मेरी बिटिया अपने पैरों पे खड़ी हो गई,मेरे लिए अब भी वो एक नन्हीं कली है,मेरे अंगना कि एक चिड़िया नादान है। या रब, हर बुरी नजर से उसे बचा कर रखना,उसकी जिंदगी …

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गुड़िया पर बाल कविता

नन्हीं चिड़िया पर कविता – मीना रानी

नन्हीं चिड़िया पर कविता माँतेरे आंगन कीमैं एकनन्हीं चिड़ियाखेलती-चहचहातीआंगन मेंसुबह उठते हीकानों मेंरस भरतीफुदकती फिरतीमुझे देखभूल जाती तूंसारे गम जहान केकाम दिन-रात मैं करतीतेरी सेवा मैं करती बदले में कुछ न चाहतीबड़ी हुई तोउड़ गई इस आंगन सेमाँ भूल न जानाइस नन्हीं चिड़िया को । -मीना रानी, टोहानाहरियाणा

बिटिया की शादी कर दूँगा

बिटिया की शादी कर दूँगा गीत (१६,१६) अब के सब कर्जे भर दूँगा,बिटिया की शादी कर दूँगा।। खेत बीज कर करी जुताई,अब तो होगी बहुत कमाई।शहर भेजना, सुत को पढ़ने।भावि जीवनी उसकी गढ़ने।गिरवी घर भी छुड़वा लूँगा,बिटिया की शादी कर दूँगा।। फसल बिकेगी,चारा होगा,दुख हमने तो सारा भोगा।अब वे संकट नहीं रहेंगे,सहा खूब,अब नहीं सहेंगे।दो …

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बेटी बचाओ (महिला जागृति)

बेटी पर कविता

बेटी पर कविता एक मासूम सी कली थीनाजों से जो पली थी आँखों में ख़्वाब थे औरमन में हसरतें थीं तितली की मानिन्द हर सुउड़ती वो फिर रही थी सपने बड़े थे उस केसच्चाई कुछ और ही थी अनजान अजनबी जबआया था ज़िंदगी में दिल ही दिल में उस कोअपना समझ रही थी माँ बाप …

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hindi doha || हिंदी दोहा

बेटी पर दोहा छंद

बेटी पर दोहा छंद बेटी सृष्टि प्रसारणी , जग माया विस्वास।धरती पर अमरित रची, काया श्वाँसो श्वाँस।।.बेटी जग दातार भी ,यही जगत आधार।जग की सेतु समुद्र ये, जन मन देवा धार।।.बेटी गुण की खान है, त्याग मान बलिदान।राज धर्म तन तीन का,सत्य शुभ्र अभिमान।।.बेटी व्रत त्यौहार की, सामाजिक सद्भाव।कुटुम पड़ोसी जोड़ती,श्रद्धा भक्ति सुभाव।।.बेटी यसुदा मात …

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बेटी बचाओ (महिला जागृति)

बेटी तो है फूल बागान( महिला जागृति पर रचना )

बेटी तो है फूल बागान( महिला जागृति पर रचना ) गांव, शहर में मारी जाती, बेटी मां की कोख की,बेटी मां की कोख की, बेटी मां की कोख की।। जूही बेटी, चंपा बेटी, चन्द्रमा तक पहुंच गई,मत मारो बेटी को, जो गोल्ड मेडलिस्ट हो गई,बेटी ममता, बेटी सीता, देवी है वो प्यार की।बेटी बिन घर …

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