समस्या सेक्स नहीं, खालीपन है
सेक्स समस्या नहीं है।
समस्या है—
भीतर का खालीपन।
जब तुम नहीं जानते
कि तुम कौन हो,
तब इच्छा
तुम्हें खींचती है,
घसीटती है,
शासित करती है।
सेक्स
सरल है,
जैविक है।
पर आसक्ति—
जटिल है,
मानसिक है।
तुम भूखे हो,
पर यह भूख
देह की नहीं।
तुम्हें लगता है
सेक्स तृप्त करेगा—
पर वह वादा करता है,
पूरा नहीं करता।
हम बिना आत्म-बोध के जीते हैं।
और उसी अंधेपन में
सेक्स
बहुत बड़ा बन जाता है।
हम उससे
पूर्णता की उम्मीद करते हैं—
जो वह दे ही नहीं सकता।
इसलिए
कभी पूजते हैं,
कभी कोसते हैं।
पर समझते नहीं।
सच यह है—
भीतरी तृप्ति नहीं है,
इसलिए
देह पर
अत्यधिक बोझ डाल दिया है।
हम
अति-यौनिक समाज हैं,
क्योंकि
हम
अधूरे हैं।
और याद रखो—
तीव्र यौन-ऊर्जा
कोई दोष नहीं।
यह संकेत है—
भीतर बहुत ऊर्जा है,
पर दिशा गलत है।
ऊर्जा को दबाओ मत।
उसे सही दिशा दो।
कैसे?
पहले यह देखो—
जिस ओर तुम जा रहे हो,
वह दिशा
खोखली है।
जब तुम
ईमानदारी से
इस भ्रम का सामना कर लेते हो,
तब
सेक्स
अपने आप
अपनी सही जगह पर बैठ जाता है—
न पूजा जाता है,
न निंदा की जाती है।
बस
समझ लिया जाता है।





