जब तूने हमें छोड़ के दौड़ लगाई

जब तूने हमें छोड़ के दौड़ लगाई

जब तूने हमें छोड़ के दौड़ लगाई


रचनाकार :मनीभाई नवरत्न
रचनाकाल :15 नवम्बर 2020

तू चलता है
लोग बोलते हैं
तू दौड़ता क्यूँ नहीं ?
तू सबसे काबिल है।
अब दौड़ता हूँ
फिर लोग बोलते हैं
गिरेगा  तभी जानेगा
हम क्यूँ चल रहे हैं ?

तूने फिर बातें मानी,
लोगों की सूनी।
फिर से चला उनके साथ
लेकिन अबकी बार
तेरी चाल ढीली है।

वो बढ़ रहे हैं तुझसे आगे
पीछे पलट तुझे देखते,
जाने क्यूँ मुस्कुराके।
लेकिन अब क्यूँ
कोई कहता नहीं ?
आ साथ चले प्रिय
संग संग।

ये वहीं लोग है
जिसे तूने माना हमसफर।
अब तू देता लाख दुहाई
ढोल पीट पीट कर बताता
कैसे होती बेवफाई ?

ये सारे किस्से पुराने मैले हैं।
दुनिया ने सबके जज्बातों से खेले हैं।
उसे बात समझ तब आई
जब पीछे से किसी ने कहा – “भाई !
क्या हुआ उस रेस का?
जब तूने हमें छोड़ के दौड़ लगाई।

मनीभाई नवरत्न

मनीभाई नवरत्न
मनीभाई नवरत्न

📝 कवि परिचय

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

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