आनंद — सबसे कठिन सुख

आनंद — सबसे कठिन सुख
(Joy: The Hardest Pleasure)

आनंद
साधारण सुख नहीं है।
वह ऊपर उठाता है—
और इसलिए
कठिन है।

सस्ते सुख
आसानी से मिल जाते हैं।
खुद को बेचो,
नशे में डूबो,
भूल जाओ—
कुछ ही पल में।

ये सुख
तुम्हें नहीं उठाते,
तुम्हें घटाते हैं।

पर बिना सुख
जीवन भी नहीं चलता।
तो चुनाव करो—
नीचे गिरने का,
या ऊपर उठने का।

ऊँचा सुख
माँगता है—
संयम,
सजगता,
बुद्धि,
और समर्पण।

इसीलिए
अधिकांश लोग
नीचे वाले सुख चुनते हैं।
क्योंकि
गिरना आसान है।

सही दिशा में चलना
संवेदनशील काम है।
इसे गढ़ना पड़ता है।
इसे रचना पड़ता है—
पूरी बुद्धि
और पूरी निष्ठा से।

गलत दिशा?
वह तो
गुरुत्वाकर्षण जैसी है—
अपने आप हो जाती है।

35,000 फीट की उड़ान के लिए
पीढ़ियों की इंजीनियरिंग चाहिए।
पर गिरने के लिए?
कुछ नहीं—
बस एक लापरवाही।

अगर तुम कहो
कि तुम सही जी रहे हो
और फिर भी
कोई कठिन आनंद नहीं है—
तो समझ लो,
तुम गलत हो।

ज्ञान
महान सुख चुनने की कला है।
और प्रेम—
वह है
सबसे ऊँची उड़ान का साहस,
जिसकी कल्पना
साधारण लोग
कर भी नहीं पाते।
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