किसान की पहचान
प्रकृति और पर्यावरणकिसान का गुणगान कविता के माध्यम से किया गया है।
आज पंछी मौन सारे नवगीत (१४,१४) देख कर मौसम बिलखताआज पंछी मौन सारेशोर कल कल नद थमा हैटूटते विक्षत किनारे।। विश्व है बीमार या फिरमौत का तांडव धरा परजीतना है युद्ध नित नवव्याधियों का तम हरा कर छा रहा नैराश्य नभ मेंरो रहे मिल चंद्र तारे।।।देख कर…………….।। सिंधु में लहरें उठी बसगर्जना क्यूँ खो गई
यह कविता मनुष्य के स्वार्थपरता को व्यक्त करते लिखी गई है
भगत सिंह हों घर घर में Read More »
विद्यार्थी की विचलित मनःस्थिति का वर्णन
विद्यार्थी की व्यथा Read More »
यह कविता हिंदी वर्णमाला पर आधारित है
हिन्दी वर्णमाला पर कविता Read More »
प्रस्तुत हिंदी कविता का शीर्षक साक्षरता है जो कि साक्षरता का अर्थ बताती कविता हैं
साक्षरता का अर्थ बताती कविता Read More »
मैं गुलाब हूँ मैं गुलाब हूं खूबसूरती में बेमिसाल हूं थोड़ा नाजुक और कमजोर हूं छूते ही बिखर जाती हूं फैल जाती है मेरी पंखुड़ियां ऐसा लगता है पलाश हूं उन पंखुड़ियों को मैं समेटती हूं कांटों की चुभन की परवाह नहीं करती हूं बढ़ती जाती हूं जीवन में आगे टकराने को नदियों की धारा
प्रकृति की आह- वृक्ष, पर्वत धरा की पीड़ा और मानव को आगाह करने की चेष्टा ।
धरा की आह पर कविता Read More »
यह कविता गुलाब पर लिखी गई एक सामाजिक कविता है जिसमें गुलाब की तुलना मानव जीवन से की गयी है। जिस प्रकार गुलाब अपने गुणों के द्वारा सभी को प्रसन्न और खुश रखता है या विभिन्न उच्च व उचित या आदर्श स्थानों पर स्थान लेता है उसी प्रकार मानव को भी अपने उत्तम कार्यों के द्वारा उचित और उत्तम स्थान बनाना चाहिए
मैं गुलाब हूं – रामबृक्ष Read More »
काव्य प्रतियोगिता आयोजित प्रसांगिक शीर्षक गुलाब पर आधारित कविता सम्मिलित करने हेतु
गुलाब पर कविता – रामबृक्ष Read More »
गुलाब एक फूल जो महकता सरे जहा को
सुगन्धित फूल हूं गुलाब का – कमल कुमार Read More »
गुरुजी कस पारा म पढ़ा के तो देख, अरे ! संसद ल सड़क म लगा के तो देख। गिंजरथे गुरु ह गली म पुस्तक ल धर के, बटोरे हे लईकन ल मास्टर गाँव भर के।
संसद ल सड़क म लगा के तो देख Read More »