कविता बहार

वर्षा-विरहातप

हिंदी कविता

वर्षा-विरहातप (१६ मात्रिक मुक्तक ) कहाँ छिपी तुम,वर्षा जाकर।चली कहाँ हो दर्श दिखाकर।तन तपता है सतत वियोगी,देखें क्रोधित हुआ दिवाकर। मेह विरह में सब दुखियारे,पपिहा चातक मोर पियारे।श्वेद अश्रु झरते नर तन से,भीषण विरहातप के मारे। दादुर कोकिल निरे हुए हैं,कागों से मन डरे हुए हैं।तन मन मेरे दोनो व्याकुल,आशंकी घन भरे हुए है। बालक […]

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मीत देश वंदन की ख्वाहिश

हिंदी कविता, ,

मीत देश वंदन की ख्वाहिश धरती पर पानी जब बरसेमनभावों की नदियाँ हरषे।नमन् शहीदों को ही करलें,छोड़ो सुजन पुरानी खारिश।मीत देश वंदन की ख्वाहिश। आज नेत्र आँसू गागर है,यादें करगिल से सागर है।वतन हितैषी फौजी टोली,कर्गिल घाटी नेहिल बारिश,मीत देश वंदन की ख्वाहिश। आतंकी हमलों को रोकें,अंदर के घपलों को झोंके।धर्म-कर्म अनुबंध मिटा कर,जाति धर्म

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पिता पर दोहे

हिंदी कविता

पिता पर दोहे पिता क्षत्र संतान के, हैं अनाथ पितुहीन।बिखरे घर संसार वह,दुख झेले हो दीन।। कवच पिता होते सदा,रक्षित हों संतान।होती हैं पर बेटियाँ, सदा जनक की आन।। पिता रीढ़ घर द्वार के,पोषित घर के लोग।करें कमाई तो बनें,घर में छप्पन भोग।। पिता ध्वजा परिवार के, चले पिता का नाम।मुखिया हैं करते वही ,

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तिरंगा (चौपाई छंद)

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तिरंगा (चौपाई छंद) आजादी का पर्व मनालो।खूब तिरंगा ध्वज पहरालो।।संगत रक्षा बंधन आया।भ्रात बहिन जन मन हर्षाया।।१ राखी बाँधो देश हितैषी।संविधान संसद सम्पोषी।।राखी बाँध तिरंगा रक्षण।राष्ट्र भावना बने विलक्षण।।२ जन जन का अरमान तिरंगा।चाहे बहिन भ्रात हो चंगा।।रक्षा सूत्र तिरंगा चाहत।धरा बहिन न होवे आहत।।३ राखी बंधन खूब कलाई।मान तिरंगे को निज भाई।।भारत का सम्मान

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शबरी के बेर(चौपाई छंद)

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शबरी के बेर(चौपाई छंद) त्रेता युग की कहूँ कहानी।बात पुरानी नहीं अजानी।।शबरी थी इक भील कुमारी।शुद्ध हृदय मति शील अचारी।।१ बड़ी भई तब पितु की सोचा।ब्याह बरात रीति अति पोचा।।मारहिं जीव जन्तु बलि देंही।सबरी जिन प्रति प्रीत सनेही।।२ गई भाग वह कोमल अंगी।वन ऋषि तपे जहाँ मातंगी।।ऋषि मातंगी ज्ञानी सागर।शबरी रहि ऋषि आयषु पाकर।।३ मिले

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मात पिता पूजन दिवस दोहे

नारी जीवन और संवेदना

मात पिता पूजन दिवस दोहे सीमा पर रक्षा करे, अपने वीर जवान।मरते मान शहीद से, जीते उज्ज्वल शान।। प्रेम दिवस पर है विनय , सुनिये सभी सुजान।मात पिता को नेह दें, मन विश्वासी मान।। न्यौछावर हैं देश पर , मातृभूमि के पूत।त्याग और बलिदान हित, क्षमता लिए अकूत।। मातृ शक्ति को कर नमन, नारी का

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पिता सदा आदर्श हैं (पिता पर दोहे)

हिंदी कविता

पिता सदा आदर्श हैं (पिता पर दोहे) ख्याल रखें संतान का, तजकर निज अरमान।खुशियाँ देते हैं पिता, रखतें शिशु का ध्यान। ।१ मुखिया बन परिवार का , करतें नेह समान ।पालन पोषण कर पिता , बनते हैं भगवान ।।२ जिसकी ऊँगली थामकर , चलना सीखें आज ।मातु–पिता को मान दें, करें हृदय में राज।।३ शीतल

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शरणार्थियों का सम्मान

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शरणार्थियों का सम्मान होकर मजबूर वो घर- द्वार छोड़ गए, पुराने सुरमई यादों से अपना मुँह मोड़ गए। दहशतगर्दों के साजिश से होकर नाकाम, फिरते इधर- उधर लोग यूं ही करते इनको बदनाम। उम्मीद भरी नैनो से जो देखा सपना, समय की मार से वो कभी न हुआ अपना। मिलता जब इनको सहयोग तो छा

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गंगा दशहरा (20 जून) पर गीत

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गंगा दशहरा (20 जून) पर गीत गोद में तुम सदा ही खिलाती रहो, प्यार से आज तुम ही दुलारो हमेंगंगा मइया यहाँ अब तारो हमें, कष्ट सारे मिटाकर उबारो हमें। मौत के बाद भी तो रहे वास्ता, तुम दिखाओ हमें स्वर्ग का रास्ताअस्थियाँ, भस्म सब कुछ समर्पित करें, फिर नई जिंदगी से भला क्यों डरें

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नभ में छाए काले मेघ

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नभ में छाए काले मेघ नभ में छाए काले मेघ.झूमती धरती इसको देख.बिन नीर प्यासी धरा पर,मेघ लाते आशाएं अनेक। खेत लहराए अपनी आँचल,बागों में आ जाती नई जान.रंग-बिरंगी कोमल पुष्पों से,छा जाती लबों में मुस्कान. हरियाली और खुशहाली,अब सुखहाली भी आएगी.बरसों से संजोया सपना ,वो भी अब पूरी हो जाएगी. आज तपी सूखी मिट्टी

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holi

होली पर्व -कुण्डलियाँ

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होली पर्व पर कुण्डलियाँ ( Holi par Kundaliya) का संकलन हिंदी में रचना आपके समक्ष पेश है . होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है, जो आज विश्वभर में मनाया जाने लगा है।  होली पर्व – कुण्डलियाँ होली के इस पर्व पर, मेटे सब मतभेद।भूल

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जिंदगी पर कविता

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जिंदगी पर कविता ज़िंदगी,क्यों ज़िंदगी से थक रही है,साँस पर जो दौड़ती अब तक रही है। मंज़िलें गुम और ये अंजान राहें,कामयाबी चाह की नाहक रही है । भूख भोली है कहाँ वो जानती है!रोटियाँ गीली, उमर ही पक रही है। हो गए ख़ामोश अब दिल के तराने,बदज़ुबानी महफ़िलों में बक रही है। लाश पर

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